
परीक्षा में किसी और को बैठाकर बना क्लर्क, बायोमेट्रिक जांच में खुला बड़ा घोटाला
गाजीपुर में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने यह साबित कर दिया कि चाहे फर्जीवाड़ा कितना भी चालाकी से किया जाए, तकनीक के सामने ज्यादा दिन तक छिप नहीं सकता। यूको बैंक में कार्यरत एक क्लर्क की सच्चाई तब सामने आई, जब उसकी पहचान की पुष्टि के लिए बायोमेट्रिक जांच की गई।

यह कर्मचारी पिछले करीब दो वर्षों से बैंक में नौकरी कर रहा था और पूरी तरह सामान्य तरीके से अपनी ड्यूटी निभा रहा था। उसे वेतन, भत्ते और अन्य सभी सुविधाएं मिल रही थीं। लेकिन अचानक हुई जांच ने उसकी असलियत उजागर कर दी।
दरअसल, बैंक को कुछ समय पहले यह सूचना मिली थी कि कोविड काल के दौरान हुई भर्तियों में गड़बड़ी की आशंका है। कुछ लोगों ने फर्जी दस्तावेजों और दूसरे व्यक्तियों से परीक्षा दिलवाकर नौकरी हासिल की हो सकती है।
इस सूचना के बाद आईबीपीएस ने उन सभी उम्मीदवारों की दोबारा जांच शुरू की, जिनका चयन उस अवधि में हुआ था। जांच के लिए कर्मचारियों को बुलाया गया और उनके बायोमेट्रिक डेटा का मिलान किया गया।
इसी दौरान राजेश कुमार नामक कर्मचारी के मामले में बड़ा अंतर सामने आया। भर्ती के समय जो बायोमेट्रिक डेटा दर्ज किया गया था, वह वर्तमान में लिए गए डेटा से बिल्कुल अलग था।
इससे यह स्पष्ट हो गया कि परीक्षा के दौरान कोई दूसरा व्यक्ति उसकी जगह बैठा था और उसी के बायोमेट्रिक के आधार पर चयन प्रक्रिया पूरी की गई थी। यानी नौकरी पाने के लिए पूरी योजना के तहत फर्जीवाड़ा किया गया था।
राजेश कुमार मूल रूप से बिहार के नवादा जिले के नारदीगंज का निवासी है। उसने 2023 में यूको बैंक की पीलीभीत शाखा में अपनी नौकरी शुरू की थी। बाद में उसका ट्रांसफर गाजीपुर कर दिया गया, जहां वह अब तक काम कर रहा था।
गौर करने वाली बात यह है कि इतने लंबे समय तक किसी को उस पर शक नहीं हुआ। वह नियमित रूप से बैंक आता-जाता रहा और अपनी जिम्मेदारियां निभाता रहा।
जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद बैंक ने उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया। उससे पूछा गया कि उसके बायोमेट्रिक डेटा में अंतर क्यों है और वह इसका क्या स्पष्टीकरण देना चाहता है।
लेकिन आरोपी ने इस नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया, जिससे बैंक का शक और गहरा हो गया। इसके बाद बैंक प्रबंधन ने सख्त कार्रवाई करते हुए उसे नौकरी से निकाल दिया।
साथ ही, इस पूरे मामले को गंभीर धोखाधड़ी मानते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। गाजीपुर के सदर कोतवाली में केस दर्ज किया गया है और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि इस फर्जीवाड़े में क्या कोई और व्यक्ति या गिरोह शामिल है। यह भी संभावना जताई जा रही है कि ऐसे कई और मामले सामने आ सकते हैं, जहां उम्मीदवारों ने इसी तरह की चालाकी अपनाई हो।
यह मामला एक बड़ा उदाहरण है कि कैसे तकनीक, खासकर बायोमेट्रिक सिस्टम, धोखाधड़ी को पकड़ने में अहम भूमिका निभा सकता है। साथ ही यह घटना उन लोगों के लिए चेतावनी भी है, जो गलत तरीके से नौकरी हासिल करने की कोशिश करते हैं।



