
मामूली विवाद बना मौत की वजह, टैक्सी ड्राइवर को उम्रकैद की सजा
हरियाणा के गुरुग्राम में सामने आए एक दिल दहला देने वाले हत्या मामले में अदालत ने सख्त फैसला सुनाते हुए आरोपी टैक्सी ड्राइवर को उम्रकैद की सजा दी है। यह मामला एक मामूली कहासुनी से शुरू होकर हत्या जैसे गंभीर अपराध तक पहुंच गया, जिसने एक परिवार की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एवं सेशन जज की अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए न सिर्फ कठोर कारावास की सजा सुनाई, बल्कि 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

घटना 11 अप्रैल 2022 की है, जब पुलिस को निर्माणाधीन द्वारका एक्सप्रेसवे के पास एक युवक का खून से लथपथ शव मिला। शव की स्थिति देखकर साफ था कि उसकी बेरहमी से पिटाई की गई थी। शरीर पर कई गंभीर चोटों के निशान थे, जिससे यह अनुमान लगाया गया कि युवक को जानबूझकर मारपीट कर मौत के घाट उतारा गया है।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। साथ ही बजघेड़ा थाने में हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष टीम गठित की, जिसने अलग-अलग पहलुओं पर काम करते हुए जांच को आगे बढ़ाया।
जांच के दौरान मृतक की पहचान महेंद्रगढ़ निवासी सुनील कुमार के रूप में हुई। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और स्थानीय जानकारी के आधार पर आरोपियों की तलाश तेज कर दी। करीब दस दिन की मेहनत के बाद पुलिस ने 21 अप्रैल 2022 को दो संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान जतिन और उमेश चंद के रूप में हुई, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ और हाथरस के रहने वाले हैं। दोनों गुरुग्राम के भीमगढ़ खेड़ी क्षेत्र में रहकर किराए पर टैक्सी चलाते थे। पुलिस पूछताछ में उन्होंने जो खुलासा किया, वह चौंकाने वाला था।
आरोपियों ने बताया कि सुनील उनसे रेलवे स्टेशन पर मिला था और उसने उनकी टैक्सी बुक की थी। सफर के दौरान किसी बात को लेकर उनके बीच कहासुनी हो गई। यह विवाद धीरे-धीरे इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने गुस्से में आकर सुनील के साथ मारपीट शुरू कर दी।
मारपीट इतनी ज्यादा थी कि सुनील गंभीर रूप से घायल हो गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। इसके बाद आरोपी घबरा गए और उन्होंने शव को द्वारका एक्सप्रेसवे के पास फेंक दिया और मौके से फरार हो गए।
पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की। अदालत में अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्य पेश किए, जिससे यह साबित हो गया कि हत्या इन्हीं दोनों ने की थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात को गंभीरता से लिया कि एक मामूली विवाद के चलते किसी की जान ले ली गई। अदालत ने कहा कि इस तरह के अपराध समाज में असुरक्षा का माहौल पैदा करते हैं और इन्हें सख्ती से रोकना जरूरी है।
अंत में अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 34 के तहत दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
इस फैसले के बाद मृतक के परिवार को कुछ हद तक न्याय मिला है। यह घटना समाज को यह सीख देती है कि गुस्से में लिया गया एक गलत फैसला जिंदगी भर का पछतावा बन सकता है।

