
मदद की गुहार बनी सजा: 112 पर कॉल करने वाले युवक को पुलिस ने ही पीटा
आगरा जिले के पिनाहट क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां घरेलू विवाद के दौरान मदद के लिए पुलिस को बुलाना एक युवक को भारी पड़ गया। आरोप है कि पुलिस ने सहायता करने के बजाय शिकायतकर्ता को ही उठाकर बेरहमी से पीटा और उसे मरणासन्न हालत में एक सुनसान मैदान में छोड़ दिया।

घटना पिनाहट थाना क्षेत्र के गांव देवगढ़ की है। जानकारी के मुताबिक, गांव निवासी पंकज का अपने साले भोले के साथ पुराने लेन-देन को लेकर विवाद चल रहा था। बताया जाता है कि कुछ वर्ष पहले पंकज ने भोले को ट्रैक्टर खरीदने में मदद की थी, लेकिन भोले ने उसका बीमा नहीं कराया। इसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी बढ़ गई और मामला तनावपूर्ण हो गया।
विवाद बढ़ने पर पंकज ने 13 अप्रैल की दोपहर करीब दो बजे आपातकालीन सेवा 112 पर कॉल कर पुलिस से मदद मांगी। उसे उम्मीद थी कि पुलिस आकर विवाद को शांत कराएगी, लेकिन हालात बिल्कुल उलट हो गए। आरोप है कि पुलिसकर्मी बार-बार कॉल आने से नाराज हो गए और मौके पर पहुंचते ही पंकज को अपने साथ जबरन गाड़ी में बैठा लिया।
परिजनों के अनुसार, पुलिस उसे घर से करीब दो किलोमीटर दूर ‘बीच का पुरा’ गांव के पास एक खाली मैदान में ले गई। वहां पहुंचकर दारोगा और अन्य पुलिसकर्मियों ने पंकज के साथ अमानवीय व्यवहार किया। आरोप है कि उसे बुरी तरह लाठियों और डंडों से पीटा गया। पिटाई इतनी निर्दयी थी कि वह गंभीर रूप से घायल होकर बेहोश हो गया। उसके शरीर पर कई जगह गहरे नीले निशान पड़ गए।
सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि पुलिसकर्मी उसे उसी हालत में मैदान में छोड़कर चले गए। तेज धूप में कई घंटों तक पंकज वहीं पड़ा रहा। शाम करीब चार बजे जब आसपास के बच्चे खेलने के लिए मैदान में पहुंचे, तब उन्होंने उसे बेहोशी की हालत में देखा और तुरंत गांव जाकर उसके परिवार को सूचना दी।
सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और आनन-फानन में पंकज को पास के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। पिछले करीब दो सप्ताह से पंकज वहीं भर्ती है और उसका इलाज जारी है।
परिजनों का कहना है कि शारीरिक चोटों के साथ-साथ पंकज मानसिक रूप से भी गहरे सदमे में है। जब भी उसे होश आता है, वह डर के मारे चीखने लगता है और कहता है, “साहब अब मत मारो, मैं मर जाऊंगा।” उसकी यह हालत साफ दर्शाती है कि उसने किस तरह की यातना झेली है। उसके पैरों और पीठ पर अब भी चोट के गहरे निशान मौजूद हैं, जो पुलिस की कथित बर्बरता की गवाही दे रहे हैं।
यह मामला घटना के लगभग 14 दिन बाद उस समय उजागर हुआ, जब परिजनों ने घायल पंकज की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं। तस्वीरें वायरल होते ही लोगों में आक्रोश फैल गया और पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे। इसके बाद मामला प्रशासन के संज्ञान में आया और जांच की मांग तेज हो गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर पुलिस पर ही इस तरह के आरोप लगने लगें, तो आम जनता किससे मदद की उम्मीद करे। लोगों में डर और असंतोष का माहौल है। वे इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
इसी बीच पिनाहट क्षेत्र से जुड़ा एक और मामला भी चर्चा में है, जिसमें एक दारोगा पर घर में घुसकर मारपीट करने का आरोप लगा है। जानकारी के अनुसार, दारोगा केपी सिंह एक महिला द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमे में नोटिस तामील कराने के लिए गए थे। आरोप है कि इस दौरान उन्होंने घर में घुसकर लोगों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की। इस मामले में उच्च अधिकारियों ने संज्ञान लेते हुए दारोगा को निलंबित कर दिया है।
दोनों घटनाओं ने एक साथ सामने आकर पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर पुलिस को जनता की सुरक्षा और सहायता के लिए जिम्मेदार माना जाता है, वहीं इस तरह की घटनाएं भरोसे को कमजोर करती हैं।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या पीड़ित को न्याय मिल पाता है या नहीं। फिलहाल पंकज अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है और उसका परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है।



