
फतेहपुर में नर्स से दबाव, धमकी और ब्लैकमेल: धर्मांतरण से इंकार पर आरोपी गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में एक नर्स के साथ कथित उत्पीड़न, धमकी और ब्लैकमेल का गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी युवक को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। मामले ने स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा और कार्यस्थल पर महिलाओं के सम्मान को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना जिले के एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात नर्स से जुड़ी है। पीड़िता का आरोप है कि जहानाबाद थाना क्षेत्र के गढ़ी मोहल्ले का रहने वाला युवक पिछले करीब एक वर्ष से उसे लगातार परेशान कर रहा था। वह उस पर शादी करने और धर्म परिवर्तन करने का दबाव बनाता था। जब नर्स ने इनकार किया, तो उसने कथित तौर पर उसकी फोटो से छेड़छाड़ कर उन्हें अश्लील रूप देने और सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी।
नर्स के अनुसार आरोपी कई बार अस्पताल परिसर तक पहुंच गया और वहां हंगामा किया। उसने कार्यस्थल पर अभद्र व्यवहार करते हुए सरकारी कामकाज में भी बाधा डालने की कोशिश की। इस दौरान उसने नर्स को खुलेआम अपमानित करने और बदनाम करने की धमकी दी, जिससे वह मानसिक रूप से काफी तनाव में आ गई।
पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपी लगातार फोन कर उसे परेशान करता था। यदि वह फोन नहीं उठाती, तो वह उसके सहकर्मियों को कॉल कर गाली-गलौज करता और दबाव बनाता। आरोप है कि युवक ने धमकी देकर उससे करीब चार लाख रुपये भी वसूल लिए। वह समय-समय पर पैसे मांगता और मना करने पर फोटो वायरल करने की धमकी देता था।
इस लगातार डर और दबाव के कारण नर्स पिछले एक साल से दहशत में जी रही थी। उसने बताया कि वह कार्यस्थल आने-जाने के लिए अपनी बीमार मां को साथ लेकर चलती है, क्योंकि उसे अकेले निकलने में भय लगता है। नर्स का कहना है कि आरोपी कई बार रास्ते में उसका पीछा करता और रोककर परेशान करता था।
मामला तब गंभीर हुआ जब आरोपी अस्पताल पहुंचकर फिर से हंगामा करने लगा। इसके बाद पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है, जिनमें धमकी, ब्लैकमेल, जबरन वसूली, छेड़छाड़ और सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसी धाराएं शामिल हैं। आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और यदि आगे कोई और तथ्य सामने आते हैं, तो अतिरिक्त धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं। साथ ही पीड़िता को सुरक्षा का आश्वासन दिया गया है और जरूरत पड़ने पर पुलिस सहायता उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
यह घटना कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती है। स्वास्थ्य सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों, विशेषकर महिला कर्मियों, को अक्सर दबाव और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में समय पर पुलिस कार्रवाई पीड़ितों के लिए राहत का काम करती है, लेकिन यह भी जरूरी है कि समाज में जागरूकता बढ़े और महिलाओं के सम्मान व स्वतंत्रता को लेकर सख्त दृष्टिकोण अपनाया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ फोटो और वीडियो से छेड़छाड़ कर ब्लैकमेल करने की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। ऐसे अपराधों से निपटने के लिए सख्त कानूनों के साथ-साथ लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करना भी आवश्यक है।
फिलहाल, पुलिस की कार्रवाई से पीड़िता को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत और सामाजिक दोनों स्तरों पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।



