घरेलू कलह ने छीनी मासूम की जिंदगी: गुरुग्राम में मां ने बेटी की हत्या कर खुद को भी किया घायल
हरियाणा के गुरुग्राम से सामने आई एक हृदयविदारक घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। एक मां ने अपने ही हाथों अपनी दो साल की मासूम बेटी की जान ले ली और इसके बाद खुद की जिंदगी खत्म करने की कोशिश की। यह मामला केवल एक अपराध नहीं, बल्कि पारिवारिक तनाव और मानसिक दबाव के खतरनाक परिणामों को उजागर करता है।

घटना गुरुग्राम के सेक्टर-9 थाना क्षेत्र स्थित सूर्या विहार की है, जहां एक किराए के मकान में रहने वाले परिवार में यह दर्दनाक हादसा हुआ। महिला की पहचान नेहा (30) के रूप में हुई है, जिसने अपनी बेटी अनिका की गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद उसने कैंची से अपनी गर्दन पर वार कर आत्महत्या का प्रयास किया। फिलहाल महिला अस्पताल में भर्ती है और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।
जानकारी के मुताबिक, यह परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के कुम्हार पुरवा गांव का निवासी है। नेहा अपने पति आधार शर्मा और बेटी के साथ गुरुग्राम में रह रही थी। आधार एक निजी कंपनी में नौकरी करता है, जबकि नेहा गृहिणी थी। परिवार जनवरी 2025 में गुरुग्राम शिफ्ट हुआ था और तब से किराए के मकान में रह रहा था।
बताया जा रहा है कि घटना वाले दिन यानी 6 अप्रैल की सुबह पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। हालांकि विवाद का कारण स्पष्ट नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि यह कहासुनी ने एक भयावह मोड़ ले लिया। झगड़े के बाद पति अपनी ड्यूटी पर चला गया और घर में नेहा और उसकी बेटी ही मौजूद थीं।
दिनभर सब सामान्य दिखाई देता रहा, लेकिन शाम को जब आधार ने अपनी पत्नी को फोन किया और बेटी से बात कराने को कहा, तो नेहा ने ऐसा नहीं किया। इसके बाद आधार ने कई बार फोन मिलाया, लेकिन कॉल का कोई जवाब नहीं मिला। इस पर उसे संदेह हुआ और वह तुरंत घर के लिए निकल पड़ा।
घर पहुंचने पर उसने पाया कि दरवाजा अंदर से बंद है। कई बार आवाज देने के बावजूद कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो उसने मकान मालिक और पड़ोसियों को बुलाया। सभी की मौजूदगी में दरवाजा तोड़ा गया। जैसे ही दरवाजा खुला, अंदर का दृश्य देखकर सभी के होश उड़ गए।
कमरे के अंदर बेटी अनिका बेड पर पड़ी थी, जबकि नेहा फर्श पर खून से लथपथ हालत में पड़ी हुई थी। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई और दोनों को अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद बच्ची को मृत घोषित कर दिया, जबकि महिला को गंभीर हालत में भर्ती किया गया।
पोस्टमार्टम की प्रारंभिक रिपोर्ट में सामने आया है कि बच्ची की मौत गला दबाने से हुई है। उसके शरीर पर किसी अन्य प्रकार के चोट के निशान नहीं पाए गए हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि हत्या सुनियोजित तरीके से की गई थी।
पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि नेहा पहले भी आत्महत्या का प्रयास कर चुकी थी। जब यह परिवार फरीदाबाद में रहता था, तब भी पति-पत्नी के बीच विवाद के बाद उसने खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी। हालांकि उस समय उसने अपनी बेटी को नुकसान नहीं पहुंचाया था। यह तथ्य इस घटना के पीछे मानसिक अस्थिरता की संभावना को और मजबूत करता है।
सेक्टर-9 थाना पुलिस ने इस मामले में पति आधार शर्मा की शिकायत पर महिला के खिलाफ हत्या और अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि महिला के होश में आने के बाद ही घटना के असली कारणों का पता चल सकेगा।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह मामला घरेलू विवाद से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है। हालांकि पति ने अपने बयान में किसी बड़े झगड़े से इनकार किया है। इसके बावजूद पुलिस हर पहलू की जांच कर रही है, जिसमें पारिवारिक संबंध, मानसिक स्थिति और आसपास के लोगों के बयान शामिल हैं।
यह घटना कई अहम सवाल खड़े करती है। क्या एक मामूली विवाद इतना बड़ा रूप ले सकता है कि एक मां अपनी ही संतान की जान ले ले? या फिर इसके पीछे लंबे समय से चला आ रहा मानसिक तनाव जिम्मेदार है? इन सवालों के जवाब फिलहाल जांच के बाद ही सामने आ पाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। खासकर महिलाओं के मामले में, जो अक्सर अपनी भावनाओं को दबाकर रखती हैं, ऐसे हालात और भी गंभीर हो सकते हैं। अगर समय रहते उनकी समस्याओं को समझा और हल किया जाए, तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।
समाज में बढ़ती भागदौड़ और तनावपूर्ण जीवनशैली ने पारिवारिक रिश्तों को भी प्रभावित किया है। संवाद की कमी और भावनात्मक दूरी कई बार छोटे-छोटे विवादों को बड़े संकट में बदल देती है। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हमें अपने परिवार और रिश्तों को लेकर अधिक संवेदनशील और सतर्क रहने की जरूरत है।
अंततः, गुरुग्राम की यह घटना एक चेतावनी है कि मानसिक तनाव और घरेलू विवादों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक सबक है। अगर हम समय रहते जागरूक नहीं हुए, तो ऐसी घटनाएं भविष्य में भी दोहराई जा सकती हैं।



