
लखनऊ अग्निकांड: बाराबिरवा सब्जी मंडी में भीषण आग, सिलिंडर विस्फोट से दहशत; 26 दुकानें जलकर खाक
राजधानी लखनऊ के कृष्णानगर इलाके में गुरुवार रात एक भीषण आग ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। फीनिक्स मॉल के पास स्थित बाराबिरवा सब्जी मंडी में अचानक लगी आग ने कुछ ही समय में विकराल रूप धारण कर लिया। इस हादसे में 26 दुकानें जलकर पूरी तरह राख हो गईं। हालांकि, राहत की बात यह रही कि कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन कई दुकानदारों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा।

घटना रात करीब 10 बजे की है, जब मंडी में स्थित राम गोपाल की फल की दुकान में अचानक शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग गई। शुरुआत में आग छोटी थी, लेकिन कुछ ही मिनटों में यह तेजी से फैलने लगी। मंडी में रखे ज्वलनशील सामान, प्लास्टिक और लकड़ी की संरचनाओं ने आग को और भड़काने का काम किया। देखते ही देखते आग ने आसपास की दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया और लपटें आसमान तक पहुंचने लगीं।
आग लगने की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और अपने स्तर पर आग बुझाने की कोशिश करने लगे। इसी बीच उत्तर प्रदेश फायर सर्विस को सूचना दी गई। कुछ ही देर में दमकल की गाड़ियां घटनास्थल पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया। शुरुआत में तीन गाड़ियां आईं, लेकिन आग की भयावहता को देखते हुए कुल 12 दमकल गाड़ियों को मौके पर बुलाया गया।
राहत कार्य के दौरान एक बड़ा हादसा तब हुआ, जब मंडी में मौजूद सायरा की फास्ट फूड दुकान में रखा गैस सिलिंडर अचानक फट गया। जोरदार धमाके से पूरा इलाका कांप उठा और लोगों में अफरातफरी मच गई। कई लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। आसपास के घरों में रहने वाले लोग भी डर के मारे बाहर निकल आए और सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे।
दमकल कर्मियों को आग बुझाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। घने धुएं के कारण सांस लेना मुश्किल हो रहा था, जिसके चलते उन्हें विशेष सुरक्षा उपकरण पहनने पड़े। आग को पूरी तरह बुझाने के लिए कई दुकानों की टीन की छतों को क्रेन की मदद से तोड़ना पड़ा, ताकि अंदर तक पानी पहुंचाया जा सके। करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद रात लगभग एक बजे आग पर काबू पाया जा सका।
इस हादसे में जिन दुकानों को नुकसान पहुंचा, उनमें फल, सब्जी, कपड़े, किराना और फास्ट फूड की दुकानें शामिल हैं। राम गोपाल की फल की दुकान, देवी शंकर राजपूत और उनके बेटे दुर्गेश की कपड़े की दुकान, सायरा की फास्ट फूड दुकान, शिवम बाजपेयी की दुकान, वीरेंद्र की किराना दुकान समेत कुल 26 दुकानों का सामान पूरी तरह जल गया।
घटना का सबसे भावुक पहलू तब सामने आया, जब दुकानदार देवी शंकर राजपूत अपने बेटे के साथ मौके पर पहुंचे। अपनी जलती हुई दुकान को देखकर वह खुद को रोक नहीं पाए और फफक कर रो पड़े। उनके बेटे दुर्गेश सदमे के कारण बेहोश हो गए। आसपास मौजूद लोगों ने किसी तरह उन्हें संभाला और अस्पताल पहुंचाया।
आग की वजह से पूरे इलाके में दहशत फैल गई। संभल खेड़ा गांव के लोग डर के कारण अपने घरों से बाहर निकल आए। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लोगों को शांत कराया और स्थिति को नियंत्रित किया। साथ ही, सुरक्षा के मद्देनजर कानपुर रोड से फीनिक्स मॉल जाने वाले रास्ते को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया, जिससे इलाके में लंबा जाम लग गया।
घटनास्थल पर एसीपी कृष्णानगर रजनीश वर्मा, सीएफओ अंकुश मित्तल और एफएसओ धर्मपाल सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे और पूरे राहत कार्य की निगरानी की। दमकल विभाग ने चार अलग-अलग टीमों में बंटकर आग को चारों ओर से घेरा और धीरे-धीरे उस पर काबू पाया।
प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है, लेकिन प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मामले की विस्तृत जांच की जाएगी। यह भी देखा जाएगा कि क्या मंडी में फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं।
इस घटना ने बाजारों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ज्यादातर मंडियों में फायर सेफ्टी उपकरणों की कमी होती है, जिससे छोटी सी चिंगारी भी बड़े हादसे का रूप ले लेती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते सुरक्षा उपायों को लागू किया जाए, तो इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है।
फिलहाल, प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहा है और प्रभावित दुकानदारों को सहायता देने की योजना बनाई जा रही है। स्थानीय व्यापारी संगठनों ने सरकार से मुआवजे की मांग की है, ताकि जिन लोगों की रोजी-रोटी छिन गई है, उन्हें फिर से खड़ा होने में मदद मिल सके।
अंत में, यह कहा जा सकता है कि लखनऊ का यह अग्निकांड एक गंभीर चेतावनी है। भीड़भाड़ वाले बाजारों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी खतरनाक हो सकती है, यह इस घटना ने साफ कर दिया है। जरूरत है कि प्रशासन और व्यापारी मिलकर सुरक्षा को प्राथमिकता दें, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके और लोगों की जान-माल की रक्षा हो



