
हरियाणा में खेती-किसानी में डिजिटल क्रांति, एप और व्हाट्सएप से आसान होगी फसल बिक्री प्रक्रिया
हरियाणा में किसानों के लिए खेती और फसल बेचने की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने घोषणा की है कि अब किसानों को मंडियों में घंटों इंतजार करने और कागजी प्रक्रिया में उलझने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सरकार जल्द ही “किसान ई-खरीद एप” लॉन्च करने जा रही है, जिसके माध्यम से किसानों को उनकी फसल से जुड़ी हर जरूरी जानकारी मोबाइल पर ही मिल जाएगी।

चंडीगढ़ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एप किसानों के लिए एक तरह से “वन-स्टॉप सॉल्यूशन” होगा। इसमें जे-फॉर्म, भुगतान की स्थिति, फसल की बुवाई और उपज का सत्यापन, जमीन का रिकॉर्ड और गेट पास जैसी सभी सुविधाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी। खासतौर पर गेट पास शेड्यूलिंग की सुविधा अगली सरसों फसल से शुरू की जाएगी, जिससे मंडियों में भीड़ और अव्यवस्था कम होगी।
सरकार की इस पहल का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि किसानों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि अगले सप्ताह से किसानों को व्हाट्सएप के जरिए क्यूआर कोड आधारित जे-फॉर्म भेजे जाएंगे। यह डिजिटल दस्तावेज किसान कहीं भी और कभी भी इस्तेमाल कर सकेंगे, चाहे वह बैंक से ऋण लेना हो या किसी अन्य सरकारी योजना का लाभ उठाना हो।
मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल तकनीक लागू करना नहीं, बल्कि किसानों के समय और मेहनत की बचत करना है। उन्होंने बताया कि पहले जहां फसल बेचने की प्रक्रिया काफी लंबी और जटिल होती थी, वहीं अब इसे तेज और आसान बनाया जा रहा है। इस बदलाव से न केवल किसानों को सुविधा मिलेगी, बल्कि पूरी खरीद प्रणाली भी अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनेगी।
प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में गेहूं खरीद के मौजूदा हालात पर भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रबी सीजन 2026-27 में इस बार गेहूं की आवक ने पिछले चार वर्षों के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। यह सरकार की बेहतर योजना और मजबूत प्रबंधन का परिणाम है कि इतनी बड़ी मात्रा में अनाज की खरीद बिना किसी बड़ी समस्या के की जा रही है।
आंकड़ों के अनुसार, अब तक हरियाणा की मंडियों में लगभग 81 लाख 48 हजार मीट्रिक टन गेहूं पहुंच चुका है, जिसकी कुल कीमत करीब 21 हजार 44 करोड़ रुपये है। यह पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है। खास बात यह है कि 11 अप्रैल को एक ही दिन में 7 लाख 71 हजार मीट्रिक टन गेहूं की आवक दर्ज की गई, जो अपने आप में एक नया रिकॉर्ड है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि अब तक करीब 5 लाख 80 हजार किसान अपनी फसल लेकर मंडियों में पहुंच चुके हैं। हर किसान की पहचान डिजिटल गेट पास के जरिए की जा रही है, जिससे फर्जीवाड़े की संभावना लगभग खत्म हो गई है। इसके साथ ही करीब 79 लाख 14 हजार मीट्रिक टन गेहूं का बायोमेट्रिक सत्यापन भी किया जा चुका है, जो कुल आवक का लगभग 97 प्रतिशत है।
खरीद और उठान की प्रक्रिया भी तेजी से जारी है। अब तक लगभग 70 लाख 23 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद पूरी हो चुकी है, जबकि 34 लाख 56 हजार मीट्रिक टन गेहूं का उठान भी किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने बताया कि 18 अप्रैल के बाद उठान की गति और बढ़ गई है और अब रोजाना करीब साढ़े तीन लाख मीट्रिक टन गेहूं उठाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री सैनी ने पुराने समय को याद करते हुए कहा कि पहले गेहूं की कटाई और बिक्री का सीजन करीब ढाई महीने तक चलता था। किसान लंबे समय तक मंडियों में अपनी बारी का इंतजार करते थे और कई बार उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। लेकिन अब सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को केवल 15 दिनों के भीतर समेटने की दिशा में काम किया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस तेजी के कारण कुछ शुरुआती दिक्कतें सामने आई हैं, लेकिन सरकार लगातार सुधार कर रही है।
विपक्ष पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले की सरकारों के समय न तो कोई डिजिटल सिस्टम था और न ही पारदर्शिता। किसानों को कागजी टोकन के सहारे काम करना पड़ता था और भुगतान के लिए हफ्तों या महीनों तक इंतजार करना पड़ता था। लेकिन अब डिजिटल तकनीक के जरिए सब कुछ आसान और तेज हो गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में मंडियों में सभी व्यवस्थाएं ठीक तरह से चल रही हैं और किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो रही है। उनके अनुसार, अगर कोई समस्या बता रहा है तो वह केवल विपक्ष है, जो राजनीतिक कारणों से मुद्दे उठा रहा है।
अंत में कहा जा सकता है कि हरियाणा सरकार की यह डिजिटल पहल कृषि क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव ला सकती है। “किसान ई-खरीद एप” और व्हाट्सएप के माध्यम से मिलने वाली सुविधाएं किसानों के लिए समय, मेहनत और पैसे तीनों की बचत करेंगी। यह कदम न केवल किसानों को सशक्त बनाएगा, बल्कि राज्य की कृषि व्यवस्था को भी आधुनिक और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

