
उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम का प्रहार: बर्फबारी, बारिश और तेज हवाओं से जनजीवन प्रभावित, कई इलाकों में अलर्ट
मार्च के अंतिम दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत का मौसम अचानक बदल गया है। जहां कुछ दिन पहले तक गर्मी की शुरुआत महसूस हो रही थी, वहीं अब बारिश, बर्फबारी और ठंडी हवाओं ने मौसम को फिर से सर्द बना दिया है। पहाड़ी राज्यों में भारी हिमपात हो रहा है, जबकि मैदानी इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही हैं। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए भी इसी तरह के हालात बने रहने की चेतावनी दी है।

इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण पश्चिमी विक्षोभ है, जो उत्तरी ईरान और कैस्पियन सागर के आसपास सक्रिय हुआ है। इसके प्रभाव से उत्तर भारत के बड़े हिस्से में बादल छाए हुए हैं और लगातार वर्षा व बर्फबारी हो रही है। साथ ही, राजस्थान और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में कम दबाव का क्षेत्र और चक्रवाती हवाएं भी सक्रिय हैं, जिससे मौसम और ज्यादा अस्थिर हो गया है।
जम्मू-कश्मीर में इस मौसम का सबसे ज्यादा असर देखा जा रहा है। यहां पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी के कारण कई महत्वपूर्ण सड़क मार्ग बंद हो गए हैं। श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग और बांदीपोरा-गुरेज मार्ग पर बर्फ जमने के कारण वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है। इससे स्थानीय लोगों और यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है, क्योंकि कुछ इलाकों में हिमस्खलन और भूस्खलन का खतरा भी बना हुआ है।
हिमाचल प्रदेश में भी हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। रोहतांग दर्रा, कुंजुम पास, बारालाचा और शिंकुला जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी दर्ज की गई है। कई स्थानों पर 15 से 20 सेंटीमीटर तक बर्फ जमी है, जिससे सड़कें फिसलन भरी हो गई हैं और यातायात प्रभावित हुआ है। कुल्लू, मनाली और लाहौल-स्पीति जैसे पर्यटन स्थलों पर भी मौसम ने लोगों की गतिविधियों को सीमित कर दिया है। अटल टनल रोहतांग की ओर जाने वाले मार्ग पर भी कुछ समय के लिए आवाजाही बाधित रही।
शिमला, धर्मशाला और अन्य निचले इलाकों में बारिश के कारण ठंड का असर फिर से बढ़ गया है। स्थानीय लोगों को मार्च के अंत में भी गर्म कपड़ों का सहारा लेना पड़ रहा है। पर्यटकों के लिए यह मौसम जहां आकर्षण का केंद्र है, वहीं यात्रा में सावधानी बरतना भी जरूरी हो गया है।
मैदानी इलाकों में भी मौसम ने राहत और परेशानी दोनों साथ लेकर आई है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है। कई जगहों पर तेज हवाएं और गरज-चमक के साथ बारिश हुई है। कुछ क्षेत्रों में ओले गिरने की भी खबर है, जिससे फसलों को नुकसान की आशंका बढ़ गई है।
किसानों के लिए यह मौसम चिंता का विषय बन गया है। इस समय गेहूं की फसल पकने के करीब होती है, और ऐसे में बारिश, तेज हवाएं और ओलावृष्टि फसल को नुकसान पहुंचा सकती हैं। पंजाब और हरियाणा के कई किसानों ने अपनी फसल को लेकर चिंता जताई है। यदि मौसम इसी तरह बना रहा, तो उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार, 30 और 31 मार्च को उत्तर-पश्चिम भारत में कई जगहों पर बारिश और आंधी-तूफान की संभावना है। हवा की रफ्तार 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि भी हो सकती है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है।
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन राज्यों में 30 मार्च से लेकर 3 अप्रैल तक हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। 4 अप्रैल तक मौसम में खास सुधार के आसार नहीं हैं। उत्तराखंड में कुछ स्थानों पर ओले गिरने की भी चेतावनी दी गई है।
राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी मौसम का असर देखने को मिल रहा है। यहां निचले स्तर पर बने कम दबाव और चक्रवाती हवाओं के कारण बादल छाए हुए हैं और हल्की बारिश हो रही है। इन इलाकों में भी अगले कुछ दिनों में मौसम सक्रिय बना रह सकता है।
पूर्वोत्तर भारत में भी मौसम बदला हुआ है। यहां कई जगहों पर हल्की से भारी बारिश की संभावना जताई गई है। खासकर 30 मार्च से 1 अप्रैल के बीच कुछ क्षेत्रों में भारी वर्षा हो सकती है। दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में भी गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाओं की संभावना है।
इस पूरे मौसम बदलाव का असर तापमान पर भी पड़ा है। पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। जहां दिन में हल्की गर्मी महसूस हो रही थी, वहीं अब ठंडी हवाओं के कारण मौसम सुहावना लेकिन ठंडा हो गया है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 2 अप्रैल के आसपास एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है, जिससे बारिश और बर्फबारी का दौर आगे भी जारी रह सकता है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की जरूरत है।
कुल मिलाकर, मार्च के अंत में मौसम का यह अचानक बदला रूप कई राज्यों के लिए चुनौती बन गया है। जहां एक ओर यह गर्मी से राहत दे रहा है, वहीं दूसरी ओर किसानों, यात्रियों और आम लोगों के लिए परेशानी भी खड़ी कर रहा है। ऐसे में जरूरी है कि सभी लोग सावधानी बरतें और सुरक्षित रहें।
