
16 मार्च को संसद घेरने की तैयारी में युवा कांग्रेस, कार्यकर्ताओं पर दर्ज मुकदमों के विरोध में होगा बड़ा प्रदर्शन
हरियाणा में राजनीतिक गतिविधियां तेज होती नजर आ रही हैं। Indian Youth Congress ने केंद्र सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन करने का ऐलान किया है। हरियाणा युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता 16 मार्च को नई दिल्ली में संसद का घेराव करेंगे। संगठन का कहना है कि यह प्रदर्शन हाल ही में दर्ज किए गए मुकदमों के विरोध में किया जाएगा, जिन्हें युवा कांग्रेस नेताओं ने राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है।

युवा कांग्रेस के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष Nishit Kataria ने इस आंदोलन की घोषणा करते हुए कहा कि हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित एआई समिट के दौरान युवा कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामले दर्ज किए गए और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। उनका आरोप है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है।
कटारिया के मुताबिक यह घटना उस समय हुई जब नई दिल्ली के Bharat Mandapam में एआई समिट का आयोजन किया गया था। इस दौरान कुछ युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जताने के बावजूद सरकार ने कड़ी कार्रवाई करते हुए कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर दिए।
युवा कांग्रेस का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन सरकार ने इसे दबाने की कोशिश की है। संगठन का आरोप है कि विरोध की आवाज को कुचलने के लिए युवाओं को निशाना बनाया गया और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।
इसी मुद्दे को लेकर अब हरियाणा युवा कांग्रेस ने बड़ा आंदोलन करने की रणनीति बनाई है। संगठन के अनुसार 16 मार्च को बड़ी संख्या में युवा दिल्ली पहुंचेंगे और संसद का घेराव कर अपनी आवाज उठाएंगे। इस प्रदर्शन के माध्यम से सरकार पर दबाव बनाया जाएगा कि वह दर्ज किए गए मुकदमों को वापस ले।
इस आंदोलन की तैयारियों को लेकर संगठन के नेता लगातार सक्रिय हैं। प्रदेश अध्यक्ष Nishit Kataria और हरियाणा कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता Tarun Tevatia इन दिनों राज्य के अलग-अलग जिलों का दौरा कर रहे हैं। इन दौरों के दौरान वे पार्टी कार्यकर्ताओं और युवा नेताओं के साथ बैठकें कर रहे हैं।
इन बैठकों में न केवल 16 मार्च के आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की जा रही है, बल्कि संगठन को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है। नेताओं का कहना है कि युवाओं को राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
जिला स्तर पर आयोजित बैठकों में पिछले आंदोलनों की समीक्षा भी की जा रही है। साथ ही यह तय किया जा रहा है कि आने वाले समय में किस तरह युवाओं को संगठित कर उनकी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया जाए।
प्रदेश अध्यक्ष निशित कटारिया का कहना है कि संसद घेराव के कार्यक्रम को लेकर युवाओं में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। उनके अनुसार राज्य के लगभग सभी जिलों से युवा इस आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए तैयार हैं।
कटारिया ने कहा कि यह आंदोलन केवल किसी एक संगठन का नहीं बल्कि युवाओं की आवाज का आंदोलन है। उनका कहना है कि यदि युवाओं को अपनी बात रखने का अधिकार नहीं दिया जाएगा तो लोकतंत्र की भावना कमजोर हो जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक देश में विरोध और असहमति व्यक्त करना एक सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन यदि सरकार ऐसे प्रदर्शनों को अपराध की तरह देखेगी और युवाओं पर मुकदमे दर्ज करेगी, तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े होंगे।
वहीं हरियाणा कांग्रेस के प्रवक्ता Tarun Tevatia ने भी इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि युवाओं पर कार्रवाई करना लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
तेवतिया ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष निशित कटारिया के नेतृत्व में होने वाला यह कार्यक्रम युवाओं के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए आयोजित किया जा रहा है। उनका कहना है कि सरकार को चाहिए कि वह पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए।
उन्होंने मांग की कि जिन युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उन्हें तुरंत वापस लिया जाए। उनके अनुसार यदि सरकार ऐसा नहीं करती है तो संगठन आगे भी आंदोलन जारी रखेगा।
युवा कांग्रेस नेताओं का कहना है कि संसद घेराव का कार्यक्रम पूरी तरह से लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से किया जाएगा। संगठन का उद्देश्य केवल अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना है।
संगठन के अनुसार आने वाले दिनों में आंदोलन को सफल बनाने के लिए और भी बैठकें आयोजित की जाएंगी। कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां दी जा रही हैं और विभिन्न जिलों से दिल्ली पहुंचने की तैयारियां भी की जा रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के आंदोलनों से प्रदेश और राष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ सकती है। खासतौर पर तब जब युवाओं से जुड़े मुद्दे सामने आते हैं।
फिलहाल 16 मार्च को होने वाले इस प्रस्तावित संसद घेराव पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस आंदोलन में कितनी संख्या में युवा शामिल होते हैं और सरकार की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

