
मकर संक्रांति पर चीनी मांझा बना जानलेवा, वाराणसी में 15 घायल, बच्चे को 10 टांके
मकर संक्रांति के मौके पर पतंगबाजी के दौरान इस्तेमाल किए जा रहे प्रतिबंधित चीनी मांझे ने वाराणसी में कई लोगों को घायल कर दिया। गुरुवार को शहर के रामनगर, लोहता, कज्जाकपुरा, लहरतारा और चौकाघाट सहित विभिन्न क्षेत्रों में कुल 15 लोग मांझे की चपेट में आ गए। सभी घायलों का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में कराया गया।

सबसे गंभीर मामला लहरतारा क्षेत्र से सामने आया, जहां हरहुआ प्रताप पट्टी निवासी छह वर्षीय पार्थ सिंह का चेहरा चीनी मांझे से कट गया। पार्थ अपने परिजनों के साथ बाइक से जा रहा था। रास्ते में अचानक खिंचे हुए मांझे की चपेट में आने से उसके चेहरे पर गहरा घाव हो गया। बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में उसका इलाज किया गया, जहां डॉक्टरों ने 10 टांके लगाए। चोट आंख के पास होने के कारण स्थिति गंभीर बनी रही।
इसी दिन जैतपुरा थाना क्षेत्र में डायल 112 पर तैनात पुलिसकर्मी भी हादसे का शिकार हो गए। मारपीट की सूचना पर बाइक से जा रहे पुलिसकर्मी विनय कुमार सिंह और अमित कुमार मांझे में फंस गए। विनय कुमार की नाक कट गई, जबकि अमित कुमार की उंगली में चोट आई। दोनों को मंडलीय अस्पताल ले जाया गया, जहां विनय की नाक पर तीन टांके लगाए गए।
अन्य घटनाओं में कज्जाकपुरा में 25 वर्षीय युवक के चेहरे पर कट लगा, सोनारपुरा में एक युवक की गर्दन में मांझा फंस गया, जबकि लोहता के भट्टी गांव निवासी 30 वर्षीय सुधाकर सिंह की आंख और नाक के पास गंभीर चोट आई। दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में चार घायलों का प्राथमिक उपचार कर उन्हें घर भेज दिया गया।
घटनाओं के बाद पुलिस प्रशासन ने आम लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। वहीं सामाजिक स्तर पर भी जागरूकता अभियान शुरू किए गए हैं। बीएचयू छात्रों की संस्था ने अस्सी घाट पर पड़े मांझे को हटाने का अभियान चलाया। इसके साथ ही भाजपा काशी क्षेत्र ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर चीनी मांझे की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की है।
लगातार हो रही इन घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि चीनी मांझा न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि आम जनजीवन के लिए गंभीर खतरा भी बन चुका है।



