
निफ्ट के पास गोलियों की गूंज—पंचकूला में पुलिस मुठभेड़, हथियार डील की साजिश फेल, दो आरोपी घायल
पंचकूला: शहर के सेक्टर-23 इलाके में स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट) के पास उस समय हड़कंप मच गया, जब पुलिस और संदिग्ध बदमाशों के बीच अचानक मुठभेड़ हो गई। दिन के समय हुई इस घटना ने न केवल इलाके के लोगों को दहशत में डाल दिया, बल्कि यह भी उजागर कर दिया कि अपराधी किस तरह शहरों में अवैध गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस की त्वरित कार्रवाई के चलते एक बड़ी साजिश नाकाम हो गई।

सूत्रों के अनुसार, पंचकूला पुलिस को पहले ही गुप्त सूचना मिल चुकी थी कि कैथल से कुछ संदिग्ध युवक पंचकूला पहुंचने वाले हैं। इन युवकों के बारे में आशंका थी कि वे अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त में शामिल हैं और किसी बड़ी वारदात की योजना बना रहे हैं। इस इनपुट को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तुरंत एंटी नारकोटिक्स सेल को सक्रिय कर दिया।
योजना के तहत पुलिस टीम ने सेक्टर-23 के आसपास निगरानी बढ़ा दी, खासतौर पर निफ्ट के आसपास के क्षेत्र में। पुलिस ने संदिग्धों को पकड़ने के लिए पहले से ही जाल बिछा दिया था, ताकि बिना किसी नुकसान के उन्हें गिरफ्तार किया जा सके। कुछ समय बाद जैसे ही संदिग्ध युवक वहां पहुंचे, पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की।
हालांकि, आरोपियों ने खुद को घिरता देख घबराहट में आकर भागने का प्रयास किया। जब पुलिस ने उन्हें रुकने का इशारा किया, तो उन्होंने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। इस अप्रत्याशित हमले से कुछ पल के लिए इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने भी तुरंत जवाबी कार्रवाई की। दोनों तरफ से हुई फायरिंग के दौरान दो आरोपियों के पैर में गोली लग गई, जिससे वे मौके पर ही गिर पड़े। पुलिस ने तुरंत दोनों को काबू में लिया और प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें सेक्टर-6 स्थित सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया।
घायल आरोपियों की पहचान राहुल और मुकेश के रूप में हुई है। डॉक्टरों के मुताबिक, दोनों की हालत फिलहाल स्थिर है और वे खतरे से बाहर हैं। पुलिस की निगरानी में उनका इलाज जारी है। जैसे ही उनकी स्थिति बेहतर होगी, पुलिस उनसे पूछताछ कर इस पूरे मामले की परतें खोलने की कोशिश करेगी।
मुठभेड़ के बाद पुलिस ने घटनास्थल की तलाशी ली, जहां से कुछ अवैध हथियार बरामद किए गए। इन हथियारों की बरामदगी से यह साफ हो गया है कि आरोपी किसी गंभीर आपराधिक गतिविधि को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि वे पंचकूला में हथियारों की डील करने के उद्देश्य से आए थे।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह ऑपरेशन पूरी तरह से पूर्व सूचना के आधार पर किया गया था। एंटी नारकोटिक्स सेल की टीम ने रणनीतिक तरीके से इलाके की घेराबंदी की थी, लेकिन आरोपियों की ओर से की गई फायरिंग के चलते स्थिति अचानक बदल गई। पुलिस को आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी।
इस घटना के बाद पुलिस अब इस गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश में जुट गई है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपी किन लोगों से जुड़े हुए हैं और उनका नेटवर्क किन-किन क्षेत्रों तक फैला हुआ है। पुलिस को शक है कि यह कोई संगठित गिरोह हो सकता है, जो अलग-अलग जिलों में सक्रिय है।
पंचकूला पुलिस ने आसपास के इलाकों में सर्च ऑपरेशन भी शुरू कर दिया है। इसके अलावा, सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और स्थानीय लोगों से पूछताछ की जा रही है, ताकि आरोपियों के बारे में और जानकारी जुटाई जा सके। पुलिस यह भी पता लगाने में लगी है कि आरोपी जिन हथियारों को लेने आए थे, वे कहां से आने वाले थे और उनके पीछे कौन लोग शामिल हैं।
घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया है। पुलिस ने संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त बल तैनात कर दिया है और गश्त बढ़ा दी गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
इस मुठभेड़ ने यह भी दिखाया है कि पुलिस की सतर्कता और समय पर की गई कार्रवाई से बड़े अपराधों को रोका जा सकता है। अगर पुलिस को पहले से सूचना न मिलती और समय रहते कार्रवाई न होती, तो संभव है कि आरोपी किसी बड़ी वारदात को अंजाम दे देते।
फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी है और घायल आरोपियों से पूछताछ के बाद कई अहम खुलासे होने की उम्मीद है। अधिकारियों का कहना है कि इस केस में जुड़े हर पहलू की जांच की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
कुल मिलाकर, पंचकूला की यह घटना कानून-व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती के साथ-साथ पुलिस की सक्रियता का भी प्रमाण है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि इस साजिश के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे और उनका मकसद क्या था।

