उत्तर प्रदेश

परदेस की कमाई, युद्ध की मार: सऊदी में मिसाइल हमले ने छीनी सीतापुर के युवक की जिंदगी

ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसकी चपेट में आम लोग भी आ जाते हैं। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के एक युवा की मौत की खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है। यह युवक सऊदी अरब में काम करता था और एक मिसाइल हमले का शिकार हो गया।

महमूदाबाद थाना क्षेत्र के बघाइन गांव निवासी 26 वर्षीय रवि गोपाल अपने परिवार का सहारा था। वह बेहतर रोजगार की तलाश में सऊदी अरब गया था और वहां रियाद शहर की एक प्लास्टिक फैक्टरी में काम कर रहा था। उसके सपने साधारण थे—घर की आर्थिक स्थिति सुधारना, परिवार को खुश रखना और अपने छोटे बेटे के भविष्य को सुरक्षित बनाना। लेकिन एक अचानक हुए हमले ने इन सभी सपनों को चकनाचूर कर दिया।

घटना 18 मार्च की रात की है। रोज की तरह काम खत्म करने के बाद रवि ने अपनी पत्नी रितु को फोन किया। भारतीय समय के अनुसार, रात करीब 8:20 बजे दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई। यह एक सामान्य बातचीत थी, जिसमें परिवार और दिनभर की बातें हो रही थीं। लेकिन किसी को नहीं पता था कि यह बातचीत आखिरी होगी।

करीब 9:53 बजे अचानक फोन कट गया। रितु के अनुसार, फोन कटने से ठीक पहले एक तेज धमाके की आवाज सुनाई दी। इसके बाद मोबाइल बंद हो गया। पहले तो लगा कि नेटवर्क की समस्या होगी, लेकिन जब बार-बार कॉल करने पर भी फोन बंद ही आया, तो चिंता बढ़ने लगी।

पूरी रात परिवार बेचैनी में गुजारता रहा। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आखिर हुआ क्या है। अगले दिन सुबह, रवि के बड़े भाई मनमोहन को उसके एक दोस्त से सूचना मिली कि रियाद में हुए मिसाइल हमले में रवि की मौत हो गई है। यह खबर सुनते ही परिवार पर जैसे बिजली गिर पड़ी।

घर में मातम छा गया। मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल है, पत्नी बेसुध है और चार साल का मासूम बेटा अपने पिता के बारे में पूछता रहता है। यह दृश्य किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर सकता है।

रवि गोपाल अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। उसके पिता रवनीत बुजुर्ग हैं और काम करने में असमर्थ हैं। मां बैजंती गृहिणी हैं। पत्नी रितु और छोटा बेटा पूरी तरह उसी पर निर्भर थे। बड़े भाई मनमोहन लखनऊ में निजी काम करते हैं, लेकिन उनकी आय सीमित है और वे अपने परिवार का ही मुश्किल से पालन-पोषण कर पाते हैं।

रवि ने अपने परिवार की हालत सुधारने के लिए कई कठिन फैसले लिए थे। वह पहले भी सऊदी अरब में काम कर चुका था। वर्ष 2025 में अपनी बहन की शादी के लिए वह भारत लौटा था। शादी के बाद 18 सितंबर 2025 को वह दोबारा सऊदी चला गया, ताकि फिर से काम शुरू कर सके और परिवार को आर्थिक सहारा दे सके।

उसकी शादी 23 सितंबर 2020 को हुई थी। शादी के बाद भी उसने जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ा, बल्कि और ज्यादा मेहनत की। वह हर दिन अपने परिवार से बात करता था और उनके लिए बेहतर भविष्य के सपने देखता था। लेकिन यह सब एक पल में खत्म हो गया।

परिवार की सबसे बड़ी पीड़ा यह है कि अभी तक रवि का शव भारत नहीं लाया जा सका है। परिजन लगातार प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं कि उनके बेटे का पार्थिव शरीर जल्द से जल्द घर लाया जाए, ताकि वे अंतिम संस्कार कर सकें। लेकिन दो दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उन्हें कोई ठोस मदद नहीं मिल पाई है।

परिजनों ने स्थानीय पुलिस को सूचना दी है और डायल 112 पर भी संपर्क किया है। पुलिस ने मामले की जानकारी एकत्र कर ली है, लेकिन परिवार का कहना है कि अब तक कोई अधिकारी उनसे मिलने नहीं आया है। इस वजह से उनकी परेशानी और बढ़ गई है।

यह घटना केवल एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि यह उन हजारों भारतीय मजदूरों की स्थिति को भी उजागर करती है, जो विदेशों में जोखिम भरे हालात में काम करते हैं। बेहतर कमाई और भविष्य की उम्मीद में वे अपने घर-परिवार से दूर रहते हैं, लेकिन ऐसे संघर्षों में उनकी सुरक्षा एक बड़ा सवाल बन जाती है।

सरकार के सामने अब यह चुनौती है कि वह न केवल इस परिवार की मदद करे, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भी कदम उठाए। विदेशों में काम करने वाले भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, उन्हें सही जानकारी देना और संकट के समय तुरंत सहायता पहुंचाना बेहद जरूरी है।

इसके अलावा, इस तरह की घटनाएं हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि युद्ध और संघर्ष का सबसे ज्यादा नुकसान आम इंसान को ही होता है। जो लोग इससे सीधे तौर पर जुड़े नहीं होते, वे भी इसकी चपेट में आ जाते हैं।

अंततः, रवि गोपाल की कहानी एक कड़वी सच्चाई को सामने लाती है—रोजगार की तलाश में विदेश जाने वाले लोगों के पीछे केवल उनका सपना नहीं, बल्कि पूरे परिवार की उम्मीदें होती हैं। एक हादसा उन सभी उम्मीदों को खत्म कर देता है। अब जरूरत है कि समाज और सरकार मिलकर ऐसे परिवारों का सहारा बनें, ताकि वे इस दुखद समय से उबर सकें और भविष्य की ओर फिर से कदम बढ़ा सकें।

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