
हरियाणा में मौसम की मार से गेहूं की फसल पर संकट, कटाई तेज लेकिन पैदावार घटने की आशंका
हरियाणा में मौसम के लगातार बदलते मिजाज ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में पककर तैयार खड़ी गेहूं की फसल अब खतरे की जद में आ गई है। सिरसा जिले के रोड़ी और आसपास के गांवों में किसान तेजी से गेहूं की कटाई में जुट गए हैं ताकि किसी भी संभावित बारिश या खराब मौसम से फसल को बचाया जा सके। हालांकि, इस जल्दबाजी में हो रही कटाई के बावजूद किसानों को पैदावार और गुणवत्ता दोनों में नुकसान की आशंका सता रही है।

ग्रामीण इलाकों में इन दिनों खेतों का दृश्य पूरी तरह बदल गया है। जहां कुछ दिन पहले तक खेतों में सुनहरी गेहूं की बालियां लहलहा रही थीं, वहीं अब हर तरफ कटाई का काम जोर-शोर से चल रहा है। किसान परिवार के साथ मिलकर खेतों में काम कर रहे हैं और जल्दी से जल्दी फसल को सुरक्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।
परंपरागत रूप से किसान बैसाखी पर्व के बाद गेहूं की कटाई शुरू करते हैं, लेकिन इस बार मौसम की अनिश्चितता ने यह समय-सीमा बदल दी है। लगातार बदलते मौसम, बादल, तेज हवाएं और हल्की बारिश की आशंका के चलते किसान पहले ही कटाई करने को मजबूर हैं। कई किसानों का कहना है कि अगर फसल खेत में थोड़ी और देर तक खड़ी रहती, तो बारिश से भारी नुकसान हो सकता था।
किसान अपनी फसल को बचाने के लिए हर संभव तरीका अपना रहे हैं। जहां बड़े खेत हैं वहां कंबाइन मशीनों से कटाई की जा रही है, वहीं छोटे किसान आज भी हाथों से कटाई कर रहे हैं। कंबाइन मशीनें एक साथ कटाई और गेहूं निकालने का काम कर रही हैं, जिससे समय की बचत हो रही है। हालांकि, मशीनों के इस्तेमाल से खर्च भी बढ़ गया है, लेकिन किसान इसे मजबूरी मानकर अपनाने को तैयार हैं।
दूसरी ओर छोटे और सीमांत किसान पारंपरिक तरीके से फसल काट रहे हैं। वे हाथों से गेहूं काटकर थ्रेसर की मदद से दाना निकाल रहे हैं। उनका कहना है कि थ्रेसर से न केवल गेहूं निकल जाता है बल्कि पशुओं के लिए जरूरी तूड़ा भी पर्याप्त मात्रा में मिल जाता है, जो ग्रामीण जीवन में बहुत उपयोगी होता है।
इस पूरे सीजन में मजदूरों की कमी भी किसानों के लिए एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई है। किसानों का कहना है कि कटाई के समय मजदूरों की भारी मांग होती है, लेकिन पर्याप्त संख्या में मजदूर उपलब्ध नहीं हो पाते। कई बार समय पर मजदूर न मिलने के कारण काम रुक जाता है, जिससे फसल के खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा मजदूरी दरों में भी बढ़ोतरी हुई है, जिससे कटाई का कुल खर्च काफी बढ़ गया है।
किसानों की मानें तो इस बार हालात पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हैं। एक तरफ मौसम का डर है, तो दूसरी तरफ मजदूरों की कमी और बढ़ती लागत ने परेशानी बढ़ा दी है। ऐसे में किसानों के पास जल्दी से जल्दी फसल काटकर सुरक्षित करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
स्थानीय किसानों बिंदर सिंह, मल सिंह और कुलविंद्र सिंह का कहना है कि इस बार गेहूं की पैदावार में 5 से 10 मन प्रति एकड़ तक की कमी आने की संभावना है। उनका मानना है कि मौसम का सीधा असर फसल की ग्रोथ और दानों की गुणवत्ता पर पड़ा है। खेतों में खड़ी फसल पहले जैसी चमकदार नहीं दिख रही है और दानों में हल्का कालापन भी नजर आ रहा है।
मंडियों में पहुंच रही नई फसल को देखकर व्यापारी भी सतर्क हो गए हैं। किसानों के अनुसार, इस बार गेहूं की चमक और गुणवत्ता में कमी के कारण दामों पर भी असर पड़ सकता है। सामान्य स्थिति में जिस गेहूं को बेहतर गुणवत्ता का माना जाता था, इस बार उसमें वह चमक और मजबूती नहीं दिख रही है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार बदलते मौसम का असर कृषि उत्पादन पर साफ दिखाई दे रहा है। कभी तेज धूप, कभी बादल और अचानक हल्की बारिश जैसी स्थिति ने फसलों को प्रभावित किया है। ऐसे में कटाई के समय भी जोखिम बढ़ जाता है और किसान जल्दबाजी में फसल निकालने को मजबूर हो जाते हैं।
ग्रामीण इलाकों में इस समय हर तरफ खेतों में हलचल का माहौल है। कहीं कंबाइन मशीनों की आवाज गूंज रही है, तो कहीं परिवार के लोग मिलकर फसल काटते दिखाई दे रहे हैं। महिलाएं भी इस काम में बराबर हिस्सा ले रही हैं, जिससे काम तेजी से पूरा हो सके।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की स्थिति में किसानों को मौसम की जानकारी पर विशेष ध्यान देना चाहिए और फसल कटाई के लिए सही समय का चुनाव करना चाहिए। साथ ही फसल को सुरक्षित भंडारण में रखने की व्यवस्था भी समय रहते करनी चाहिए, ताकि अचानक बारिश या आंधी से नुकसान न हो।
सरकारी स्तर पर भी किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे मौसम पूर्वानुमान के अनुसार ही फसल कटाई का कार्य करें। इसके अलावा मंडियों में फसल की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उचित कदम उठाने की जरूरत है, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य मिल सके।
कुल मिलाकर, इस बार हरियाणा में गेहूं की फसल पर मौसम की मार साफ दिखाई दे रही है। किसानों की मेहनत के बावजूद उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ने की आशंका है। अब आने वाले दिनों का मौसम तय करेगा कि किसानों की मेहनत कितनी सफल साबित होती है और बाजार में गेहूं की स्थिति कैसी रहती है।

