
यूपी में बुलेट ट्रेन का ऐलान: लखनऊ से दिल्ली 2 घंटे, वाराणसी 1 घंटे में; 300 किमी/घंटा की रफ्तार
उत्तर प्रदेश में आधुनिक रेल परिवहन की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। दिल्ली–वाराणसी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा के साथ ही प्रदेश को बुलेट ट्रेन की सौगात मिलने जा रही है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद लखनऊ से दिल्ली का सफर सिर्फ दो घंटे और लखनऊ से वाराणसी महज 60 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। बुलेट ट्रेन की अधिकतम गति 300 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।

तीन घंटे में दिल्ली से वाराणसी
नए हाईस्पीड कॉरिडोर के चालू होते ही यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। दिल्ली से वाराणसी तक की यात्रा तीन घंटे के भीतर संभव हो जाएगी। इससे धार्मिक, शैक्षणिक और व्यावसायिक यात्राओं को जबरदस्त बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
यूपी को दो हाईस्पीड कॉरिडोर का फायदा
केंद्रीय बजट में सात नए हाईस्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की घोषणा की गई है, जिनमें दिल्ली–वाराणसी और वाराणसी–सिलीगुड़ी शामिल हैं। इन दोनों का बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश से होकर गुजरेगा। इससे प्रदेश को देश के हाईस्पीड रेल नेटवर्क में अहम स्थान मिलेगा।
इन शहरों से होकर गुजर सकता है कॉरिडोर
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक यह कॉरिडोर गाजियाबाद, मुरादाबाद, बरेली, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या और गोरखपुर जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ सकता है। हालांकि, अंतिम रूट और स्टॉपेज का फैसला सर्वे के बाद होगा।
समय की बचत, सुविधाओं में इजाफा
300 किमी/घंटा की रफ्तार से चलने वाली बुलेट ट्रेन से यात्रा का समय मौजूदा ट्रेनों की तुलना में काफी कम हो जाएगा। लोग सुबह दिल्ली जाकर शाम तक लखनऊ लौट सकेंगे, जो अभी संभव नहीं है।
किराया विमान जैसा, सुविधा ज्यादा
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि बुलेट ट्रेन का किराया हवाई जहाज के बराबर हो सकता है। लखनऊ से दिल्ली का संभावित किराया करीब 5 हजार रुपये रहने का अनुमान है। हालांकि, हवाई यात्रा में लगने वाले चेक-इन और बोर्डिंग समय की तुलना में बुलेट ट्रेन ज्यादा आरामदायक और समय बचाने वाला विकल्प साबित होगी।
1500 किमी का विशाल प्रोजेक्ट
दिल्ली–वाराणसी (790 किमी) और वाराणसी–सिलीगुड़ी (720 किमी) को जोड़कर करीब 1500 किमी लंबा हाईस्पीड रेल नेटवर्क विकसित किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर ढाई लाख करोड़ रुपये तक खर्च होने का अनुमान है।
प्रदेश के विकास को मिलेगी रफ्तार
बुलेट ट्रेन परियोजना से उत्तर प्रदेश में पर्यटन, व्यापार और निवेश को नई गति मिलेगी। बड़े शहरों के साथ-साथ धार्मिक स्थलों तक तेज़ पहुंच से आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और प्रदेश को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की नई पहचान मिलेगी।



