
मुंबई एयरपोर्ट पर ‘गोल्ड रैकेट’ का बड़ा पर्दाफाश: 24 महिलाओं के जरिए हो रही थी करोड़ों की तस्करी, DRI की सटीक कार्रवाई
मुंबई से सामने आई एक बड़ी कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि तस्करी के नेटवर्क कितने संगठित और चालाक हो चुके हैं। राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने एक बड़े सोना तस्करी गिरोह का खुलासा करते हुए 24 महिलाओं को गिरफ्तार किया है। इन महिलाओं के पास से लगभग 29.37 किलोग्राम सोना बरामद किया गया, जिसकी कीमत करीब 37.74 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह पूरी कार्रवाई छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर की गई, जहां सुरक्षा एजेंसियों ने बेहद योजनाबद्ध तरीके से ऑपरेशन को अंजाम दिया।

बताया जा रहा है कि यह ऑपरेशन ‘धाहाबू ब्लिट्ज’ नाम से चलाया गया, जो कि पूरी तरह से खुफिया जानकारी पर आधारित था। ‘धाहाबू’ शब्द का अर्थ स्वाहिली भाषा में ‘सोना’ होता है, और इस ऑपरेशन का उद्देश्य भी सोना तस्करी के इस बड़े नेटवर्क को खत्म करना था। जैसे ही एजेंसियों को इस गिरोह की गतिविधियों के बारे में जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत निगरानी बढ़ा दी और संदिग्ध यात्रियों की पहचान शुरू कर दी।
जांच के दौरान यह सामने आया कि इस गिरोह ने महिलाओं को ‘कैरियर’ के रूप में इस्तेमाल किया। इन महिलाओं को खास ट्रेनिंग दी गई थी ताकि वे सोने को इस तरह छिपा सकें कि एयरपोर्ट की सख्त सुरक्षा जांच के दौरान भी वह आसानी से पकड़ में न आए। कुछ मामलों में सोने को कपड़ों के अंदर, तो कुछ में बैग और अन्य सामान के भीतर बेहद चतुराई से छिपाया गया था। इससे यह साफ है कि गिरोह के पास तस्करी के लिए एक सुव्यवस्थित योजना थी।
सूत्रों के अनुसार, इन महिलाओं को विदेशों से सोना लाने के लिए तैयार किया गया था और इसके बदले उन्हें अच्छी खासी रकम देने का वादा किया गया था। कई महिलाएं आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से जुड़ी हुई हैं, जिन्हें इस अवैध काम में शामिल होने के लिए लालच दिया गया। तस्कर अक्सर ऐसे ही लोगों को चुनते हैं, जिन्हें पैसों की जरूरत होती है और जो जोखिम उठाने के लिए मजबूर हो जाते हैं।
DRI की टीम ने इस पूरे ऑपरेशन को बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दिया। अधिकारियों ने पहले से ही उन यात्रियों की सूची तैयार कर ली थी, जिन पर शक था। जैसे ही ये महिलाएं एयरपोर्ट पर पहुंचीं, उन्हें रोककर गहन जांच की गई। तलाशी के दौरान जब सोना बरामद हुआ, तो सभी हैरान रह गए, क्योंकि इतनी बड़ी मात्रा में तस्करी का यह मामला हाल के समय में बहुत कम देखने को मिला है।
अधिकारियों का मानना है कि यह केवल तस्करी की एक कड़ी है और इसके पीछे एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। गिरफ्तार की गई महिलाएं केवल ‘फ्रंटलाइन कैरियर’ हैं, जबकि असली सरगना अभी भी कानून की पकड़ से दूर हैं। यही कारण है कि अब जांच एजेंसियां इस मामले को और गहराई से खंगाल रही हैं, ताकि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।
इस घटना ने यह भी उजागर किया है कि तस्कर अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर नए और जटिल तरीके अपना रहे हैं। पहले जहां सामान में सोना छिपाकर तस्करी की जाती थी, वहीं अब इंसानों को ही ‘माध्यम’ बनाकर इस काम को अंजाम दिया जा रहा है। इससे सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में सोने की लगातार बढ़ती मांग और उस पर लगने वाले भारी आयात शुल्क के कारण तस्करी को बढ़ावा मिलता है। सोना भारतीय संस्कृति और निवेश दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, जिससे इसकी मांग हमेशा बनी रहती है। तस्कर इसी मांग का फायदा उठाकर अवैध तरीके से सोना लाते हैं और बाजार में ऊंचे दामों पर बेचते हैं।
मुंबई जैसे बड़े शहर, जहां अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संख्या अधिक होती है, तस्करों के लिए प्रमुख केंद्र बन जाते हैं। यहां रोजाना हजारों यात्रियों की आवाजाही होती है, जिससे भीड़ का फायदा उठाकर तस्करी करना आसान हो जाता है। हालांकि, इस मामले में DRI की सतर्कता ने यह साबित कर दिया कि सुरक्षा एजेंसियां भी पूरी तरह मुस्तैद हैं।
गिरफ्तार की गई महिलाओं को जल्द ही अदालत में पेश किया जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही एजेंसियां इस बात का भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क के पीछे कौन लोग हैं और उनका अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन कितना बड़ा है।
इस घटना के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि एयरपोर्ट पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। नई तकनीकों का इस्तेमाल, स्कैनिंग सिस्टम को अपग्रेड करना और यात्रियों की प्रोफाइलिंग को और सख्त बनाना जैसे कदम उठाए जा सकते हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
अंत में, मुंबई एयरपोर्ट पर हुई यह कार्रवाई न केवल एक बड़ी सफलता है, बल्कि यह तस्करों के लिए एक कड़ा संदेश भी है कि कानून की पकड़ से बचना अब आसान नहीं है। ‘ऑपरेशन धाहाबू ब्लिट्ज’ ने यह साबित कर दिया है कि अगर एजेंसियां सतर्क और सक्रिय रहें, तो किसी भी बड़े अपराध नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सकता है। आने वाले समय में इस मामले से जुड़े और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं, जो इस पूरे रैकेट की असल तस्वीर सामने लाएंगे।
