
‘दिव्या’ बनकर ठगी—ट्रेडिंग के नाम पर लाखों हड़पे, दो आरोपी गिरफ्तार
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक शख्स को “दिव्या” बनकर झांसे में लिया गया और निवेश के नाम पर उससे लाखों रुपये ठग लिए गए। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनसे पूछताछ जारी है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सचिन माथुर निवासी आनंद नगर, हैबोवाल (लुधियाना) और दानिश ठाकुर निवासी न्यू सर्किट हाउस, लुधियाना (पंजाब) के रूप में हुई है। दोनों को पुलिस ने अदालत में पेश किया, जहां से आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।
पुलिस के अनुसार, इस पूरे मामले की शिकायत कुरुक्षेत्र के सेक्टर-4 निवासी अर्पित गुप्ता ने दर्ज कराई थी। अर्पित लाडवा में एक दुकान चलाते हैं। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया कि अप्रैल 2025 में उनके मोबाइल पर व्हाट्सएप के जरिए एक मैसेज आया। शुरुआत में यह एक सामान्य बातचीत की तरह लगा, लेकिन धीरे-धीरे यह एक सुनियोजित साइबर ठगी में बदल गया।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, मैसेज भेजने वाले व्यक्ति ने खुद को “दिव्या” बताया और बातचीत के दौरान एक ट्रेडिंग ऐप के जरिए निवेश करने की सलाह दी। “दिव्या” ने दावा किया कि अगर अर्पित उसके बताए तरीके से पैसे निवेश करेंगे, तो उन्हें हर महीने अच्छा मुनाफा मिलेगा।
पहले चरण में भरोसा जीतने के लिए आरोपी ने अर्पित को एक छोटी राशि निवेश करने के लिए कहा। अर्पित ने 50 हजार रुपये का निवेश किया। कुछ समय बाद यह राशि उन्हें मुनाफे के साथ वापस मिल गई। इस शुरुआती सफलता ने अर्पित का भरोसा पूरी तरह जीत लिया।
इसके बाद आरोपी ने उन्हें और अधिक पैसे निवेश करने के लिए प्रेरित किया। लालच में आकर अर्पित ने धीरे-धीरे करीब 12 लाख 50 हजार रुपये का निवेश कर दिया। लेकिन जब उन्होंने इन पैसों को निकालने की कोशिश की, तो उन्हें कोई राशि वापस नहीं मिली। यहीं से उन्हें धोखाधड़ी का एहसास हुआ।
अर्पित ने तुरंत इस मामले की शिकायत थाना साइबर क्राइम कुरुक्षेत्र में दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। तकनीकी जांच और डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए पुलिस ने आरोपियों की पहचान की और उन्हें गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की।
इस ऑपरेशन को थाना साइबर प्रभारी पीएसआई महेश कुमार के निर्देशन में अंजाम दिया गया। टीम में सहायक उप निरीक्षक नसीब सिंह, अजैब सिंह, सिपाही विकास और एसपीओ जगजीत सिंह शामिल थे। टीम ने सूझबूझ और तकनीकी मदद से आरोपियों तक पहुंच बनाई और उन्हें काबू कर लिया।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी बेहद शातिर तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। पहले वे छोटी रकम पर मुनाफा दिखाकर विश्वास जीतते थे और फिर बड़ी रकम निवेश कराने के बाद संपर्क तोड़ देते थे। इस तरह की ठगी में आमतौर पर नकली पहचान और फर्जी प्रोफाइल का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे पीड़ित व्यक्ति को असली पहचान का पता नहीं चल पाता।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के साइबर अपराधों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। खासकर सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए लोगों को टारगेट किया जाता है। इसलिए आम नागरिकों को सतर्क रहने की जरूरत है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर निवेश न करें और अगर कोई ज्यादा मुनाफे का लालच दे रहा है, तो उससे सावधान रहें। इसके अलावा किसी भी ऐप या वेबसाइट पर पैसे लगाने से पहले उसकी पूरी जांच-पड़ताल जरूर करें।
यह मामला एक बार फिर इस बात की चेतावनी देता है कि साइबर अपराधी अब नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। थोड़े से लालच में आकर बड़ी रकम गंवाने के कई मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में जरूरी है कि लोग जागरूक रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत पुलिस को सूचना दें।
फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं उन्होंने और लोगों को भी इसी तरह ठगी का शिकार तो नहीं बनाया।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि ऑनलाइन निवेश के नाम पर होने वाले फ्रॉड से बचने के लिए सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव

