
दिव्यांश केस में खुलासे
उत्तर प्रदेश के कानपुर में सामने आए दिव्यांश हत्याकांड ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। 11 वर्षीय मासूम के साथ हुई क्रूरता और हत्या की इस घटना ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। मामले में पुलिस ने गुरुकुल संचालक सौरभ मिश्रा और उसकी सहयोगी हर्षिता सोनी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, लेकिन घटना से जुड़े कई चौंकाने वाले पहलू सामने आ रहे हैं, जो लोगों को अंदर तक हिला रहे हैं।

यह घटना कानपुर के महाराजपुर थाना क्षेत्र के गौरिया गांव से जुड़ी है। दिव्यांश नाम का मासूम बच्चा लखनऊ के आलमनगर स्थित एक गुरुकुल में पढ़ाई कर रहा था। वहीं, उसके साथ ऐसी दरिंदगी हुई, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। पुलिस जांच में सामने आया कि बच्चे के शरीर पर 42 से ज्यादा चोटों के निशान थे। उसे निर्वस्त्र कर डंडों से बेरहमी से पीटा गया था। इतना ही नहीं, उसके शरीर पर सिगरेट से जलाने के भी निशान मिले हैं।
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात आरोपी सौरभ मिश्रा का रवैया रहा। जब उसे पुलिस कोर्ट ले जा रही थी, तब उसने कैमरे के सामने बेहद दबंग अंदाज में बयान दिया। उसने कहा कि उसके गुरुकुल में बड़े-बड़े मंत्री और नेता आते हैं और उसे किसी बात का डर नहीं है। उसने यह भी दावा किया कि वह 10 दिन के अंदर जमानत पर बाहर आ जाएगा। आरोपी के इस बयान ने लोगों में गुस्सा और भी बढ़ा दिया है।
सौरभ मिश्रा ने आगे यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो देशभर के गुरुकुल संचालक उसके समर्थन में खड़े हो जाएंगे। उसका यह बयान कानून व्यवस्था और न्याय प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े करता है। लोग यह सोचने पर मजबूर हैं कि आखिर आरोपी को इतना आत्मविश्वास कहां से मिल रहा है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने पूछताछ में बताया कि गुरुकुल में बच्चों को अनुशासन सिखाने के नाम पर मारपीट की जाती थी। हालांकि, उसने यह भी दावा किया कि दिव्यांश को पहले ही गांव से पीटकर भेजा गया था। पुलिस इस बयान की सच्चाई की जांच कर रही है और हर पहलू को ध्यान में रखते हुए मामले की गहराई से पड़ताल कर रही है।
जांच के दौरान पुलिस को कई अहम सबूत भी मिले हैं। आरोपियों के पास से टूटे हुए सीसीटीवी कैमरे और डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर बरामद किए गए हैं। आशंका है कि इन उपकरणों को सबूत मिटाने के लिए तोड़ा गया था। इसके अलावा, हत्या में इस्तेमाल किया गया डंडा भी बरामद किया गया है।
घटना के बाद गुरुकुल में पढ़ने वाले अन्य बच्चे बेहद डरे हुए हैं। वे अपने परिवारों से संपर्क कर रहे हैं और घटना के बारे में जानकारी लेने की कोशिश कर रहे हैं। एक बच्चे ने बताया कि आरोपी ने उसे धमकी दी थी कि अगर उसने किसी को कुछ बताया तो उसकी किडनी निकालकर बेच दी जाएगी। इस तरह की धमकियों ने बच्चों के मन में गहरा डर पैदा कर दिया है।
इस घटना के बाद राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचा। इस प्रतिनिधिमंडल में कई नेता शामिल थे, जिन्होंने परिवार के दुख में शामिल होते हुए उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिया।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल विधायक अमिताभ बाजपेई ने कहा कि यह घटना बेहद दुखद और निंदनीय है। उन्होंने मांग की कि आरोपियों को जल्द से जल्द कड़ी सजा दी जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी इस मामले में पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है।
वहीं, अन्य नेताओं ने राज्य सरकार की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि सरकार का ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है। उन्होंने यह भी मांग की कि आरोपी के गुरुकुल पर सख्त कार्रवाई की जाए और जरूरत पड़े तो उसे ध्वस्त कर दिया जाए।
पूर्व सांसद राजाराम पाल ने कहा कि जिस तरह से मासूम बच्चे को प्रताड़ित कर उसकी हत्या की गई है, वह बेहद अमानवीय है। उन्होंने कहा कि दोषियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए, जो समाज के लिए एक उदाहरण बने।
फिलहाल पुलिस इस मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू की जांच कर रही है। आरोपियों के खिलाफ मजबूत सबूत जुटाने की कोशिश की जा रही है, ताकि उन्हें सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके।
दिव्यांश हत्याकांड ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर समाज और प्रशासन कितने सजग हैं। शिक्षा संस्थानों में बच्चों के साथ होने वाले व्यवहार की निगरानी बेहद जरूरी है, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
यह घटना न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी भी है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि पीड़ित परिवार को कब और कैसे न्याय मिलता है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।



