
लावड़ बाजार में देर रात बवाल, लूट के आरोपों पर पुलिस की कार्रवाई सवालों में
मेरठ जनपद के लावड़ कस्बे में शनिवार देर रात मुख्य बाजार में हुई मारपीट और कथित लूट की घटना ने व्यापारियों और पुलिस के बीच तनाव पैदा कर दिया है। तीन अलग-अलग दुकानों में घुसकर मारपीट और सामान व नकदी ले जाने के आरोपों के बीच पुलिस द्वारा मुकदमा केवल मारपीट की धाराओं में दर्ज किए जाने से व्यापारी आक्रोशित हैं। पीड़ितों का कहना है कि उनकी लूट की तहरीर बदलवाकर मामला हल्का किया गया, जबकि पुलिस का दावा है कि उसे जो लिखित शिकायत मिली, उसी के आधार पर कार्रवाई की गई।

घटना शनिवार देर रात की बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ित व्यापारियों के अनुसार, करीब सात से आठ युवक दो कारों में सवार होकर मुख्य बाजार पहुंचे। बाजार में उस समय कुछ दुकानें खुली थीं और लोग अपने कामकाज में लगे थे। आरोप है कि बदमाश सीधे कपड़े की दुकान संचालक राजकुमार और सुंदर की दुकान में घुस गए। वहां उन्होंने पहले कहासुनी की और फिर मारपीट शुरू कर दी। दुकानदारों का कहना है कि आरोपियों ने दुकान से सामान भी उठाया और जान से मारने की धमकी दी। कुछ व्यापारियों का दावा है कि हमलावरों ने गोली मारने की धमकी देकर दहशत फैलाई।
इसके बाद वही समूह चिंदौड़ी रोड स्थित शुभम की किराना दुकान पर पहुंचा। आरोप है कि वहां भी मारपीट की गई और दुकान से सामान व नकदी ले ली गई। तीसरी घटना कृष्णा इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम में बताई गई, जहां कृष्णपाल सैनी के बेटे अर्जुन के साथ मारपीट कर नकदी ले जाने का आरोप है। घटनाक्रम कुछ ही मिनटों में हुआ, जिससे बाजार में अफरा-तफरी मच गई।
बताया जा रहा है कि पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है। बाजार क्षेत्र में लगे कैमरों में संदिग्ध वाहनों और कुछ युवकों की गतिविधियां रिकॉर्ड हुई हैं। व्यापारियों का कहना है कि फुटेज में साफ दिखाई दे रहा है कि हमलावर समूह बनाकर दुकानों में घुसा और हंगामा किया। इसी आधार पर वे लूट का मुकदमा दर्ज करने की मांग कर रहे हैं।
पीड़ित व्यापारी कृष्णपाल सैनी ने आरोप लगाया कि घटना के अगले दिन वे पुलिस चौकी पहुंचे और मारपीट के साथ लूट की भी तहरीर दी। उनका कहना है कि पुलिस ने लूट का उल्लेख हटाने के लिए दबाव बनाया और कहा कि केवल मारपीट की शिकायत दी जाए। उनका आरोप है कि गंभीर घटना को हल्का दिखाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि बाजार के व्यापारी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और यदि सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन पर विचार करेंगे।
अन्य व्यापारियों ने भी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब घटना के दृश्य कैमरे में कैद हैं और कई दुकानों में एक साथ वारदात हुई है, तो इसे सामान्य झगड़ा या मामूली मारपीट नहीं कहा जा सकता। व्यापार मंडल से जुड़े कुछ लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि लूट की धाराएं नहीं जोड़ी गईं तो वे उच्चाधिकारियों से शिकायत करेंगे।
दूसरी ओर, पुलिस का पक्ष अलग है। सीओ सदर देहात सुधीर सिंह ने बताया कि उन्हें जो लिखित तहरीर प्राप्त हुई, उसी के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि आदी, विनय, आकाश और अंकित नामजद आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। उनके अनुसार, शिकायत में लूट का स्पष्ट उल्लेख नहीं था, इसलिए उसी अनुरूप धाराएं लगाई गईं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और यदि जांच के दौरान लूट के साक्ष्य सामने आते हैं तो धाराएं बढ़ाई जा सकती हैं।
पुलिस अधिकारियों का यह भी कहना है कि सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है और संदिग्ध वाहनों की पहचान की कोशिश हो रही है। बाजार क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती भी की गई है, ताकि किसी प्रकार का तनाव न बढ़े। अधिकारियों ने व्यापारियों से संयम बरतने और जांच में सहयोग करने की अपील की है।
इस घटना ने कस्बे में कानून-व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बाजार जैसे संवेदनशील क्षेत्र में देर रात इस तरह की घटनाएं हों और उन्हें गंभीरता से न लिया जाए, तो अपराधियों के हौसले बढ़ सकते हैं। व्यापारियों का तर्क है कि वे कर चुकाने वाले नागरिक हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
फिलहाल, बाजार में स्थिति सामान्य है, लेकिन भीतर ही भीतर असंतोष बना हुआ है। व्यापारी संगठन आगे की रणनीति पर विचार कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या पुलिस लूट के आरोपों की पुष्टि होने पर मुकदमे में संशोधन करती है या नहीं। यह मामला केवल एक आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस और व्यापारियों के बीच भरोसे की परीक्षा भी बन गया है।



