
हरियाणा के सरकारी अस्पतालों को मिलेगी बड़ी राहत, 160 करोड़ की दवाइयों व उपकरणों को मंजूरी
हरियाणा में सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए लगभग 160 करोड़ रुपये की दवाइयों और अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों की खरीद को मंजूरी दे दी है। इससे प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता बेहतर होगी और मरीजों को जरूरी दवाइयों व जांच सुविधाओं के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।

हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने यह जानकारी स्पेशल हाई-पावर्ड परचेज कमेटी की बैठक की अध्यक्षता करने के बाद दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार सशक्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार का लक्ष्य है कि आम नागरिकों को बेहतर, सुलभ और समय पर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें, ताकि उन्हें निजी अस्पतालों पर निर्भर न रहना पड़े।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि कमेटी की बैठक में विभिन्न अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों और जरूरी दवाओं की खरीद को अंतिम रूप दिया गया है। इनमें डायग्नोस्टिक मशीनों से लेकर आईसीयू उपकरण, ट्रॉमा केयर सुविधाएं, एम्बुलेंस और लैब से जुड़ी आधुनिक तकनीक शामिल है। इन सभी उपकरणों की खरीद से सरकारी अस्पतालों की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 6 ऑटोमेटेड हाई थ्रूपुट NAAT मशीनें (पैथोडिटेक्ट मशीन) खरीदी जाएंगी, जिन पर लगभग 4 करोड़ रुपये खर्च होंगे। ये मशीनें संक्रमण की पहचान में मददगार साबित होंगी और रिपोर्ट जल्दी मिलने से मरीजों का समय पर इलाज संभव हो सकेगा। इसके अलावा टीबी मरीजों की जांच को और बेहतर बनाने के लिए 40 ट्रूनेट मशीनों की खरीद को मंजूरी दी गई है, जिन पर लगभग 6 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
सिविल अस्पतालों की लेबोरेटरी सेवाओं को मजबूत करने के लिए 36 ऑटोमैटिक हेमेटोलॉजी एनालाइजर (फाइव पार्ट) खरीदे जाएंगे, जिनकी लागत लगभग 9.79 करोड़ रुपये होगी। इससे खून से संबंधित जांचों में तेजी आएगी और मरीजों को रिपोर्ट के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। वहीं, सिविल अस्पतालों के आईसीयू को बेहतर बनाने के लिए 1156 सिरिंज इन्फ्यूजन पंप खरीदे जाएंगे, जिन पर 5.22 करोड़ रुपये खर्च होंगे। ये पंप गंभीर मरीजों के इलाज में अहम भूमिका निभाएंगे।
एनसीआर क्षेत्र में ट्रॉमा सेवाओं के अपग्रेडेशन पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसके तहत 26 ऑर्थोपेडिक बैटरी ऑपरेटेड कॉर्डलेस ड्रिल सिस्टम की खरीद को मंजूरी दी गई है, जिनकी लागत लगभग 4.64 करोड़ रुपये होगी। साथ ही जिला सिविल अस्पतालों के लिए 24 फ्लैट पैनल C-आर्म मशीनें खरीदी जाएंगी, जिन पर 5.80 करोड़ रुपये खर्च होंगे। ये मशीनें हड्डियों से जुड़ी सर्जरी और जांच में काफी मददगार होंगी।
इसके अलावा, जिला सिविल अस्पतालों की हिस्टोपैथोलॉजी लैब को मजबूत करने के लिए 11 ग्रॉसिंग स्टेशनों की खरीद की जाएगी, जिनकी अनुमानित लागत 2.34 करोड़ रुपये है। एनसीआर क्षेत्र में ट्रॉमा सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए 22 डिजिटल रेडियोग्राफी सिस्टम की खरीद को भी मंजूरी दी गई है, जिन पर लगभग 24.95 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वहीं, 134 रेट्रोफिट डिजिटल रेडियोग्राफी सिस्टम पर 14.76 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, ताकि पुराने सिस्टम को आधुनिक तकनीक से लैस किया जा सके।
आंखों के इलाज को बेहतर बनाने के लिए सभी जिला सिविल अस्पतालों के नेत्र विज्ञान विभागों में 28 ऑटो रिफ्रेक्टोमीटर विद केराटोमीटर लगाए जाएंगे, जिन पर लगभग 2 करोड़ रुपये खर्च होंगे। ऑपरेशन थिएटर की सुविधाओं को उन्नत करने के लिए 100 इलेक्ट्रो हाइड्रोलिक ऑपरेशन थिएटर टेबल की खरीद को मंजूरी दी गई है, जिसकी लागत 15.34 करोड़ रुपये होगी। इससे सर्जरी के दौरान डॉक्टरों और मरीजों दोनों को बेहतर सुविधा मिलेगी।
आपातकालीन सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए एनसीआर क्षेत्र में 70 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस खरीदी जाएंगी, जिन पर लगभग 33.78 करोड़ रुपये खर्च होंगे। ये एम्बुलेंस आधुनिक जीवन रक्षक उपकरणों से लैस होंगी और सड़क दुर्घटना या गंभीर स्थिति में मरीजों को समय पर बेहतर उपचार उपलब्ध करा सकेंगी।
चिकित्सा उपकरणों के साथ-साथ जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। स्वास्थ्य सेवा वितरण को मजबूत करने के उद्देश्य से लगभग 30 करोड़ रुपये की आवश्यक और महत्वपूर्ण दवाओं के रेट कॉन्ट्रैक्ट को अंतिम रूप दिया गया है। इनमें कुत्ते के काटने के मामलों के लिए एंटी-रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन, विभिन्न प्रकार की दर्द निवारक दवाएं, एंटीबायोटिक्स और रोजमर्रा की जांच व उपचार में उपयोग होने वाले मेडिकल कंज्यूमेबल्स शामिल हैं।
स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि इन दवाओं और उपकरणों की खरीद का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी अस्पतालों में जरूरी दवाओं का पर्याप्त स्टॉक हमेशा उपलब्ध रहे। इससे मरीजों को इलाज के दौरान किसी प्रकार की रुकावट न हो और उन्हें समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
इस मौके पर स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल, फूड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन हरियाणा के कमिश्नर डॉ. मनोज कुमार, स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक डॉ. मनीष बंसल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने विश्वास जताया कि इस पहल से हरियाणा की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी और आम जनता को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

