
फरीदाबाद से पकड़ा गया जासूसी नेटवर्क का सदस्य, पंचर की दुकान की आड़ में चला रहा था खेल
हरियाणा के फरीदाबाद से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले एक बड़े नेटवर्क का सदस्य पकड़ा गया है। आरोपी नौशाद अली उर्फ लालू को गाजियाबाद पुलिस ने एक पेट्रोल पंप से गिरफ्तार किया। हैरानी की बात यह है कि वह पिछले कुछ महीनों से पंचर बनाने की दुकान चलाकर आम आदमी की तरह जिंदगी जी रहा था, जबकि अंदर ही अंदर देश की सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी दुश्मन देश तक पहुंचा रहा था।

पुलिस के अनुसार, नौशाद अली का संबंध एक बड़े जासूसी गिरोह से है, जिसका सरगना मेरठ का रहने वाला सुहेल मलिक बताया जा रहा है। इस पूरे नेटवर्क में अब तक 22 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि कुछ अन्य संदिग्धों से पूछताछ जारी है। इस गिरोह के सदस्य देश के विभिन्न हिस्सों से अहम स्थानों की तस्वीरें और वीडियो जुटाकर पाकिस्तान भेजते थे।
जानकारी के मुताबिक, नौशाद अली बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के हरचंदा गांव का रहने वाला है। करीब तीन महीने पहले ही उसने फरीदाबाद के गांव नचौली स्थित एक पेट्रोल पंप पर पंचर बनाने की दुकान शुरू की थी। इस दुकान के जरिए वह स्थानीय लोगों के बीच घुल-मिल गया था, जिससे किसी को उस पर शक नहीं हुआ।
पुलिस ने बताया कि 16 मार्च की शाम गाजियाबाद पुलिस सादे कपड़ों में नौशाद की तलाश में फरीदाबाद पहुंची थी। पुलिसकर्मियों ने पहले पेट्रोल पंप पर काम कर रहे अन्य कर्मचारियों से पूछताछ की और उनके नाम व पते की जानकारी ली। इस दौरान नौशाद पास में ही खड़ा था, लेकिन उसने खुद को सामान्य दिखाने की कोशिश की। हालांकि, जब पुलिस ने कर्मचारियों से खासतौर पर नौशाद अली के बारे में पूछा, तो उसकी पहचान सामने आ गई और उसे तुरंत हिरासत में ले लिया गया।
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने नौशाद का मोबाइल फोन भी कब्जे में ले लिया, जिसमें कई अहम सुराग मिलने की उम्मीद है। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह रेलवे स्टेशनों और सुरक्षा बलों से जुड़े स्थानों की फोटो और वीडियो बनाकर व्हाट्सएप के जरिए पाकिस्तान भेजता था। इसके बदले उन्हें हर फोटो के लिए 4 से 6 हजार रुपये तक मिलते थे।
इस मामले में पुलिस ने एक अन्य आरोपी मीरा को भी गिरफ्तार किया है, जो मथुरा जिले की रहने वाली है। इसके अलावा एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया गया है। तीनों आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उन्हें इस नेटवर्क में शामिल करने वाला सुहेल मलिक ही था, जिसने एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर सभी को आपस में जोड़ा था।
जांच एजेंसियों को यह भी पता चला है कि इस गिरोह की योजना देशभर में करीब 50 सोलर कैमरे लगाने की थी, जिनके जरिए संवेदनशील स्थानों की लाइव निगरानी की जा सके। दिल्ली और हरियाणा के कुछ रेलवे स्टेशनों पर ऐसे कैमरे लगाए भी जा चुके थे। खास बात यह है कि इन कैमरों का सीधा एक्सेस पाकिस्तान में मौजूद लोगों के पास था, जिससे वे भारत के अहम स्थानों की गतिविधियों को लाइव देख सकते थे।
पुलिस ने दिल्ली कैंट और सोनीपत रेलवे स्टेशन के पास लगाए गए कैमरों को बरामद कर लिया है और उन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह के सदस्य अब तक 450 से ज्यादा फोटो और वीडियो पाकिस्तान भेज चुके हैं।
पेट्रोल पंप के कर्मचारियों ने बताया कि नौशाद की दुकान वहां के पूर्व मैनेजर रविंद्र की मदद से खुलवाई गई थी। रविंद्र ने पहले मुमताज नामक व्यक्ति से संपर्क किया, जो पहले से ही पंचर का काम करता था। मुमताज ने ही नौशाद को कोलकाता से बुलाकर फरीदाबाद में दुकान दिलवाई। इस पूरे नेटवर्क में कई लोग आपस में जुड़े हुए थे, जो अलग-अलग भूमिकाएं निभा रहे थे।
जब पुलिस ने रविवार को दोबारा पेट्रोल पंप पहुंचकर कर्मचारियों को मामले की सच्चाई बताई, तो सभी हैरान रह गए। उन्हें पहले लगा था कि नौशाद को किसी छोटे-मोटे अपराध में पकड़ा गया है, लेकिन जब देशद्रोह जैसे गंभीर आरोपों की जानकारी मिली, तो सभी के होश उड़ गए।
इससे पहले 14 मार्च को गाजियाबाद के कौशांबी थाना क्षेत्र से 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें सुहेल मलिक उर्फ रोमियो सहित कई अन्य आरोपी शामिल हैं। इनकी निशानदेही पर पुलिस ने अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ जारी है।
पुलिस और खुफिया एजेंसियां इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से ले रही हैं। यूपी पुलिस, एटीएस, दिल्ली पुलिस और हरियाणा पुलिस सभी मिलकर इस नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह के और भी सदस्य सामने आ सकते हैं और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
यह मामला न केवल सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती है, बल्कि आम लोगों के लिए भी एक चेतावनी है कि देशविरोधी गतिविधियां कभी भी और कहीं भी छिपी हो सकती हैं। एक साधारण सी दिखने वाली पंचर की दुकान के पीछे इतना बड़ा जासूसी नेटवर्क चल रहा था, यह सोचकर ही लोग हैरान हैं।
फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने में जुटी हुई है और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। आने वाले समय में इस मामले से जुड़े और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

