
उम्रकैद पर भड़के दोषी, कोर्ट में जज को दी धमकी
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से अदालत की मर्यादा को झकझोर देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। हत्या के एक मामले में दो आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद वे अदालत कक्ष में ही बौखला उठे और सजा सुनाने वाले जज को खुलेआम धमकी दे डाली। दोषियों ने जज से कहा कि उन्होंने न्याय नहीं बल्कि अन्याय किया है और इसका अंजाम उन्हें भुगतना पड़ेगा। घटना के बाद न्यायाधीश की सुरक्षा तत्काल बढ़ा दी गई और पूरे प्रकरण ने न्यायिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह मामला बिजनौर के धामपुर क्षेत्र में हुई एक जघन्य हत्या से जुड़ा है। अदालत ने विस्तृत सुनवाई के बाद जयदीप और पिंटू चौहान को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही दोनों पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। फैसला सुनते ही दोनों दोषी अपना आपा खो बैठे और कोर्ट रूम में ही जोर-जोर से विरोध जताने लगे।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद दोनों आरोपियों ने न्यायाधीश की ओर उंगली उठाते हुए कहा, “जज साहब, आपने न्याय नहीं किया, इसका अंजाम भुगतना होगा। हम आपको देख लेंगे।” अदालत कक्ष में अचानक पैदा हुए इस तनावपूर्ण माहौल से वहां मौजूद वकील, कर्मचारी और अन्य लोग भी हैरान रह गए। कोर्ट की कार्यवाही के दौरान इस तरह की खुली धमकी ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी।
घटना की गंभीरता को देखते हुए अदालत परिसर में तैनात पुलिस और सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत स्थिति संभाली। दोनों दोषियों को हिरासत में लेकर बाहर ले जाया गया, लेकिन उनके तेवर लंबे समय तक चर्चा का विषय बने रहे। न्यायाधीश ने भी इस धमकी को हल्के में नहीं लिया और पूरे घटनाक्रम की जानकारी उच्च अधिकारियों को लिखित रूप में दी।
मामले की पृष्ठभूमि करीब दो साल पुरानी है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 19 मई 2024 को धामपुर क्षेत्र में पुखराज सिंह नामक व्यक्ति की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। घटना उस समय हुई जब पुखराज सिंह अपने खेत पर काम कर रहे थे। तभी कार सवार आरोपियों ने उन्हें निशाना बनाया।
जांच में सामने आया कि मृतक पुखराज सिंह की बेटी अंजलि की शादी आरोपी जयदीप के भाई प्रदीप से हुई थी। विवाह के बाद अंजलि को कथित तौर पर दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा। इस संबंध में अंजलि ने ससुराल पक्ष के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। उस मुकदमे की पैरवी उसके पिता पुखराज सिंह कर रहे थे, जिससे दोनों परिवारों के बीच दुश्मनी बढ़ती चली गई।
अभियोजन के मुताबिक, इसी रंजिश के चलते आरोपियों ने पुखराज सिंह को रास्ते से हटाने की साजिश रची। घटना वाले दिन पहले उनके साथ मारपीट की गई, फिर उन्हें सड़क तक घसीटा गया और कार से कुचलकर हत्या कर दी गई। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए थे।
स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी और प्रत्यक्षदर्शियों ने जयदीप, पिंटू चौहान और एक अन्य व्यक्ति की पहचान की। पुलिस ने जांच के बाद जयदीप और पिंटू चौहान के खिलाफ हत्या की धारा में चार्जशीट दाखिल की और मामला कोर्ट में ट्रायल के लिए भेजा गया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई अहम साक्ष्य पेश किए। गवाहों के बयान, चिकित्सकीय रिपोर्ट और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को अदालत ने महत्वपूर्ण माना। खास तौर पर मृतक की पत्नी रेनू की तहरीर और बेटी अंजलि की गवाही ने अभियोजन के केस को मजबूत आधार दिया। अदालत ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया और उम्रकैद की सजा सुनाई।
फैसला सुनते ही आरोपियों का आक्रामक रवैया सामने आ गया। उन्होंने अदालत की गरिमा की परवाह किए बिना न्यायाधीश को धमकाना शुरू कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने यहां तक कहा कि उन्हें जज के घर का पता भी मालूम है और वे उन्हें वहां तक नहीं छोड़ेंगे। इस बयान ने सुरक्षा एजेंसियों को और ज्यादा सतर्क कर दिया।
सजा सुनाने वाले चतुर्थ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश निजेंद्र कुमार ने मामले को गंभीर मानते हुए जिला जज, डीआईजी मुरादाबाद और गृह सचिव को पत्र भेजकर पूरी घटना से अवगत कराया। पत्र में उन्होंने स्पष्ट लिखा कि सजा के बाद दोषियों ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से धमकी दी है, जो न्यायिक कार्य में बाधा डालने और सुरक्षा के लिहाज से बेहद चिंताजनक है।
धमकी के बाद न्यायाधीश की सुरक्षा तत्काल बढ़ा दी गई। उन्हें कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उनके सरकारी आवास तक पहुंचाया गया। पुलिस अधिकारियों ने भी स्थिति का जायजा लिया। सीओ सिटी संग्राम सिंह स्वयं कोर्ट पहुंचे और न्यायाधीश को सुरक्षित उनके आवास तक छोड़ा।
कानूनी जानकारों का कहना है कि अदालत के भीतर जज को धमकी देना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है और इससे न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। ऐसे मामलों में आरोपियों के खिलाफ अलग से कानूनी कार्रवाई भी संभव है।
इस घटना ने एक बार फिर अदालत परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था और न्यायाधीशों की सुरक्षा को लेकर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि संवेदनशील मामलों में फैसला सुनाते समय अतिरिक्त सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए जाने चाहिए, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
फिलहाल पुलिस और प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। दोषियों को जेल भेज दिया गया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। वहीं न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा बढ़ाए जाने के बाद स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। हालांकि इस घटना ने साफ कर दिया है कि अदालतों में सुरक्षा को लेकर अभी भी कई स्तरों पर सख्ती की जरूरत है।



