
गन कल्चर पर वार: हरियाणा STF ने 29 गायकों के 67 विवादित हरियाणवी गानों पर लगाई रोक
हरियाणा में बढ़ते गन कल्चर, अपराध और गैंगस्टर महिमामंडन के खिलाफ पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने 29 हरियाणवी गायकों के 67 गानों को समाज और कानून व्यवस्था पर नकारात्मक असर डालने वाला बताते हुए प्रतिबंधित कर दिया है। इन गानों में हथियारों का खुला प्रदर्शन, अपराध को शान की तरह पेश करना और न्याय व्यवस्था का मजाक उड़ाने जैसे आरोप लगाए गए हैं।

पुलिस का कहना है कि इस तरह के गाने खासतौर पर युवाओं को गलत दिशा में प्रभावित कर रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए STF ने यूट्यूब, स्पॉटिफाई, अमेज़न म्यूजिक, गाना और जियो सावन जैसे बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म से इन गानों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। संबंधित प्लेटफॉर्म्स से लगातार संपर्क कर कंटेंट हटवाया जा रहा है।
STF द्वारा तैयार की गई सूची के अनुसार, सबसे ज्यादा 19 आपत्तिजनक गाने गायक मासूम शर्मा के हैं। इसके अलावा नरेंद्र भगाना और अमित सैनी रोहतकिया के छह-छह गाने बैन सूची में शामिल किए गए हैं। आशु ट्विंकल के आठ और मनीषा शर्मा के सात गाने (जो सभी युगल गीत हैं) भी चिन्हित किए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि प्रतिबंध से पहले ही इन गानों को सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों बार देखा जा चुका था।
पुलिस की रिपोर्ट में कुछ गानों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। “कोर्ट में गोली” नामक गाने पर अदालत और कानून व्यवस्था को खुलेआम चुनौती देने का आरोप है। इस गाने को बीते कुछ महीनों में करोड़ों बार देखा गया, जिससे इसका प्रभाव और भी गंभीर माना जा रहा है। इसी तरह “ट्यूशन बदमाशी” जैसे गीतों में अपराध को कला या हुनर के रूप में दिखाया गया है, जबकि “60 मुकदमे” जैसे गानों में हथियारों के साथ नायकत्व की छवि गढ़ी गई है। कुछ गीतों में आतंकी संगठनों के नाम या संदर्भों को लेकर भी आपत्ति जताई गई है।
इस कार्रवाई पर संगीत जगत से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। मशहूर लोक गायक गजेंद्र फोगाट का कहना है कि गीत और फिल्में समाज की संस्कृति का आईना होती हैं। उनके अनुसार, अगर कोई कंटेंट संस्कृति को बिगाड़ने वाला है तो उस पर कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका कोई भी गाना प्रतिबंधित नहीं हुआ है और पहले भी उन्होंने एक विवादित गीत को खुद ही निजी कर दिया था।
वहीं, गायक मासूम शर्मा ने इस मुहिम में सरकार के साथ होने की बात कही, लेकिन यह भी जोड़ा कि सिर्फ हरियाणवी गानों को निशाना बनाना उचित नहीं है। उनका कहना है कि अगर गन कल्चर और अश्लीलता के खिलाफ कदम उठाना है तो पूरे देश में एक समान नियम लागू होने चाहिए। केवल गानों को बैन करने से अपराध रुकेंगे, यह जरूरी नहीं है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कलाकार लोकप्रियता हासिल करने के बाद युवाओं पर गहरा असर डालते हैं, इसलिए उनके कंटेंट की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। STF ने युवाओं से अपील की है कि वे गानों में दिखाई जाने वाली हिंसा और अपराध को वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें और कानून से दूर रहने वाले किसी भी भ्रम में न पड़ें।

