
वन-वे हाईवे बना हादसे की वजह: फतेहाबाद में तीन गाड़ियों की भिड़ंत, मां-बेटे की दर्दनाक मौत
हरियाणा के हरियाणा के फतेहाबाद जिले में शनिवार की शाम एक भीषण सड़क हादसा हुआ, जिसने एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। नेशनल हाईवे पर तीन वाहनों की आपस में टक्कर में मां और बेटे की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच अन्य लोग घायल हो गए। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कुछ समय के लिए हाईवे पर यातायात भी पूरी तरह बाधित हो गया।

यह हादसा गांव धांगड़ के पास उस समय हुआ, जब हाईवे पर मरम्मत का काम चल रहा था। सड़क का एक हिस्सा बंद होने के कारण ट्रैफिक को वन-वे कर दिया गया था। ऐसे में वाहनों की आवाजाही एक ही लेन से हो रही थी, जिससे जोखिम और बढ़ गया था। शाम करीब सात बजे, जब ट्रैफिक का दबाव बढ़ रहा था, तभी अचानक तीन गाड़ियां एक के बाद एक टकरा गईं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हिसार की तरफ से आ रही एक कार सामने चल रही पिकअप गाड़ी से जा भिड़ी। बताया जा रहा है कि पिकअप चालक ने अचानक ब्रेक लगा दिया, जिससे पीछे आ रही कार समय पर रुक नहीं पाई और सीधी टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
इसी बीच पीछे से आ रही एक ट्रैवलर गाड़ी भी संतुलन खो बैठी और कार से जा टकराई। इस तरह कुछ ही पलों में तीन वाहनों की चेन टक्कर ने एक बड़ा हादसा खड़ा कर दिया। घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई और आसपास के लोग मदद के लिए दौड़ पड़े।
इस हादसे में पंजाब के बठिंडा जिले के पक्का कलां गांव के रहने वाले 22 वर्षीय अमर सिंह और उनकी 50 वर्षीय मां निर्मला की जान चली गई। दोनों एक ही कार में सवार थे और किसी काम से हरियाणा आए थे। जब उन्हें अस्पताल ले जाया गया, तो डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
हादसे में घायल हुए अन्य लोगों में हरप्रीत, पूजा और दो अन्य शामिल हैं, जो एक ही परिवार के सदस्य बताए जा रहे हैं। इसके अलावा पिकअप चालक सुभाष, जो हिसार का निवासी है, भी इस दुर्घटना में घायल हो गया। सभी घायलों को पहले स्थानीय नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर घायलों को अग्रोहा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
ट्रैवलर वाहन, जो पंजाब से दिल्ली एयरपोर्ट की ओर जा रहा था, उसमें सवार चालक और परिचालक को मामूली चोटें आईं। गनीमत रही कि ट्रैवलर में बैठे अन्य यात्रियों को कोई गंभीर नुकसान नहीं हुआ, वरना हादसा और भी भयावह हो सकता था।
हादसे के तुरंत बाद मौके पर मौजूद लोगों ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। कई लोग घायलों को गाड़ियों से बाहर निकालने में जुट गए, जबकि कुछ ने एंबुलेंस और पुलिस को सूचना दी। स्थानीय लोगों की तत्परता के कारण घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सका।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। शहर और सदर थाना पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हाईवे से हटवाकर यातायात को फिर से चालू करवाया। हालांकि, इस दौरान करीब एक घंटे तक हाईवे पर लंबा जाम लगा रहा, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी उठानी पड़ी।
सदर थाना प्रभारी प्रहलाद सिंह ने बताया कि फिलहाल घायलों का इलाज जारी है और उनकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि अभी तक किसी पक्ष की ओर से कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है, लेकिन पुलिस अपने स्तर पर पूरे मामले की जांच कर रही है।
यह हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि सड़क निर्माण और मरम्मत के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए जाते। वन-वे ट्रैफिक, अपर्याप्त संकेत और अचानक ब्रेक जैसी परिस्थितियां मिलकर इस तरह के हादसों को जन्म देती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे क्षेत्रों में स्पष्ट संकेतक, स्पीड लिमिट और ट्रैफिक कंट्रोल बेहद जरूरी होता है। यदि ड्राइवरों को पहले से चेतावनी मिल जाए, तो वे अपनी गति नियंत्रित कर सकते हैं और दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि हाईवे पर चल रहे मरम्मत कार्य के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। साथ ही, वाहन चालकों से भी अपील की गई है कि वे ऐसे क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतें और ट्रैफिक नियमों का पालन करें।
मां-बेटे की मौत ने पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ा दी है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और हर कोई इस हादसे को लेकर स्तब्ध है। एक ही झटके में दो जिंदगियां खत्म हो जाने से पूरा परिवार टूट गया है।
फिलहाल पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए रिपोर्ट तैयार की जा रही है। आने वाले समय में इस रिपोर्ट के आधार पर जरूरी कदम उठाए जाएंगे, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
यह घटना हमें यह याद दिलाती है कि सड़क पर हर पल सतर्क रहना कितना जरूरी है। एक छोटी सी गलती या लापरवाही किसी की पूरी जिंदगी बदल सकती है।

