
स्कूल से निकली थी घर के लिए, मौत के शिकंजे में फंस गई — कॉफी में नशीला पदार्थ, दुष्कर्म का आरोप और बेटी की बुझती सांसों ने खड़े किए सवाल
हरियाणा के हरियाणा में एक नाबालिग छात्रा की संदिग्ध हालात में मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। यह मामला सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि समाज की सुरक्षा व्यवस्था, बेटियों की सुरक्षा और कानून के क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्नचिह्न बनकर उभरा है। घटना दादरी के रोजगार गार्डन क्षेत्र से जुड़ी है, जहां दो दिन पहले एक किशोरी अचेत अवस्था में मिली थी। बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

बताया जा रहा है कि 24 फरवरी की सुबह छात्रा रोज की तरह स्कूल गई थी। परिवार को क्या पता था कि यह उसकी जिंदगी का आखिरी दिन साबित होगा। दोपहर के समय पुलिस से सूचना मिली कि एक लड़की पार्क में बेसुध पड़ी है। सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे। बेटी को उस हालत में देखकर परिवार के लोगों का दिल दहल उठा।
उसे तुरंत स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने स्थिति गंभीर बताते हुए उसे रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया। लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया और इलाज के दौरान छात्रा ने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों के मृत घोषित करते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मां की चीखें अस्पताल की दीवारों से टकराकर लौटती रहीं, जबकि पिता की आंखों में गुस्सा और बेबसी दोनों साफ झलक रहे थे।
मृतका के पिता ने पुलिस को दी शिकायत में बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनकी बेटी को जबरन कॉफी में नशीला पदार्थ मिलाकर पिलाया गया, जिससे वह बेहोश हो गई। इसके बाद उसके साथ दुष्कर्म किया गया। पिता का आरोप है कि इस अपराध में चार युवक शामिल हैं। उन्होंने पुलिस को नाम भी बताए हैं और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है।
पिता ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, वे अपनी बेटी का शव नहीं लेंगे। उनका कहना है कि यह केवल हत्या नहीं, बल्कि एक बेटी की अस्मिता और परिवार की उम्मीदों की हत्या है। उनकी इस मांग के बाद अस्पताल परिसर में तनाव का माहौल बन गया। रिश्तेदार और स्थानीय लोग भी परिवार के समर्थन में जुटने लगे।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पॉक्सो एक्ट, हत्या और अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच तेजी से की जा रही है और संदिग्धों की तलाश में टीमें भेजी गई हैं। हालांकि अब तक गिरफ्तारी न होने से लोगों में नाराजगी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस जगह से लड़की मिली, वहां सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर है। लोगों का आरोप है कि शाम के समय वहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाती। इस घटना के बाद अभिभावकों में डर का माहौल है। कई परिवारों ने कहा कि अब वे अपनी बेटियों को अकेले बाहर भेजने से डरने लगे हैं।
मृतका की मां की हालत बेहद खराब बताई जा रही है। वह बार-बार यही कह रही हैं कि उनकी बेटी को न्याय मिलना चाहिए। परिवार के रिश्तेदारों का कहना है कि बच्ची पढ़ाई में अच्छी थी और उसके सपने बड़े थे। किसी ने नहीं सोचा था कि उसकी जिंदगी इतनी दर्दनाक तरीके से खत्म हो जाएगी।
सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो दोषियों को फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सजा दिलाई जानी चाहिए। कई संगठनों ने परिवार को कानूनी सहायता देने और न्याय दिलाने के लिए आंदोलन की चेतावनी भी दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना समाज के सामने एक कड़वी सच्चाई रखती है — बच्चों और किशोरियों की सुरक्षा अब भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। स्कूल से घर तक सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना प्रशासन, समाज और परिवार — तीनों की साझा जिम्मेदारी है। यदि इस जिम्मेदारी को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो ऐसी घटनाएं दोहराई जा सकती हैं।
फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिससे मौत का वास्तविक कारण सामने आ सके। पुलिस का कहना है कि रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई और तेज की जाएगी। लेकिन परिवार और समाज की नजरें अब केवल एक चीज पर टिकी हैं — न्याय।
इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि बेटियों की सुरक्षा सिर्फ भाषणों और योजनाओं से नहीं, बल्कि सख्त कार्रवाई और सामाजिक जागरूकता से ही संभव है। एक मासूम की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है, और अब हर कोई यही सवाल पूछ रहा है — क्या इस बेटी को इंसाफ मिलेगा?

