
बेटी की गवाही बनी सबूत, नौसेना कर्मी हत्याकांड में पत्नी को उम्रकैद
गोवा में भारतीय नौसेना के एक कर्मी की हत्या के मामले में मडगांव स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पत्नी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी महिला पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इस मामले में सबसे अहम सबूत उसकी आठ वर्षीय बेटी की गवाही और मोबाइल फोन में मिला वीडियो बना, जिसने पूरी घटना की सच्चाई अदालत के सामने रख दी।

यह घटना वर्ष 2019 की है, जब उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के नवादा गांव निवासी कौशलेंद्र प्रताप सिंह गोवा में भारतीय नौसेना में तैनात थे। उनकी पोस्टिंग गोवा के डाबोलिम एयरपोर्ट के पास स्थित आईएनएस हंसा में थी। कौशलेंद्र अपनी पत्नी संध्या और आठ साल की बेटी के साथ वहीं रहते थे। परिवार बाहर से देखने में सामान्य दिखाई देता था, लेकिन पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता रहता था।
बताया गया कि कौशलेंद्र की शादी वर्ष 2009 में फर्रुखाबाद जिले के जहानगंज क्षेत्र के बहोरीकपुर गांव की रहने वाली संध्या से हुई थी। शादी के बाद कुछ साल तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन धीरे-धीरे दोनों के बीच मनमुटाव बढ़ने लगा। बताया जाता है कि संध्या के मोबाइल फोन पर ज्यादा समय बिताने और लगातार बातचीत करने को लेकर दोनों के बीच कई बार झगड़े होते थे। इसी बात को लेकर घर में तनाव बना रहता था।
एक जून 2019 की रात भी इसी बात को लेकर दोनों के बीच तीखी बहस हुई। देर रात तक चले विवाद के बाद कौशलेंद्र सोने के लिए अपने कमरे में चले गए। लेकिन गुस्से में भरी संध्या ने उस समय एक खौफनाक फैसला ले लिया। आरोप है कि जब कौशलेंद्र गहरी नींद में थे, तभी संध्या ने डंडे से उनके सिर पर कई वार कर दिए। अचानक हुए हमले से कौशलेंद्र को संभलने का मौका भी नहीं मिला और कुछ ही देर में उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद भी संध्या का व्यवहार सामान्य नहीं था। बताया गया कि उसने इस पूरी घटना का वीडियो अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया। हत्या के करीब दो घंटे बाद उसने कौशलेंद्र के साथियों को फोन कर घटना की जानकारी दी। जब आसपास के लोग और साथी मौके पर पहुंचे तो कौशलेंद्र खून से लथपथ हालत में बिस्तर पर पड़े मिले।
इस दौरान घर में मौजूद उनकी आठ साल की बेटी भी इस घटना की गवाह बन गई। रात में शोरगुल सुनकर वह नींद से जाग गई थी। उसने देखा कि उसके पिता खून से लथपथ बिस्तर पर पड़े हुए हैं। उस समय वह घटना को पूरी तरह समझ नहीं पाई, लेकिन जो कुछ उसने देखा था वही बाद में अदालत में अहम गवाही बन गया।
घटना की सूचना मिलने के बाद गोवा पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। शुरुआती पूछताछ में संध्या के बयान और घटनास्थल की परिस्थितियों में कई विरोधाभास सामने आए। इसके बाद पुलिस ने गहराई से जांच की और संध्या को हिरासत में लेकर पूछताछ की। जांच के दौरान मोबाइल फोन में मिला वीडियो और अन्य साक्ष्य पुलिस के हाथ लगे, जिसने पूरे मामले को स्पष्ट कर दिया।
पुलिस ने सभी सबूतों और गवाहों के आधार पर संध्या को गिरफ्तार कर लिया। विस्तृत जांच के बाद विवेचक ने उसके खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। इस मामले की सुनवाई गोवा के मडगांव स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय में चली। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई महत्वपूर्ण साक्ष्य पेश किए, जिनमें मोबाइल वीडियो और बेटी की गवाही प्रमुख रही।
अदालत में बेटी की गवाही ने इस मामले को निर्णायक मोड़ दे दिया। उस समय वह केवल आठ साल की थी, लेकिन उसने जो कुछ देखा था, उसे अदालत में साफ-साफ बताया। अदालत ने उसकी गवाही को विश्वसनीय माना। इसके अलावा मोबाइल में रिकॉर्ड किया गया वीडियो भी मजबूत सबूत साबित हुआ।
लगभग छह साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद 10 मार्च को अदालत ने अपना फैसला सुनाया। न्यायालय ने संध्या को अपने पति की हत्या का दोषी पाया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। अदालत के इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद पूरी हुई।
कौशलेंद्र प्रताप सिंह के भाई रवींद्र प्रताप सिंह, जो पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, ने कहा कि उन्हें शुरू से ही न्यायपालिका पर भरोसा था। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक चले इस मामले में आखिरकार न्याय मिला है। उन्होंने बताया कि कौशलेंद्र की बेटी अब 15 साल की हो चुकी है और वह उनके साथ रहती है।
रवींद्र प्रताप सिंह ने कहा कि घटना के समय उनकी भतीजी बहुत छोटी थी, लेकिन उसने जो कुछ देखा था वही अदालत में सच के रूप में सामने आया। उसी की गवाही इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण साबित हुई। परिवार को इस बात का दुख है कि उन्होंने अपने बेटे और भाई को खो दिया, लेकिन अदालत के फैसले से उन्हें संतोष मिला है।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि इसमें एक छोटी बच्ची की गवाही और मोबाइल वीडियो जैसे सबूतों ने न्याय की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाई। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी अपराध में तकनीकी साक्ष्य और प्रत्यक्षदर्शी गवाही दोनों का महत्व होता है।
इस फैसले के साथ ही करीब छह साल पहले हुए इस सनसनीखेज हत्याकांड का कानूनी अध्याय समाप्त हो गया। हालांकि इस घटना ने एक परिवार को हमेशा के लिए बिखेर दिया, लेकिन अदालत के फैसले ने यह संदेश जरूर दिया कि अपराध कितना भी पुराना क्यों न हो, कानून के सामने सच एक दिन जरूर सामने आता है।



