
प्रोटोकॉल टूटा, दोस्ती चमकी! भारत–यूएई रिश्तों में ऐतिहासिक छलांग, 3 अरब डॉलर का एलएनजी करार और रक्षा साझेदारी से बदलेगा क्षेत्रीय समीकरण
नई दिल्ली में सोमवार को जो हुआ, वह कूटनीति से कहीं आगे की तस्वीर पेश करता है। यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के संक्षिप्त दौरे ने भारत–यूएई रिश्तों को ऐसी रफ्तार दी, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रोटोकॉल तोड़कर एयरपोर्ट पर स्वागत करना सिर्फ शिष्टाचार नहीं, बल्कि रणनीतिक संदेश था—भारत और यूएई अब भरोसे के सबसे ऊंचे पायदान पर हैं।

महज साढ़े तीन घंटे के इस दौरे में व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, परमाणु, अंतरिक्ष और एआई जैसे क्षेत्रों में ऐसे फैसले हुए, जो आने वाले दशक की दिशा तय करेंगे। दोनों देशों ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य तय किया—यानी आर्थिक साझेदारी अब दोगुनी रफ्तार से आगे बढ़ेगी।
सबसे बड़ा धमाका ऊर्जा क्षेत्र में हुआ। भारत और यूएई के बीच 3 अरब डॉलर का एलएनजी करार हुआ, जिसके तहत 10 साल तक हर साल 0.5 मिलियन मीट्रिक टन गैस की आपूर्ति होगी। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और यूएई भारत का सबसे भरोसेमंद ऊर्जा साझेदार बनकर उभरेगा।
रक्षा मोर्चे पर भी बड़ा संदेश गया। रणनीतिक रक्षा साझेदारी के लिए फ्रेमवर्क पर सहमति बनी, जिसे क्षेत्रीय समीकरणों में गेमचेंजर माना जा रहा है। खासकर ऐसे समय में, जब पश्चिम एशिया में नई-नई रक्षा धुरियां बन रही हैं।
इतना ही नहीं, असैन्य परमाणु सहयोग, सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर, धोलेरा के विकास, अंतरिक्ष मिशन और ‘डाटा दूतावास’ जैसी भविष्य की अवधारणाओं पर सहमति ने साफ कर दिया—यह सिर्फ दोस्ती नहीं, बल्कि साझा भविष्य की तैयारी है।
दौरे का भावनात्मक पहलू भी उतना ही खास रहा। पीएम मोदी ने राष्ट्रपति अल नाहयान को पारंपरिक भारतीय उपहार देकर सांस्कृतिक रिश्तों की गहराई दिखाई।
निष्कर्ष साफ है: यह दौरा भले ही छोटा था, लेकिन इसके फैसलों की गूंज लंबे समय तक भारत–यूएई रिश्तों और वैश्विक राजनीति में सुनाई देगी।
