हरियाणा

70 करोड़ के धान घोटाले में हैफेड का सीनियर मैनेजर गिरफ्तार, 35 हजार क्विंटल धान गायब

यमुनानगर: हरियाणा में सामने आए करीब 70 करोड़ रुपये के बड़े धान घोटाले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हैफेड के सीनियर मैनेजर सलेंद्र कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने उसे यमुनानगर के तेजली स्टेडियम के पास से पकड़ा। आरोप है कि सलेंद्र कुमार के कार्यक्षेत्र में आने वाली मंडियों और राइस मिलों में धान के स्टॉक और रिकॉर्ड में भारी गड़बड़ी पाई गई है। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, सलेंद्र कुमार के पास प्रतापनगर और रंजीतपुर क्षेत्र का प्रभार था। जांच में सामने आया कि इन क्षेत्रों में कई राइस मिलों में धान के स्टॉक और कागजी रिकॉर्ड के बीच बड़ा अंतर है। इसी आधार पर एसआईटी ने कार्रवाई करते हुए उसे हिरासत में लिया। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में धान के आवंटन, भंडारण और मिलिंग प्रक्रिया में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।

इस पूरे घोटाले का खुलासा 13 नवंबर को हुआ था। उस दिन खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के निदेशक ने छछरौली निवासी कारोबारी संदीप सिंगला के प्रतापनगर स्थित राइस मिल का औचक निरीक्षण किया था। जांच के दौरान पाया गया कि एक ही परिसर में चार राइस मिल संचालित किए जा रहे थे। जब अधिकारियों ने वहां मौजूद धान के स्टॉक का मिलान रिकॉर्ड से किया, तो करीब 42 करोड़ रुपये के धान में गड़बड़ी सामने आई।

इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाते हुए अधिकारियों ने रंजीतपुर क्षेत्र के दो और छछरौली के एक अन्य राइस मिल की भी जांच की। इन मिलों में भी स्टॉक और कागजी रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियां पाई गईं। अधिकारियों के अनुसार संदीप सिंगला से जुड़े कुल सात राइस मिलों में मिलाकर करीब 70 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला सामने आया है।

मिलिंग नीति के तहत इन राइस मिलों को कुल 59,926.124 क्विंटल धान आवंटित किया गया था। जब 14 नवंबर को भौतिक सत्यापन किया गया, तो वहां केवल 24,504.375 क्विंटल धान ही मौजूद पाया गया। यानी लगभग 35,421.75 क्विंटल धान का रिकॉर्ड में तो उल्लेख था, लेकिन वास्तविकता में वह स्टॉक से गायब मिला। इस धान पर खाद्य एवं आपूर्ति विभाग और हैफेड के अधिकारियों की निगरानी होने का दावा किया गया था, लेकिन जांच में भारी लापरवाही और गड़बड़ी सामने आई।

जांच के दौरान पुलिस ने संदीप सिंगला के राइस मिलों से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी अपने कब्जे में लिए हैं। इनमें धान खरीद से जुड़े गेट पास, अप्रैल से नवंबर तक के खरीद रिकॉर्ड, परिवहन से जुड़े दस्तावेज, विभागीय रिपोर्ट, भौतिक सत्यापन के कागजात और स्टॉक रजिस्टर शामिल हैं। इन दस्तावेजों की जांच में कई संदिग्ध बातें सामने आई हैं।

पुलिस के अनुसार दस्तावेजों में काल्पनिक खरीद दिखाने, फर्जी मिलिंग दर्शाने और परिवहन भुगतान में गड़बड़ी के संकेत मिले हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि कई एंट्री बैकडेट में की गई थीं और कंप्यूटर सॉफ्टवेयर में भी बदलाव किए जाने की आशंका है। एसआईटी अब जीपीएस डेटा, परिवहन रिकॉर्ड और मंडियों से उठान से जुड़े आंकड़ों का मिलान कर रही है।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि राइस मिलों की पावर ऑफ अटॉर्नी रीतिका सिंगला के नाम थी, जिसे बाद में उनके पति संदीप सिंगला के नाम कर दिया गया था। पुलिस इस पूरे नेटवर्क की भी जांच कर रही है कि इस घोटाले में किन-किन लोगों की मिलीभगत थी।

इस मामले में पुलिस पहले ही संदीप सिंगला को दो दिसंबर को गिरफ्तार कर चुकी है। गिरफ्तारी के बाद उसे अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। पुलिस ने उससे तीन चरणों में कुल 18 दिन की रिमांड लेकर पूछताछ की। इस दौरान कई अहम जानकारी सामने आई है।

जांच में यह भी पता चला है कि “मेरी फसल मेरा ब्योरा” पोर्टल, मंडी गेट पास, मिल आवंटन और स्टॉक सत्यापन की प्रक्रिया में भी कई अनियमितताएं हुई हैं। इन गड़बड़ियों के आधार पर कई अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।

इस घोटाले के सामने आने के बाद नौ दिसंबर को हैफेड के फील्ड इंस्पेक्टर राजेश कुमार और चंद्र मोहन के साथ-साथ सीनियर मैनेजर सलेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया गया था। इसके अलावा तकनीकी अधिकारी अनिल कुमार को भी निलंबित करते हुए कुरुक्षेत्र कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के एएफएसओ और एक इंस्पेक्टर के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की गई है।

वहीं मार्केट कमेटी के पांच सचिवों को भी आरोप पत्र जारी किया गया है। प्रशासन का कहना है कि जांच में जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले में तकनीकी अधिकारी अनिल कुमार ने अग्रिम जमानत के लिए अदालत में याचिका दाखिल की थी, लेकिन अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद पुलिस ने उनके खिलाफ भी जांच तेज कर दी है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार इस पूरे घोटाले में कई विभागों के अधिकारियों की भूमिका सामने आ सकती है। फिलहाल हैफेड, मंडी बोर्ड, मार्केट कमेटी, मंडी प्रशासन और जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक कार्यालय के 30 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी पुलिस की रडार पर हैं। उनके रिकॉर्ड और जिम्मेदारियों की गहन जांच की जा रही है।

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के महानिदेशक ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने 26 नवंबर तक इस मामले से जुड़े आरोप पत्र और सभी दस्तावेज मुख्यालय भेजने के आदेश दिए थे। साथ ही कहा गया है कि मिलिंग, निरीक्षण और भंडारण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस घटना के बाद जिले की 182 राइस मिलों में सख्त भौतिक सत्यापन लागू करने का फैसला लिया गया है, ताकि भविष्य में इस तरह के घोटालों को रोका जा सके।

एसआईटी और जगाधरी के डीएसपी राजीव मिगलानी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी सलेंद्र कुमार को अदालत में पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जांच अभी जारी है और जैसे-जैसे नए तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि इस मामले में जिसकी भी भूमिका सामने आएगी, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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