दिल्ली

यमुना की बदहाली पर कैग का बड़ा खुलासा—पानी, सीवर और शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

राजधानी Delhi में पर्यावरण और बुनियादी ढांचे की स्थिति को लेकर एक अहम रिपोर्ट ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। Comptroller and Auditor General of India (कैग) द्वारा प्रस्तुत इस रिपोर्ट में खासतौर पर Yamuna River की बिगड़ती हालत, जल आपूर्ति की कमी, सीवर सिस्टम की खामियां और शिक्षा क्षेत्र की कमजोरियों को उजागर किया गया है। विधानसभा में इस रिपोर्ट पर चर्चा के बाद सरकार ने सुधार के लिए ठोस कदम उठाने का दावा किया है, लेकिन रिपोर्ट में सामने आए तथ्य चिंता बढ़ाने वाले हैं

रिपोर्ट के अनुसार, यमुना नदी की सबसे बड़ी समस्या बिना ट्रीटमेंट का सीवेज है। दिल्ली में रोजाना बड़ी मात्रा में गंदा पानी सीधे नदी में छोड़ा जा रहा है। अनुमान है कि 200 एमजीडी से अधिक सीवेज बिना साफ किए यमुना में गिर रहा है। यह न केवल नदी के जल को प्रदूषित कर रहा है, बल्कि इसके आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन गया है।

जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने विधानसभा में इस स्थिति को स्वीकार करते हुए कहा कि यह समस्या एक दिन में नहीं बनी, बल्कि वर्षों से चली आ रही व्यवस्थागत कमियों का परिणाम है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार अब इस दिशा में तेजी से काम कर रही है और आने वाले समय में सुधार दिखाई देगा।

दिल्ली में पानी की उपलब्धता भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। शहर को रोजाना लगभग 1200 एमजीडी पानी की जरूरत होती है, लेकिन वर्तमान में केवल 1000 एमजीडी की आपूर्ति ही हो पा रही है। यानी लगभग 200 एमजीडी की कमी लगातार बनी हुई है। इसके अलावा, नॉन-रेवेन्यू वाटर लॉस 45 से 53 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो पानी के वितरण में भारी नुकसान और खराब प्रबंधन को दर्शाता है।

करीब 30 लाख घरों में अभी तक नियमित जल कनेक्शन नहीं होने से समस्या और बढ़ जाती है। इन घरों के लोग निजी टैंकरों या अन्य साधनों पर निर्भर रहते हैं, जिससे उन्हें अधिक खर्च उठाना पड़ता है और पानी की गुणवत्ता भी संदिग्ध रहती है।

सरकार ने यमुना की सफाई और जल व्यवस्था सुधारने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें सबसे अहम है सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता को बढ़ाना। इसके तहत 35 नए और अपग्रेडेड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जाएंगे, जिससे ट्रीटमेंट क्षमता को बढ़ाकर 1500 एमजीडी तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इससे बिना ट्रीटमेंट के सीवेज को यमुना में जाने से रोका जा सकेगा।

नजफगढ़ नाले समेत बड़े नालों के ‘इन-सीटू ट्रीटमेंट’ की योजना भी बनाई गई है। इससे नालों में बहने वाले गंदे पानी को वहीं पर साफ किया जाएगा, जिससे नदी में प्रदूषण कम होगा। सरकार का दावा है कि अगले 2 से 2.5 वर्षों में यह क्षमता जरूरत से अधिक हो जाएगी।

सीवर नेटवर्क का विस्तार भी इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वर्तमान में करीब 20 लाख घर सीवर नेटवर्क से जुड़े नहीं हैं। सरकार ने 1799 अनधिकृत कॉलोनियों तक सीवर लाइन पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। पिछले एक साल में 180 किलोमीटर से अधिक नई लाइन बिछाई गई है और सैकड़ों कॉलोनियों में काम जारी है।

सेप्टिक टैंक सिस्टम में सुधार के लिए दिल्ली जल बोर्ड डिजिटल बुकिंग प्रणाली लागू करने जा रहा है। इसके तहत सरकारी टैंकरों की व्यवस्था की जाएगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और गड़बड़ियों पर रोक लगेगी।

कैग रिपोर्ट में दिल्ली जल बोर्ड की वित्तीय स्थिति पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बोर्ड को करीब 4988 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसके पीछे जल नीति का अभाव, परियोजनाओं में देरी और संसाधनों के सही उपयोग की कमी को जिम्मेदार माना गया है।

विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने इन मुद्दों को गंभीर बताते हुए सभी विभागों को निर्देश दिया है कि वे तय समय के भीतर अपनी कार्रवाई रिपोर्ट (एटीएन) प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि अब जवाबदेही तय की जाएगी और सुधार के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।

रिपोर्ट में शिक्षा क्षेत्र की स्थिति भी चिंताजनक बताई गई है। दिल्ली के कुछ सरकारी विश्वविद्यालयों में छात्रों की संख्या बेहद कम है, जबकि कई संस्थान बुनियादी सुविधाओं के अभाव में काम कर रहे हैं। कुछ विश्वविद्यालयों में तो छात्रों की संख्या उंगलियों पर गिनने लायक है।

शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने स्वीकार किया कि पिछले वर्षों में उच्च शिक्षा प्रणाली में कई खामियां रही हैं। उन्होंने कहा कि कई फैसले बिना ठोस योजना के लिए गए, जिससे आज समस्याएं सामने आ रही हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अब इन कमियों को दूर करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है।

कैग रिपोर्ट में एडमिशन सिस्टम की खामियों का भी जिक्र किया गया है। लंबे समय तक स्पष्ट एडमिशन नीति का अभाव रहा और कई वर्षों तक ऑडिटेड अकाउंट्स भी पेश नहीं किए गए। इसके अलावा, कुछ कोर्स बिना मान्यता के चलाए गए और सिलेबस को समय पर अपडेट नहीं किया गया।

सरकार ने सुधार के लिए कई पहल शुरू की हैं। 2023 से 2025 के बीच हजारों ईडब्ल्यूएस छात्रों को स्कॉलरशिप दी गई है। इसके अलावा, स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए ‘कैंपस टू मार्केट’ जैसी योजनाएं लागू की गई हैं।

विधानसभा में इस रिपोर्ट को लोक लेखा समिति (पीएसी) को भेजने की सिफारिश की गई है, ताकि मामले की गहराई से जांच हो सके और जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा सके।

कुल मिलाकर, कैग रिपोर्ट ने दिल्ली के जल, सीवर और शिक्षा तंत्र की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार द्वारा घोषित सुधारात्मक कदम कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से लागू होते हैं। यदि योजनाओं को सही तरीके से जमीन पर उतारा गया, तो आने वाले समय में स्थिति में सुधार संभव है, अन्यथा समस्याएं और गहराती जाएंगी।

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