
6.16 करोड़ की जमीन की फर्जी रजिस्ट्री का खुलासा, डीड राइटर समेत 5 आरोपी गिरफ्तार
हरियाणा के गन्नौर क्षेत्र में करोड़ों रुपये की जमीन से जुड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेजों की सुरक्षा और सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में गन्नौर थाना पुलिस ने लंबी जांच और साक्ष्यों के आधार पर पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में प्रॉपर्टी डीलर, फर्जी जमीन मालिक, खरीदार और डीड राइटर तक शामिल हैं, जिससे साफ है कि यह पूरा खेल सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया।

पुलिस के अनुसार, इस मामले की शुरुआत एक शिकायत से हुई थी, जिसके बाद गहन जांच शुरू की गई। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने आपसी मिलीभगत से करीब 6.16 करोड़ रुपये की जमीन की फर्जी रजिस्ट्री कर डाली। इस पूरे घटनाक्रम में सुरेश नामक व्यक्ति की मुख्य भूमिका सामने आई है, जो प्रॉपर्टी का काम करता है। उसी ने उत्तर प्रदेश के रहने वाले सुरेंद्र को इस जमीन के बारे में जानकारी दी और उसे इस फर्जी सौदे में शामिल किया।
इसके बाद सुरेंद्र ने कथित तौर पर जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए। इस साजिश में प्रमोद को फर्जी जमीन मालिक बनाया गया, जिसने खुद को असली मालिक बताकर जमीन बेचने का नाटक किया। वहीं बलबीर को खरीदार के रूप में पेश किया गया, ताकि पूरा सौदा वैध दिखाई दे सके। इस पूरे खेल में गन्नौर के डीड राइटर दिनेश कुमार की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई, जिस पर फर्जी रजिस्ट्री प्रक्रिया में सहयोग करने का आरोप है।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि रजिस्ट्री के दौरान कई जरूरी नियमों को नजरअंदाज किया गया। दस्तावेजों में कई खामियां पाई गईं, जिनसे यह साफ हो गया कि रजिस्ट्री पूरी तरह से फर्जी थी। इस गंभीर मामले को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी थाना प्रभारी को सौंपी गई थी, जिन्होंने टीम के साथ मिलकर हर पहलू की बारीकी से जांच की।
शिकायतकर्ता विकास पाड़िया, जो दिल्ली के शालीमार बाग क्षेत्र के निवासी हैं, ने 12 जनवरी को गन्नौर के एसीपी को इस मामले की शिकायत दी थी। उन्होंने बताया कि उनकी फर्म ‘सपाज एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड’ के नाम पर गन्नौर के बाय रोड स्थित करीब 36 कनाल जमीन वर्ष 2011 से दर्ज है। यह जमीन उनकी कंपनी के नाम पर वैध रूप से रजिस्टर्ड थी।
विकास के अनुसार, 10 जनवरी को उन्हें इस बात की जानकारी मिली कि उनकी जमीन की फर्जी तरीके से रजिस्ट्री कर दी गई है। जब उन्होंने खुद जांच की, तो पता चला कि उनकी फर्म के नाम से एक फर्जी अथॉरिटी लेटर तैयार किया गया था, जिसके आधार पर यह जमीन 6.16 करोड़ रुपये में बेच दी गई। यह सुनकर वह हैरान रह गए और तुरंत पुलिस से संपर्क किया।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि 27 नवंबर को हुई रजिस्ट्री में गवाह और अन्य जरूरी पात्रों को भी फर्जी तरीके से पेश किया गया था। गोहाना के गांव बरोदा के प्रवीन कुमार को गवाह और गांव बाय के रविंद्र को नंबरदार के रूप में दिखाया गया था। इन सभी की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया। SIT ने दस्तावेजों की गहराई से जांच की और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की। इसके बाद एक-एक कर सभी पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों को गन्नौर अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें चार दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। पुलिस रिमांड के दौरान आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है, ताकि इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों का भी पता लगाया जा सके। पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह में और भी लोग शामिल हो सकते हैं, जो इस तरह की फर्जी रजिस्ट्री के मामलों में सक्रिय हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भविष्य में इस तरह के मामलों को रोकने के लिए रजिस्ट्री प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में सतर्कता बेहद जरूरी है। छोटे से लापरवाही या दस्तावेजों की सही जांच न करने पर बड़े आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की तह तक जाने में जुटी हुई है और उम्मीद है कि जल्द ही इस फर्जीवाड़े से जुड़े सभी आरोपियों का पर्दाफाश किया जाएगा।

