
हाईकोर्ट का संवेदनशील निर्णय: 14 वर्षीय छात्र की सड़क हादसे में मौत पर मुआवजा 6.40 लाख से बढ़ाकर 14.18 लाख
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक बेहद मानवीय और संवेदनशील फैसला सुनाते हुए सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले 14 वर्षीय छात्र के माता-पिता को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) द्वारा पहले दिए गए 6.40 लाख रुपये के मुआवजे को अपर्याप्त मानते हुए इसे बढ़ाकर 14.18 लाख रुपये कर दिया है। यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के दर्द को समझने वाला है, बल्कि भविष्य की संभावनाओं को भी न्याय के दायरे में लाने वाला माना जा रहा है।

भविष्य की संभावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अर्चना पुरी ने स्पष्ट कहा कि मुआवजा तय करते समय मृतक बच्चे की उम्र, उसकी प्रतिभा और भविष्य की संभावनाओं को अनदेखा नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने माना कि भले ही बच्चा कम उम्र का था, लेकिन उसकी पढ़ाई और खेलों में प्रतिभा यह दर्शाती है कि भविष्य में उसकी आय और योगदान कहीं अधिक हो सकता था।
पढ़ाई और खेलों में था होनहार
मृतक छात्र के माता-पिता की ओर से अधिवक्ता वाणी सिंह ने कोर्ट को बताया कि बच्चा न केवल पढ़ाई में तेज था, बल्कि खेलों में भी विशेष रुचि और प्रतिभा रखता था। इसके बावजूद ट्रिब्यूनल ने मुआवजा तय करते समय इन पहलुओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में केवल वर्तमान आय नहीं, बल्कि संभावित भविष्य को भी महत्व देना चाहिए।
बीमा कंपनी का समझौते का प्रस्ताव
सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी की ओर से अधिवक्ता राहुल पठानिया ने सौहार्दपूर्ण समझौते का प्रस्ताव रखा, जिसे बच्चे के माता-पिता ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद कोर्ट ने मृतक की काल्पनिक मासिक आय 8,500 रुपये मानते हुए सालाना आय 1.02 लाख रुपये तय की। इसके साथ ही भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए इसमें 40 प्रतिशत की वृद्धि भी जोड़ी गई।
18 का मल्टीप्लायर, 14.18 लाख का मुआवजा
कोर्ट ने 18 का मल्टीप्लायर लगाते हुए कुल मुआवजा 14.18 लाख रुपये निर्धारित किया। ट्रिब्यूनल द्वारा पहले ही 6.90 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका था, ऐसे में अब माता-पिता को अतिरिक्त 7.28 लाख रुपये मिलने का रास्ता साफ हो गया है। हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया है कि शेष राशि छह सप्ताह के भीतर अदा की जाए।
ट्रिब्यूनल के फैसले में किया गया सुधार
गौरतलब है कि मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने पहले मृतक की वार्षिक आय मात्र 40,000 रुपये मानते हुए 16 का मल्टीप्लायर लगाया था और कुल 6.40 लाख रुपये मुआवजा तय किया था। इसमें अंतिम संस्कार और प्रेम-स्नेह के लिए 50,000 रुपये भी शामिल थे। हाईकोर्ट ने इस राशि को अपर्याप्त मानते हुए इसमें महत्वपूर्ण संशोधन किया।
न्याय के साथ मानवीय संवेदना
यह फैसला उन मामलों में एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है, जहां कम उम्र के बच्चों की मृत्यु के बाद उनके भविष्य की संभावनाओं को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। हाईकोर्ट का यह निर्णय न केवल कानून की व्याख्या करता है, बल्कि पीड़ित परिवार के प्रति गहरी मानवीय संवेदना भी दर्शाता है।


