
लालच ने मिटा दिया रिश्ता: 15 लाख के विवाद में पोते ने दादा-दादी की हत्या, पुलिस जांच में चौंकाने वाले तथ्य
असंध।
हरियाणा के असंध क्षेत्र के रामनगर गांव में सामने आया दोहरा हत्याकांड रिश्तों की मर्यादा को तार-तार कर देने वाला है। जिन बुजुर्गों ने अपने परिवार को संकट से उबारने के लिए जीवनभर की कमाई लगा दी, उन्हीं की हत्या उनके अपने पोते ने कर दी। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि ₹15 लाख की रकम और संपत्ति पर कब्जा जमाने की नीयत से बुजुर्ग दंपती हरी सिंह नंबरदार (78) और उनकी पत्नी लीला देवी (75) को मौत के घाट उतारा गया।

संस्कार के बाद खुला राज
घटना के बाद पुलिस ने पहले सभी पहलुओं पर जांच की। अंतिम संस्कार के बाद शक की सुई जब पोते रविंद्र की ओर घूमी, तो उसे हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान रविंद्र टूट गया और उसने पूरी साजिश कबूल कर ली। उसके बयान के आधार पर सीआईए असंध की टीम ने उसके दो साथियों—प्रदीप और गुलशन—को भी गिरफ्तार कर लिया।
कर्ज से शुरू हुआ टकराव
डीएसपी गोरखपाल राणा के मुताबिक, रविंद्र के पिता बंसी लाल ने अपने मकान पर बैंक से दो अलग-अलग लोन लिए थे। कुल 11 लाख रुपये का कर्ज चुकता न होने पर बैंक ने कुर्की की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। ऐसे में दादा हरी सिंह नंबरदार ने हस्तक्षेप करते हुए ब्याज समेत करीब ₹15 लाख रुपये अदा कर कर्ज उतार दिया।
इसके बाद हरी सिंह लगातार यह रकम वापस मांग रहे थे, जिससे रविंद्र और उसका परिवार नाराज चल रहा था। यही विवाद धीरे-धीरे हत्या की वजह बन गया।
पहले से बनी थी योजना
पुलिस जांच में सामने आया है कि रविंद्र ने काफी समय पहले दादा-दादी को रास्ते से हटाने की योजना बना ली थी, लेकिन कोई उसका साथ देने को तैयार नहीं था। बाद में उसने जयसिंहपुरा गांव के प्रदीप और गुलशन को तांबा चोरी की झूठी कहानी सुनाकर अपने साथ मिला लिया।
रात के अंधेरे में अंजाम
रविवार रात करीब 11:47 बजे तीनों आरोपी हरी सिंह के घर पहुंचे। वहां पहुंचने के बाद रविंद्र ने असली मंशा बताई। पहले दादी लीला देवी के मुंह पर टेप चिपकाकर उनका गला दबाया गया। इसके बाद दादा हरी सिंह के साथ भी वही तरीका अपनाया गया। हत्या के बाद दोनों शवों के हाथ-पांव रस्सी से बांध दिए गए ताकि मामला लूटपाट का लगे।
बेटे से लगाई मदद की गुहार
जांच में सामने आया कि दादी की हत्या के दौरान दादा हरी सिंह ने आवाज लगाई थी—“रविंद्र बेटा, बचा ले।” इसके बावजूद रविंद्र ने खुद उनका गला दबाया। पुलिस का मानना है कि उस समय आवाज आसपास तक गई होगी, जिससे परिवार के अन्य सदस्यों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
तकनीकी साक्ष्यों से खुला मामला
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाले। तकनीकी सबूतों के आधार पर महज 24 घंटे के भीतर इस दोहरे हत्याकांड का पर्दाफाश कर दिया गया। तीनों आरोपियों को अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया गया है।
जांच अभी जारी
पुलिस का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि क्या परिवार का कोई अन्य सदस्य इस साजिश की जानकारी रखता था या उसमें शामिल था। मामले की गहन जांच जारी है और आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

