
ट्रेन यात्रा में सैनिक से चोरी, शिकायत के बाद दर्ज हुई FIR
पानीपत से भिवानी की ओर लौट रहे एक सैनिक के साथ ट्रेन यात्रा के दौरान चोरी की गंभीर घटना सामने आई है। भारतीय सेना में सेवारत जवान का बैग, जरूरी दस्तावेज और मोबाइल फोन अज्ञात चोरों द्वारा पार कर लिया गया। घटना 31 जनवरी की मध्य रात्रि की बताई जा रही है, लेकिन प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए सैनिक को कई दिनों तक पुलिस और प्रशासन के चक्कर लगाने पड़े। अब जाकर मामले में एफआईआर दर्ज की गई है और जांच शुरू हुई है।

पीड़ित सैनिक विक्की, जो मूल रूप से गांव खरक का निवासी है और फिलहाल केंद्रीय विद्यालय भिवानी के नजदीक रह रहा है, ने बताया कि वह 31 जनवरी को पानीपत से भिवानी आने के लिए एकता एक्सप्रेस में सवार हुआ था। ड्यूटी से लौटते समय वह थका हुआ था और ट्रेन में अपनी सीट पर बैठकर सो गया। उसे अंदाजा भी नहीं था कि यह यात्रा उसके लिए परेशानी का कारण बन जाएगी।
विक्की के अनुसार, जब ट्रेन भिवानी स्टेशन पहुंचने के बाद यार्ड में सफाई के लिए खड़ी की गई, तब उसकी नींद खुली। जागने पर उसने देखा कि उसका बैग अपनी जगह पर नहीं था। पहले तो उसे लगा कि शायद उसने बैग कहीं और रख दिया होगा, लेकिन थोड़ी देर खोजबीन के बाद साफ हो गया कि उसका सामान चोरी हो चुका है।
सैनिक ने बताया कि बैग में उसके कपड़ों के साथ-साथ मोबाइल फोन और भारतीय सेना का पहचान पत्र भी रखा हुआ था। सेना का पहचान पत्र खो जाना उसके लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय था, क्योंकि यह दस्तावेज उसकी सेवा से जुड़ी पहचान और सुरक्षा दोनों से संबंधित है। इसके अलावा मोबाइल फोन में भी महत्वपूर्ण संपर्क और निजी जानकारी थी।
घटना के तुरंत बाद विक्की ने भिवानी में रेलवे पुलिस से संपर्क किया और शिकायत दी। लेकिन उसका आरोप है कि प्रारंभिक स्तर पर पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। उसने बताया कि कई दिनों तक वह संबंधित थाने और पुलिस चौकी के चक्कर लगाता रहा, परंतु उसकी शिकायत दर्ज नहीं की गई। इस दौरान उसे बार-बार इंतजार करने या बाद में आने की बात कही गई।
लगातार प्रयासों के बावजूद जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो विक्की ने उच्च अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाने का निर्णय लिया। उसने सीएम विंडो और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में भी शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद ही मामले ने गति पकड़ी और औपचारिक रूप से प्राथमिकी दर्ज की गई।
राजकीय रेलवे पुलिस चौकी के इंचार्ज सुरेंद्र कुमार ने बताया कि सैनिक की ओर से लिखित शिकायत 5 फरवरी को प्राप्त हुई थी। शिकायत में मोबाइल फोन और सेना के आई कार्ड की चोरी का जिक्र किया गया है। पुलिस अधिकारी के अनुसार, अब मामले की जांच की जा रही है और रेलवे स्टेशन व यार्ड क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है।
यह घटना कई सवाल खड़े करती है। एक ओर जहां देश की सीमाओं की रक्षा करने वाला सैनिक अपने ही राज्य में असुरक्षित महसूस कर रहा है, वहीं दूसरी ओर शिकायत दर्ज कराने में देरी ने भी प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। आम नागरिकों का कहना है कि यदि एक सैनिक को अपनी शिकायत दर्ज कराने में इतनी परेशानी झेलनी पड़े, तो आम लोगों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
रेल यात्रा के दौरान चोरी की घटनाएं नई नहीं हैं, लेकिन इस मामले में दस्तावेजों की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा जरूरी हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे स्टेशनों और यार्ड क्षेत्रों में निगरानी व्यवस्था और गश्त को और मजबूत किया जाना चाहिए। रात के समय ट्रेनों में सुरक्षा कर्मियों की उपस्थिति भी बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि यात्रियों का सामान सुरक्षित रह सके।
विक्की ने कहा कि उसे उम्मीद है कि पुलिस जल्द से जल्द चोरों तक पहुंचेगी और उसका सामान बरामद करेगी। सेना का पहचान पत्र दुबारा बनवाने की प्रक्रिया भी समय लेने वाली है, जिससे उसे अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मोबाइल फोन खो जाने से भी उसके निजी और पेशेवर संपर्क प्रभावित हुए हैं।
स्थानीय लोगों ने इस घटना पर चिंता व्यक्त की है और प्रशासन से मांग की है कि रेलवे परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए। उनका कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए, खासकर उन लोगों की जो देश की सेवा में लगे हैं।
फिलहाल पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। सीसीटीवी फुटेज, स्टेशन स्टाफ से पूछताछ और अन्य तकनीकी साधनों के जरिए आरोपियों की तलाश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि दोषियों को जल्द ही पकड़ने का प्रयास किया जाएगा।
यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि यात्रा के दौरान सावधानी बरतना कितना जरूरी है। साथ ही यह भी कि शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई होना उतना ही महत्वपूर्ण है, ताकि पीड़ित को न्याय के लिए भटकना न पड़े। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और कब तक सैनिक को उसका सामान वापस मिल पाता है।

