
एयरपोर्ट पर शिकंजा: विदेश से लौटते ही नंदू गिरोह का कुख्यात शूटर गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने संगठित अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए कुख्यात गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू गिरोह के सक्रिय सदस्य मनोज राठी को गिरफ्तार कर लिया है। लंबे समय से फरार चल रहा यह आरोपी विदेश में छिपा हुआ था और भारत लौटते ही सुरक्षा एजेंसियों के जाल में फंस गया। अदालत पहले ही उसे भगोड़ा घोषित कर चुकी थी और उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी था।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, आरोपी मनोज राठी (33) हरियाणा के झज्जर जिले का रहने वाला है और उस पर हत्या, अवैध हथियारों की तस्करी और शस्त्र अधिनियम के तहत कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह करीब दो वर्षों से कानून की पकड़ से बाहर था और विदेश में रहकर भी नंदू गिरोह के लिए आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहा था।
IGI एयरपोर्ट पर हुई कार्रवाई
स्पेशल सेल के पुलिस उपायुक्त अमित कौशिक ने जानकारी देते हुए बताया कि नौ जनवरी को जैसे ही मनोज राठी विदेश से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचा, इमिग्रेशन जांच के दौरान उसका नाम लुकआउट सर्कुलर में सामने आ गया। इसके बाद उसे तत्काल रोका गया और पूछताछ के बाद स्पेशल सेल की टीम ने औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। इस पूरी कार्रवाई को इंस्पेक्टर सतीश राणा और इंस्पेक्टर अशोक के नेतृत्व में अंजाम दिया गया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी को लेकर पहले से ही पुख्ता इनपुट थे कि वह किसी भी वक्त भारत लौट सकता है। इसी वजह से एयरपोर्ट पर सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया था।
हत्या और हथियार तस्करी के मामलों में वांछित
जांच में सामने आया है कि मनोज राठी नजफगढ़ थाने में वर्ष 2021 में दर्ज एक सनसनीखेज हत्या के मामले में मुख्य आरोपी है। इसके अलावा बाबा हरिदास नगर थाना और दिल्ली पुलिस की विशेष प्रकोष्ठ इकाई में शस्त्र अधिनियम के तहत दर्ज दो अलग-अलग मामलों में भी वह वांछित था।
पुलिस के अनुसार, वर्ष 2021 में नजफगढ़ इलाके में एक प्रॉपर्टी डीलर की हत्या की गई थी। इस वारदात को कथित तौर पर गैंगस्टर कपिल सांगवान के इशारे पर अंजाम दिया गया था। इस मामले में मनोज राठी की गिरफ्तारी हुई थी और वह करीब तीन साल तक जेल में रहा। बाद में जमानत पर बाहर आने के बाद उसने दोबारा अपराध की राह पकड़ ली।
जमानत के बाद बढ़ाया अपराध का नेटवर्क
स्पेशल सेल की जांच में यह बात सामने आई है कि जेल से बाहर आते ही मनोज राठी ने खुद को दोबारा संगठित अपराध में सक्रिय कर लिया। उसने नंदू गिरोह के लिए अवैध हथियारों की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी संभाली। इसके लिए उसने मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के हथियार तस्करों से संपर्क बनाया और दिल्ली-एनसीआर में हथियारों की सप्लाई का नेटवर्क खड़ा किया।
चार फरवरी 2024 को इस नेटवर्क का बड़ा खुलासा तब हुआ, जब दिल्ली पुलिस की विशेष प्रकोष्ठ टीम ने मध्यप्रदेश से जुड़े दो हथियार तस्करों अंकित मिश्रा और जितेंद्र राजपूत को गिरफ्तार किया। उनके पास से 12 अवैध पिस्तौल बरामद की गई थीं। पूछताछ में दोनों ने बताया था कि यह हथियारों की खेप मनोज राठी और उसके सहयोगियों तक पहुंचाई जानी थी।
गिरफ्तारी से पहले देश छोड़कर हुआ फरार
पुलिस के अनुसार, जैसे ही हथियार तस्करों की गिरफ्तारी की खबर मनोज राठी तक पहुंची, वह तुरंत देश छोड़कर फरार हो गया। इसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट हासिल किया। पांच मार्च 2024 को अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी आवाजाही पर नजर रखने के लिए लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया।
हालांकि, विदेश भागने के बावजूद मनोज राठी पूरी तरह सक्रिय रहा। पुलिस का दावा है कि वह विदेश से ही मोबाइल और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए गिरोह के सदस्यों के संपर्क में था और हथियारों की तस्करी से लेकर अन्य आपराधिक गतिविधियों का समन्वय कर रहा था।
पढ़ाई, नौकरी और फिर अपराध की दुनिया
मनोज राठी का जीवन कई मोड़ों से गुजरा है। वह हरियाणा के बहादुरगढ़ स्थित मोहल्ला जाटवाड़ा का रहने वाला है। उसने 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की, लेकिन वर्ष 2013 में पढ़ाई छोड़ दी। इसके बाद उसने चेन्नई जाकर मर्चेंट नेवी का कोर्स किया और कुछ समय तक सीरिया की एक शिपिंग कंपनी में नौकरी की।
करीब चार साल तक समुद्री नौकरी करने के बाद वर्ष 2017 में उसने मर्चेंट नेवी छोड़ दी और अपने गांव लौट आया। यहां उसने अपने चचेरे भाइयों के साथ प्रॉपर्टी डीलिंग का काम शुरू किया। इसी दौरान वर्ष 2019 में उसका संपर्क गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू से हुआ। पुलिस के मुताबिक, यही संपर्क उसके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ और वह धीरे-धीरे संगठित अपराध का हिस्सा बन गया।
पुलिस को अहम खुलासों की उम्मीद
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल अब मनोज राठी को रिमांड पर लेकर उससे पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि उससे नंदू गिरोह की फंडिंग, हथियार सप्लाई चेन और विदेशों में छिपे अन्य अपराधियों के नेटवर्क को लेकर कई अहम जानकारियां मिल सकती हैं। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि वह किन-किन देशों में छिपा रहा और वहां से भारत में आपराधिक गतिविधियों को कैसे संचालित करता था।
स्पेशल सेल का कहना है कि इस गिरफ्तारी से दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय नंदू गिरोह को बड़ा झटका लगा है। पुलिस को उम्मीद है कि इस कार्रवाई के बाद गिरोह से जुड़े अन्य बदमाशों तक भी जल्द पहुंचा जा सकेगा और अवैध हथियारों की सप्लाई पर प्रभावी रोक लगेगी।



