
कांग्रेस की रार पहुँची खाकी दरबार तस्वीर हटाने से भड़का विवाद, नोटिस–वीडियो–चेतावनी के बाद पुलिस चौखट तक पहुँचा मामला
गुरुग्राम। हरियाणा कांग्रेस में लंबे समय से सुलग रही गुटबाज़ी अब संगठन की सीमाएँ लांघते हुए पुलिस तक पहुँच गई है। यह विवाद किसी एक बयान से नहीं, बल्कि गुरुग्राम जिला कांग्रेस कार्यालय से वरिष्ठ दलित नेता व सांसद कुमारी सैलजा की तस्वीर हटाए जाने से शुरू हुआ, जिसने पार्टी के भीतर गहरे असंतोष को उजागर कर दिया।
कांग्रेस की रार पहुँची खाकी दरबार
तस्वीर हटाने से भड़का विवाद, नोटिस–वीडियो–चेतावनी के बाद पुलिस चौखट तक पहुँचा मामला
गुरुग्राम। हरियाणा कांग्रेस में लंबे समय से सुलग रही गुटबाज़ी अब संगठन की सीमाएँ लांघते हुए पुलिस तक पहुँच गई है। यह विवाद किसी एक बयान से नहीं, बल्कि गुरुग्राम जिला कांग्रेस कार्यालय से वरिष्ठ दलित नेता व सांसद कुमारी सैलजा की तस्वीर हटाए जाने से शुरू हुआ, जिसने पार्टी के भीतर गहरे असंतोष को उजागर कर दिया।
तस्वीर हटाए जाने को लेकर कांग्रेस के एक वर्ग ने इसे दलित नेतृत्व को जानबूझकर हाशिये पर धकेलने की कोशिश बताया। इसी मुद्दे पर कांग्रेस नेता पी.एल. कटारिया ने संगठन के भीतर और सार्वजनिक मंचों पर सवाल उठाए, जिसके बाद मामला तेजी से तूल पकड़ गया। इसके तुरंत बाद गुरुग्राम शहरी जिलाध्यक्ष पंकज डाबर और गुरुग्राम ग्रामीण जिलाध्यक्ष वर्धन यादव के संयुक्त हस्ताक्षरों से कटारिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। नोटिस में पार्टी संविधान, आचार संहिता और संगठनात्मक अनुशासन के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए सार्वजनिक बयानबाज़ी को अनुशासनहीन करार दिया गया और स्पष्टीकरण न मिलने पर कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
नोटिस के बाद विवाद शांत होने के बजाय और उग्र हो गया। पी.एल. कटारिया ने एक वीडियो जारी कर संगठन और शहरी जिलाध्यक्ष पंकज डाबर पर गंभीर आरोप लगाए। वीडियो में उन्होंने कहा कि कांग्रेस में अब वर्षों की सेवा और निष्ठा का कोई महत्व नहीं रह गया है तथा पार्टी पर एक खास खेमे का वर्चस्व है। कटारिया ने कुमारी सैलजा की तस्वीर हटाने को इसी मानसिकता का प्रतीक बताया।
वीडियो का सबसे संवेदनशील हिस्सा वह बयान रहा, जिसमें कटारिया ने कहा कि अनेक दलित संगठनों के लोग पंकज डाबर से नाराज़ और आक्रोशित हैं, वे उनसे डाबर का पता पूछ रहे हैं, और उन्होंने डाबर को बाहर कम निकलने तथा अपनी सुरक्षा बढ़ाने की “सलाह” दी। इस बयान को राजनीतिक हलकों में चेतावनी के रूप में देखा गया।
इसके बाद शहरी जिलाध्यक्ष पंकज डाबर ने पुलिस आयुक्त कार्यालय में शिकायत दी, जिससे कांग्रेस की अंदरूनी रार औपचारिक रूप से कानून-व्यवस्था के दायरे में पहुँच गई। मामले को लेकर गुरुग्राम पुलिस ने दोनों पक्षों को रविवार को शिवाजी नगर थाना में बुलाया है, जहाँ पूरे घटनाक्रम पर दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे।
इस पूरे विवाद में सबसे उल्लेखनीय शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी है। फिलहाल प्रदेशाध्यक्ष से लेकर वरिष्ठ नेता तक इस मामले पर अनभिज्ञता जता रहे हैं और बयान देने से बचते नज़र आ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम हरियाणा कांग्रेस में जड़ जमाती गुटबाज़ी का प्रतीक है। यदि यही हालात बने रहे, तो पार्टी में विचारधारा और संगठनात्मक संवाद के बजाय खेमेबंदी ही हावी रह जाएगी।
कुल मिलाकर, तस्वीर हटाने से शुरू हुआ यह विवाद अब नोटिस, वीडियो, चेतावनी और पुलिस कार्रवाई तक पहुँच चुका है, जिसने हरियाणा कांग्रेस की आंतरिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
