
50 मीटर की दूरी और जिंदगी खत्म: खुले नाले ने छीना मां का लाल, गांव भंडेरी में मासूम की मौत से फूटा गुस्सा”
हरियाणा के गांव भंडेरी में रविवार की शाम एक ऐसा हादसा हुआ, जिसने पूरे इलाके को दहला दिया। घर के बाहर खेल रहा तीन साल का मासूम कार्तिक कुछ ही मिनटों में मौत के मुंह में समा गया। जिस नाले के पास से रोज लोग गुजरते थे, वही नाला उस दिन एक परिवार की खुशियां बहाकर ले गया।

🟡 खेलते-खेलते मौत की ओर बढ़ गया बच्चा
बताया जा रहा है कि शाम करीब साढ़े चार बजे कार्तिक घर के सामने ही खेल रहा था। उसकी दोनों बड़ी बहनें घर के अंदर थीं, जबकि मां घरेलू काम में व्यस्त थी। आसपास का माहौल सामान्य था और किसी को अंदेशा नहीं था कि कुछ ही देर में यह शाम हमेशा के लिए काली हो जाएगी।
धीरे-धीरे खेलते हुए कार्तिक घर से थोड़ी दूरी पर बने नाले की तरफ चला गया। यह नाला गांव से गुजरता है और उसमें कई महीनों से पानी जमा है। न तो वहां घेराबंदी थी, न कोई चेतावनी बोर्ड, न ही सुरक्षा की कोई व्यवस्था।
🟡 अचानक गायब हुआ कार्तिक, घबराया परिवार
कुछ देर बाद जब मां ने आवाज लगाई और कार्तिक नहीं दिखा, तो पहले लगा कि वह पड़ोस में चला गया होगा। लेकिन जब आसपास खोजा गया और उसका कहीं पता नहीं चला, तो परिवार की चिंता बढ़ गई।
थोड़ी ही देर में पूरा परिवार और आसपास के लोग उसे ढूंढने में जुट गए। किसी ने गलियों में तलाश की, किसी ने खेतों में, तो कुछ लोगों ने तालाब की तरफ देखा। तभी एक युवक ने सुझाव दिया कि नाले में भी देखा जाए।
🟡 नाले में मिला मासूम, टूट गया परिवार
जैसे ही ग्रामीणों ने नाले में झांककर देखा, वहां एक छोटा सा शरीर पानी में पड़ा दिखाई दिया। यह दृश्य देखकर लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। तुरंत उसे बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
मासूम कार्तिक अब इस दुनिया में नहीं था।
जब उसका शव घर लाया गया तो मां की चीख सुनकर पूरा गांव रो पड़ा। पिता स्तब्ध खड़े रहे, जैसे उनकी दुनिया अचानक उजड़ गई हो। बहनें समझ नहीं पा रही थीं कि उनका भाई अब कभी उनके साथ नहीं खेलेगा।
🟡 दो बहनों का इकलौता भाई था कार्तिक
परिवार के मुताबिक कार्तिक घर का सबसे छोटा बच्चा था। दो बहनों के बीच वह इकलौता बेटा था, जिसे परिवार का “चिराग” कहा जाता था।
पिता सचिन मेहनत-मजदूरी कर परिवार चलाते हैं। उन्होंने अपने बेटे के लिए कई सपने देखे थे—उसे स्कूल भेजेंगे, पढ़ाएंगे, बड़ा आदमी बनाएंगे। लेकिन किस्मत ने वह मौका ही नहीं दिया।
गांव की महिलाएं भी रोते हुए कहती दिखीं कि “जिस बच्चे को कल तक गोद में खिलाया था, आज उसे अर्थी पर देखना पड़ रहा है।”
🟡 पहले भी जताई गई थी चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि यह हादसा अचानक नहीं हुआ। इस नाले को लेकर लंबे समय से शिकायतें की जा रही थीं।
कुछ महीने पहले गांव के तालाब की सफाई के दौरान इस नाले के जरिए पानी छोड़ा गया था। बाद में नाले में जमा पानी वहीं रह गया। धीरे-धीरे यह जगह गहरी और खतरनाक हो गई।
लोगों ने पंचायत से कई बार कहा कि नाले के पास कांटेदार झाड़ियां लगा दी जाएं या पक्की दीवार बना दी जाए, ताकि बच्चे वहां न जा सकें।
लेकिन इन मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
🟡 हादसे के बाद फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
कार्तिक की मौत के बाद गांव में शोक के साथ गुस्सा भी साफ दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि यह सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि लापरवाही का नतीजा है।
लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सुरक्षा व्यवस्था कर दी जाती, तो मासूम की जान बच सकती थी।
कुछ ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और मांग की कि गांव के सभी खुले नालों और गड्ढों की तुरंत घेराबंदी कराई जाए।
🟡 पुलिस और प्रशासन की एंट्री
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। शव को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू की गई है। प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने का आश्वासन दिया है।
हालांकि परिवार और ग्रामीणों का कहना है कि अब जांच और आश्वासन से क्या होगा, जब उनका बच्चा लौटकर नहीं आएगा।
🟡 घर में पसरा सन्नाटा
कार्तिक के घर के बाहर लोगों की भीड़ लगी रही, लेकिन अंदर गहरा सन्नाटा था। जहां कल तक बच्चे की हंसी गूंजती थी, वहां अब सिर्फ रोने की आवाज सुनाई दे रही थी।
बहनों की आंखें दरवाजे पर टिकी थीं, जैसे उन्हें अब भी उम्मीद हो कि उनका भाई दौड़ता हुआ अंदर आ जाएगा।
मां बार-बार एक ही बात कह रही थी—
“काश किसी ने नाले को ढक दिया होता… मेरा बेटा जिंदा होता…”
🟡 पूरे समाज के लिए सबक
यह हादसा सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि समाज के लिए चेतावनी भी है। गांवों और कस्बों में खुले नाले, अधूरे निर्माण और पानी भरे गड्ढे अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं।
लेकिन जब तक कोई बड़ा हादसा नहीं होता, लोग और प्रशासन दोनों ही गंभीर नहीं होते।
कार्तिक की मौत ने यह सवाल खड़ा कर दिया है—
क्या बच्चों की सुरक्षा सिर्फ हादसों के बाद ही याद आती है?

