
जातिवाद और संकीर्ण सोच केवल समाज में दरारें पैदा करती है, जबकि भाईचारा हर कठिनाई और संकट में समाज का सबसे बड़ा सहारा बनता है।
जातिवाद और संकीर्ण सोच केवल समाज में दरारें पैदा करती है, जबकि भाईचारा हर कठिनाई और संकट में समाज का सबसे बड़ा सहारा बनता है।
आजकल हरियाणा में घट रही घटनाओं और हालातों को देखकर यह स्पष्ट हो गया है कि समाज में भाईचारे और सामाजिक सद्भाव की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। जब हम अपनी व्यक्तिगत और सामूहिक सोच को जातिवाद, संकीर्ण विचारधारा और राजनीतिक हाथों की कठपुतली बनाने की प्रवृत्ति में फँसा लेते हैं, तो समाज का मूल आधार ही कमजोर पड़ने लगता है। डॉ नवीन पहल
जातिवाद और संकीर्ण सोच केवल समाज में दरारें पैदा करती है, जबकि भाईचारा हर कठिनाई और संकट में समाज का सबसे बड़ा सहारा बनता है। किसी भी समस्या या आपदा के समय यह देखा गया है कि लोग जाति, धर्म या राजनीति से ऊपर उठकर ही एक-दूसरे की मदद कर पाते हैं। यही भाईचारा वास्तव में सामाजिक मजबूती और राष्ट्रहित का आधार है।राजनीति का मकसद अक्सर सत्ता और स्वार्थ होता है। इसलिए यदि हम अपनी सोच और निर्णयों को राजनीति के इशारों पर आधारित करते हैं, तो हम केवल समाज को भ्रमित और कमजोर करते हैं। असली शक्ति समाज की समझदारी, भाईचारे और एकजुटता में है। हमें यह समझना होगा कि समाज और राष्ट्र के हित में कार्य करना ही सच्चा धर्म है।
अतः अब यह जरूरी है कि हम जातिवाद से ऊपर उठकर, राजनीति के बहकावे में न आएँ और समाज में भाईचारे को मजबूत बनाने के लिए पहल करें। यही रास्ता है जो हमारे प्रदेश और राष्ट्र को स्थिर, सुरक्षित और विकसित बना सकता है।

