
नशे की गिरफ्त में टूटा हौसला, छात्र ने खत्म की जिंदगी
मेरठ। नशे की लत और मानसिक तनाव ने एक और युवा की जिंदगी छीन ली। टीपीनगर थाना क्षेत्र के शिवपुरम इलाके में रहने वाले 35 वर्षीय छात्र बिजेंद्र ने किराए के कमरे में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मौके से बरामद सुसाइड नोट में छात्र ने साफ तौर पर अपनी मौत की वजह नशे की आदत को बताया है। इस घटना से न केवल परिवार बल्कि पूरे इलाके में शोक और चिंता का माहौल है।

मूल रूप से मवाना क्षेत्र के गांव सठला निवासी बिजेंद्र बेहतर भविष्य की तलाश में मेरठ आया था। वह यहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था और पिछले करीब दो महीनों से पूरी तरह पढ़ाई में जुटा हुआ था। शिवपुरम में वह प्रदीप नामक व्यक्ति के मकान में किराए पर रह रहा था। आसपास के लोगों के मुताबिक, बिजेंद्र सामान्य तौर पर शांत स्वभाव का था और किसी से ज्यादा मेलजोल नहीं रखता था।
बताया जा रहा है कि गुरुवार को काफी देर तक जब बिजेंद्र के कमरे से कोई आवाज नहीं आई तो मकान मालिक को शक हुआ। कई बार दरवाजा खटखटाने के बावजूद अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने टीपीनगर थाना पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजा खुलवाया तो अंदर का दृश्य बेहद दर्दनाक था। बिजेंद्र पंखे से फंदे के सहारे लटका हुआ था।
पुलिस ने तुरंत शव को नीचे उतारा और कमरे की तलाशी ली। इसी दौरान एक सुसाइड नोट बरामद हुआ, जिसने पूरे मामले की तस्वीर साफ कर दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और फोरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया। फोरेंसिक विशेषज्ञों ने कमरे से जरूरी साक्ष्य एकत्र किए ताकि किसी भी तरह की शंका न रह जाए।
सुसाइड नोट में बिजेंद्र ने अपनी पीड़ा को शब्दों में बयां किया था। उसने लिखा था कि वह नशे का आदी हो चुका है और इस लत ने उसकी जिंदगी पूरी तरह बर्बाद कर दी है। नशे के इंजेक्शन लेने की वजह से वह पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रहा था। उसकी याददाश्त और एकाग्रता कमजोर होती जा रही थी, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी लगभग ठप हो गई थी।
नोट में उसने यह भी जिक्र किया कि नशे के चलते उसकी आर्थिक स्थिति भी खराब हो चुकी थी। उसके पास पैसे नहीं बच रहे थे और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया था। उसने लिखा कि उसने अपनी बहन से मदद मांगी थी, लेकिन अंदर ही अंदर वह खुद को बेहद कमजोर और हारा हुआ महसूस कर रहा था। इसी मानसिक संघर्ष के बीच उसने यह खौफनाक कदम उठा लिया।
छात्र ने सुसाइड नोट में यह बात खास तौर पर लिखी कि उसकी मौत के लिए न तो उसका परिवार जिम्मेदार है और न ही कोई अन्य व्यक्ति। उसने अपने माता-पिता और बहन से माफी मांगते हुए लिखा कि वह इस लड़ाई को आगे नहीं लड़ पा रहा है। नोट पढ़कर यह साफ झलकता है कि बिजेंद्र लंबे समय से मानसिक दबाव, आत्मग्लानि और निराशा से जूझ रहा था।
एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट रूप से आत्महत्या का मामला है। सुसाइड नोट में मृतक ने खुद अपनी मौत की वजह नशे की लत बताई है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। फिलहाल किसी तरह के आपराधिक एंगल के संकेत नहीं मिले हैं।
घटना की सूचना मिलते ही बिजेंद्र के परिजन मेरठ पहुंचे। बेटे की हालत देखकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिजनों ने बताया कि बिजेंद्र पढ़ाई को लेकर काफी गंभीर था और वह हमेशा सरकारी नौकरी पाने का सपना देखा करता था। इसी सपने को पूरा करने के लिए वह घर से दूर मेरठ आया था। हालांकि उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि वह नशे की इतनी गंभीर लत में फंस चुका है।
पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया। इसके बाद परिजन शव को लेकर अपने पैतृक गांव सठला लौट गए, जहां अंतिम संस्कार किया गया। गांव में भी इस घटना को लेकर मातम पसरा हुआ है और हर कोई इस बात से हैरान है कि पढ़ाई कर रहा एक युवक इस कदर टूट सकता है।
यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। नशे की लत आज युवाओं के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। खासकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों पर पहले से ही भविष्य, बेरोजगारी और पारिवारिक अपेक्षाओं का भारी दबाव होता है। ऐसे में यदि वे नशे की ओर मुड़ जाएं तो हालात और भी भयावह हो जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि नशे की लत कोई एक दिन में नहीं लगती, बल्कि यह धीरे-धीरे इंसान को अपनी गिरफ्त में ले लेती है। समय रहते परिवार, दोस्तों और समाज का सहयोग मिल जाए तो ऐसे युवाओं को इस दलदल से निकाला जा सकता है। काउंसलिंग, नशा मुक्ति केंद्र और मानसिक स्वास्थ्य सहायता इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
पुलिस और प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि यदि आसपास कोई व्यक्ति नशे या मानसिक तनाव से जूझ रहा हो तो उसे नजरअंदाज न करें। समय पर मदद और सही मार्गदर्शन किसी की जान बचा सकता है। बिजेंद्र की मौत एक दुखद उदाहरण है, जो यह सोचने पर मजबूर करती है कि नशे की समस्या को हल्के में लेना कितनी बड़ी कीमत वसूल सकता है।



