
मेरठ में बदली सोच: तलाक के बाद बेटी का जश्न के साथ स्वागत, पिता ने पेश की मिसाल
उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक अनोखी घटना ने समाज की पारंपरिक सोच को चुनौती दी है। आमतौर पर जहां तलाक को दुख, शर्म और असफलता के रूप में देखा जाता है, वहीं यहां एक पिता ने अपनी बेटी के तलाक को उसके नए जीवन की शुरुआत मानते हुए उसे जश्न में बदल दिया। यह नजारा किसी बारात से कम नहीं था—ढोल-नगाड़ों की धुन, नाचते-गाते परिजन और खुशियों से भरा माहौल।

रिटायर्ड जज ज्ञानेंद्र शर्मा ने अपनी इकलौती बेटी प्रणिता शर्मा को फैमिली कोर्ट से तलाक मिलने के बाद पूरे सम्मान के साथ घर वापस लाया। जैसे ही अदालत ने 4 अप्रैल 2026 को तलाक को मंजूरी दी, परिवार के लोग ढोल-नगाड़ों के साथ कोर्ट पहुंचे और वहां से बेटी को लेकर जुलूस की तरह घर पहुंचे। इस दौरान मिठाइयां बांटी गईं और हर कोई इस पल को खुशी के रूप में मना रहा था।
परिवार के सदस्यों ने एक खास संदेश देने के लिए काले रंग की टी-शर्ट पहन रखी थी, जिस पर “I Love My Daughter” लिखा हुआ था। यह सिर्फ एक जश्न नहीं था, बल्कि समाज को यह बताने का तरीका था कि बेटी की खुशी सबसे ऊपर है।
प्रणिता की शादी 14 दिसंबर 2018 को एक आर्मी अधिकारी से हुई थी। शुरुआत में सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन समय के साथ ससुराल में उनका जीवन कठिन होता चला गया। उन्हें मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। एक बच्चे के जन्म के बाद भी हालात में कोई सुधार नहीं हुआ।
काफी समय तक संघर्ष करने के बाद प्रणिता ने यह निर्णय लिया कि वह अब इस रिश्ते में नहीं रह सकतीं। उन्होंने अपने आत्मसम्मान को प्राथमिकता देते हुए तलाक का फैसला लिया। अदालत ने उनके फैसले को सही मानते हुए मंजूरी दे दी।
इस फैसले के बाद उनके पिता ने जिस तरह से उनका स्वागत किया, वह समाज के लिए एक प्रेरणा बन गया। उन्होंने कहा कि बेटी को दुख में छोड़ना या उसे मजबूर करना गलत है। अगर वह खुश नहीं है, तो उसे वापस घर लाना ही सही कदम है।
प्रणिता, जो एक ज्यूडिशियल अकादमी में फाइनेंस डायरेक्टर हैं, ने भी इस मौके पर महिलाओं को संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हर महिला को आत्मनिर्भर बनना चाहिए और किसी भी प्रकार के अत्याचार को सहन नहीं करना चाहिए। शिक्षा और आत्मविश्वास ही जीवन में आगे बढ़ने का रास्ता है।
यह घटना यह साबित करती है कि समाज में बदलाव आ रहा है। अब लोग बेटियों को बोझ नहीं, बल्कि उनके अधिकारों और खुशियों के साथ देखने लगे हैं।



