
हरियाणा में 2000 नए बीटा बूथ, महिलाओं को 20% आरक्षण
हरियाणा सरकार ने स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य में 2000 नए बीटा बूथ खोलने की घोषणा की है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इन बूथों के संचालन में महिलाओं को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी और कुल आवंटन में 20 प्रतिशत आरक्षण स्वयं सहायता समूह चलाने वाली महिलाओं के लिए तय किया गया है।

सरकार का मानना है कि बीटा बूथ न केवल छोटे उद्यमों को बढ़ावा देंगे, बल्कि ग्रामीण और शहरी गरीब परिवारों की आय बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाएंगे। मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार योजनाएं ला रही है और बीटा बूथ योजना उसी कड़ी का हिस्सा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस योजना के जरिए हजारों महिलाओं को सीधे लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं लंबे समय से छोटे स्तर पर उत्पादन और सेवाओं से जुड़ी गतिविधियां कर रही हैं, लेकिन उन्हें बाजार और स्थायी प्लेटफॉर्म की कमी महसूस होती रही है। बीटा बूथ योजना के माध्यम से इन महिलाओं को एक व्यवस्थित स्थान और पहचान मिलेगी, जिससे वे अपने उत्पाद और सेवाएं आसानी से लोगों तक पहुंचा सकेंगी। सरकार का लक्ष्य है कि इन बूथों के जरिए स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिले और महिलाओं की आय में स्थायी वृद्धि हो।
सीएम सैनी ने यह भी कहा कि राज्य सरकार उद्योग और व्यापार के समग्र विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। इसी क्रम में उन्होंने हरियाणा के पुराने औद्योगिक क्षेत्रों की स्थिति सुधारने के लिए भी महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने बताया कि पूर्ववर्ती पंजाब राज्य के समय स्थापित कई औद्योगिक क्षेत्रों की हालत वर्तमान में ठीक नहीं है, क्योंकि समय के साथ ये क्षेत्र नगर निकाय सीमाओं में शामिल हो गए हैं और बुनियादी ढांचा कमजोर हो गया है।
मुख्यमंत्री के अनुसार सोनीपत, हिसार, अंबाला शहर, यमुनानगर, सिरसा, फतेहाबाद, नीलोखेड़ी, बहादुरगढ़, बरवाला और पानीपत जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति उद्योगपतियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। पहले इन क्षेत्रों का प्रबंधन उद्योग विभाग के पास था और बाद में इन्हें हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (HSIIDC) को स्थानांतरित किया गया था। लेकिन अब शहरी विस्तार के कारण इन इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की कमी महसूस की जा रही है।
उद्योगपतियों और व्यापारिक संगठनों की मांग को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए “सक्षम” नाम से एक विशेष फंड बनाने का निर्णय लिया है। इस फंड में 500 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फंड औद्योगिक क्षेत्रों में सड़कों, ड्रेनेज, बिजली, पानी और अन्य जरूरी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए खर्च किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि जब औद्योगिक क्षेत्रों का इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर होगा तो नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा, उद्योगों का विस्तार होगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि हरियाणा को उद्योग और निवेश के लिहाज से देश के अग्रणी राज्यों में बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि बीटा बूथ योजना और “सक्षम” फंड—दोनों पहलें मिलकर राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति देंगी। एक ओर जहां बीटा बूथ छोटे स्तर पर स्वरोजगार को बढ़ावा देंगे, वहीं सक्षम फंड बड़े औद्योगिक ढांचे को मजबूत करेगा। इससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों से लेकर बड़े निवेशकों तक सभी को फायदा मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बीटा बूथ योजना को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए, ताकि पात्र लाभार्थियों तक योजना का फायदा जल्द पहुंचे। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आरक्षण का वास्तविक लाभ मिले, इसके लिए चयन प्रक्रिया निष्पक्ष होनी चाहिए।
सरकार की इस घोषणा को महिला समूहों और उद्योग जगत दोनों के लिए सकारात्मक कदम माना जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को जहां एक स्थायी व्यापारिक मंच मिलेगा, वहीं औद्योगिक क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के सुधार से निवेश का माहौल बेहतर होने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, हरियाणा सरकार की यह पहल महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार और औद्योगिक विकास—तीनों मोर्चों पर एक साथ काम करने की रणनीति का हिस्सा नजर आती है। आने वाले समय में इन योजनाओं का जमीन पर कितना प्रभाव पड़ता है, इस पर सबकी नजर रहेगी।

