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हरियाणा विधानसभा में सियासी घमासान: कांग्रेस का बहिष्कार, सरकार ने विपक्ष पर साधा निशाना

हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र के पहले ही दिन राजनीतिक माहौल गरमा गया, जब मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सदन की कार्यवाही से खुद को अलग करने का ऐलान कर दिया। सत्र की शुरुआत होते ही कांग्रेस विधायकों ने विरोध जताया और वॉकआउट करते हुए पूरे दिन की कार्यवाही में हिस्सा न लेने का फैसला लिया। इस कदम ने न केवल सदन की कार्यवाही को प्रभावित किया, बल्कि सत्ता और विपक्ष के बीच बढ़ती दूरी को भी उजागर कर दिया।

सूत्रों के मुताबिक, इस फैसले की नींव सत्र शुरू होने से पहले हुई कांग्रेस विधायक दल (CLP) की बैठक में रखी गई थी। बैठक में पार्टी नेताओं ने एकमत होकर तय किया कि सरकार द्वारा लाए जा रहे प्रस्ताव का विरोध किया जाएगा। खासतौर पर ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर कांग्रेस के खिलाफ लाए जाने वाले निंदा प्रस्ताव को लेकर पार्टी में नाराजगी थी। कांग्रेस नेताओं का मानना था कि यह प्रस्ताव राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है और इसका उद्देश्य विपक्ष को कटघरे में खड़ा करना है।

विधानसभा की कार्यवाही की शुरुआत परंपरागत रूप से शोक प्रस्ताव के साथ हुई। सदन में दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि दी गई और सभी सदस्यों ने एकजुट होकर शोक व्यक्त किया। लेकिन जैसे ही शोक प्रस्ताव समाप्त हुआ और सरकार ने अपना अगला एजेंडा पेश करने की तैयारी की, सदन का माहौल बदल गया। कांग्रेस विधायकों ने निंदा प्रस्ताव को लेकर जोरदार विरोध जताया। नारेबाजी और हंगामे के बीच उन्होंने सदन से बाहर जाने का निर्णय लिया और वॉकआउट कर दिया।

कांग्रेस के बाहर जाने के बाद सदन की कार्यवाही बिना किसी बड़े विरोध के आगे बढ़ती रही। इस दौरान सरकार ने ‘हरियाणा क्लेरिकल सर्विस बिल 2026’ पेश किया। इस बिल को कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके तहत ग्रुप-डी कर्मचारियों के लिए क्लर्क पद पर प्रमोशन का कोटा 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का कहना है कि इससे कर्मचारियों को बेहतर अवसर मिलेंगे और प्रशासनिक व्यवस्था में संतुलन आएगा।

सदन के अंदर कार्यवाही जारी रखते हुए मुख्यमंत्री ने शोक प्रस्ताव को औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया, जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। हालांकि, कांग्रेस की गैरमौजूदगी लगातार चर्चा का विषय बनी रही। सत्ता पक्ष के कई नेताओं ने विपक्ष के इस रवैये की आलोचना की और इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया।

कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जब भी महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा का समय आता है, तब विपक्ष अक्सर सदन छोड़कर बाहर चला जाता है। उन्होंने कहा कि यह व्यवहार न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि इससे जनता के मुद्दों पर गंभीर चर्चा भी प्रभावित होती है। मंत्री ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका केवल विरोध करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसे रचनात्मक सहयोग भी देना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने भी कांग्रेस के इस कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति का सबसे बड़ा आधार महिलाओं को मिलने वाला सम्मान और अधिकार होता है। ‘नारी शक्ति वंदन’ जैसे विषय पर चर्चा से दूर रहना यह दर्शाता है कि विपक्ष इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं ले रहा है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे पर स्पष्ट और सकारात्मक रुख अपनाने में विफल रही है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अगर विपक्ष को किसी प्रस्ताव से आपत्ति थी, तो उसे सदन के भीतर रहकर अपनी बात रखनी चाहिए थी। बहिष्कार करने से न तो समस्या का समाधान निकलता है और न ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया मजबूत होती है। उन्होंने इस बात पर खेद जताया कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के दौरान विपक्ष की कुर्सियां खाली रहीं।

वहीं, कांग्रेस के इस फैसले को उसके समर्थक अलग नजरिए से देख रहे हैं। उनका कहना है कि पार्टी ने सरकार के एकतरफा रवैये के खिलाफ यह कदम उठाया है। उनके अनुसार, यदि विपक्ष को बार-बार निशाना बनाया जाएगा, तो वह अपनी आवाज उठाने के लिए ऐसे कदम उठाने के लिए मजबूर होगा।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम ने हरियाणा की राजनीति में बढ़ती खींचतान को उजागर कर दिया है। विशेष सत्र जैसे महत्वपूर्ण मौके पर विपक्ष का अनुपस्थित रहना एक बड़ा संकेत है कि दोनों पक्षों के बीच संवाद की कमी है। इसका असर भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों पर भी पड़ सकता है।

इसके अलावा, इस घटना ने यह भी सवाल खड़ा किया है कि क्या विधानसभा जैसे मंच पर राजनीतिक टकराव जनता के मुद्दों पर भारी पड़ रहा है। जब सत्ता और विपक्ष के बीच संवाद नहीं होता, तो नीतियों पर संतुलित बहस संभव नहीं हो पाती।

फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दोनों पक्ष अपने रुख में नरमी लाते हैं या फिर टकराव और बढ़ता है। सरकार जहां अपने फैसलों को आगे बढ़ाने के मूड में दिख रही है, वहीं कांग्रेस भी अपने विरोध को और मुखर करने की तैयारी में है।

इस घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि हरियाणा की राजनीति में आने वाला समय काफी दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण रहने वाला है, जहां हर कदम सोच-समझकर उठाया जाएगा और उसका असर सीधे जनता तक पहुंचेगा।

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