
आगरा के गांव में अमोनिया गैस लीक से हड़कंप, आधी रात को घर छोड़कर भागे ग्रामीण
उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में गुरुवार देर रात एक बड़ा हादसा सामने आया, जब एक कोल्ड स्टोरेज से अमोनिया गैस का रिसाव हो गया। गैस लीक होते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और ग्रामीणों को अचानक अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा। यह घटना पिनाहट थाना क्षेत्र के कुकथरी गांव की बताई जा रही है, जहां रात के सन्नाटे में फैली जहरीली गैस ने लोगों को दहशत में डाल दिया।

मिली जानकारी के अनुसार, कुकथरी गांव में दो से तीन कोल्ड स्टोरेज मौजूद हैं। गुरुवार देर रात इनमें से एक कोल्ड स्टोरेज में अचानक तकनीकी खराबी के कारण अमोनिया गैस का रिसाव शुरू हो गया। जैसे ही गैस वातावरण में फैलनी शुरू हुई, गांव के लोगों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और घबराहट महसूस होने लगी। शुरुआत में लोगों को समझ नहीं आया कि आखिर अचानक यह परेशानी क्यों हो रही है, लेकिन कुछ ही देर में पूरे गांव में खबर फैल गई कि पास के कोल्ड स्टोरेज से अमोनिया गैस लीक हो रही है।
गैस के फैलते ही पूरे गांव में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। लोग अपने घरों से बाहर निकलकर सुरक्षित जगह की तलाश में भागने लगे। कई ग्रामीण अपने परिवार और बच्चों को लेकर खेतों की तरफ चले गए, ताकि जहरीली गैस के असर से बच सकें। कुछ लोगों ने अपने घरों के दरवाजे तक ठीक से बंद नहीं किए और जल्दबाजी में गांव से दूर जाने लगे।
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित करने की कोशिश शुरू कर दी। थोड़ी ही देर में कई थानों की पुलिस फोर्स गांव में पहुंच गई। इसके अलावा जिला प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। जिला अधिकारी (डीएम), एडिशनल पुलिस कमिश्नर और डीसीपी पूर्वी सहित अन्य अधिकारी स्थिति का जायजा लेने के लिए गांव पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू करवाया।
प्रशासन ने तुरंत एहतियात के तौर पर पूरे गांव को खाली करवाने का फैसला लिया। पुलिस ने लाउडस्पीकर के माध्यम से गांव के लोगों को घरों से बाहर निकलने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की। अधिकारियों ने ग्रामीणों से कहा कि वे घबराएं नहीं और प्रशासन द्वारा दिए जा रहे निर्देशों का पालन करें। पुलिस और प्रशासन की टीम ने गांव के अलग-अलग हिस्सों में जाकर लोगों को बाहर निकाला और सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने में मदद की।
इस दौरान घरों में बंधे पालतू जानवरों को भी खोल दिया गया, ताकि वे भी जहरीली गैस के प्रभाव से बच सकें। कई ग्रामीण अपने पशुओं को साथ लेकर गांव से बाहर निकलते हुए दिखाई दिए। गांव के आसपास का पूरा इलाका देर रात तक हलचल से भरा रहा और लोग डरे-सहमे नजर आए।
गैस का असर होने के कारण कई लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। कुछ लोगों को सांस लेने में काफी परेशानी हुई, जबकि कुछ को चक्कर और आंखों में तेज जलन महसूस हुई। स्थिति को देखते हुए तुरंत एम्बुलेंस को मौके पर बुलाया गया। एक के बाद एक कई एम्बुलेंस गांव में पहुंचीं और प्रभावित लोगों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
जानकारी के मुताबिक करीब 30 से ज्यादा लोगों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों की टीम ने मरीजों का प्राथमिक उपचार शुरू किया और उनकी हालत पर नजर रखी जा रही है। फिलहाल ज्यादातर मरीजों की स्थिति स्थिर बताई जा रही है, लेकिन डॉक्टर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।
वहीं दूसरी तरफ फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां भी मौके पर पहुंचीं और कोल्ड स्टोरेज में हो रहे गैस रिसाव को रोकने के प्रयास शुरू किए। तकनीकी टीम को भी बुलाया गया ताकि गैस लीक होने के कारणों का पता लगाया जा सके और जल्द से जल्द स्थिति को सामान्य किया जा सके।
प्रशासन ने पूरे इलाके को अस्थायी रूप से सील कर दिया और लोगों को वहां जाने से रोक दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा के सभी जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं और गैस रिसाव को पूरी तरह नियंत्रित करने की कोशिश जारी है।
इस घटना के बाद गांव के लोगों में काफी डर का माहौल है। कई ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहले कभी ऐसी घटना नहीं देखी थी। रात के समय अचानक फैली जहरीली गैस ने सभी को डरा दिया और लोग अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हो गए।
फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है कि आखिर कोल्ड स्टोरेज से अमोनिया गैस का रिसाव कैसे हुआ। तकनीकी खराबी, लापरवाही या किसी अन्य कारण की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि अगर किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया है कि स्थिति अब धीरे-धीरे सामान्य हो रही है और गैस के असर को कम करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही गांव के लोगों को भरोसा दिलाया गया है कि उनकी सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आबादी वाले इलाकों के पास स्थित औद्योगिक इकाइयों और कोल्ड स्टोरेज में सुरक्षा मानकों का पालन कितना जरूरी है। अगर समय रहते रिसाव का पता नहीं चलता, तो यह हादसा और भी बड़ा रूप ले सकता था। फिलहाल प्रशासन और राहत टीमों की तत्परता से स्थिति को काबू में करने की कोशिश जारी है।



