
हरियाणा में आयुष्मान योजना पर संकट: निजी अस्पतालों की चेतावनी से लाखों मरीजों की बढ़ी चिंता
हरियाणा में गरीब और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त इलाज देने वाली आयुष्मान भारत योजना इस समय बड़े संकट से गुजरती दिखाई दे रही है। राज्य के निजी अस्पतालों और डॉक्टरों ने इस योजना को लेकर गंभीर असंतोष जताया है और साफ संकेत दिए हैं कि अगर उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो वे योजना से बाहर हो सकते हैं। ऐसे में लाखों आयुष्मान कार्ड धारकों के सामने इलाज को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है।

यह विवाद अब धीरे-धीरे गंभीर रूप लेता जा रहा है और अगर समय रहते इसका समाधान नहीं हुआ, तो 20 अप्रैल 2026 के बाद राज्य में आयुष्मान योजना के तहत निजी अस्पतालों में इलाज बंद होने की आशंका है।
निजी अस्पतालों का बढ़ता असंतोष
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) हरियाणा ने इस मुद्दे को लेकर आयुष्मान भारत स्वास्थ्य संरक्षण प्राधिकरण के सीईओ को एक पत्र भेजा है। इस पत्र में अस्पतालों की समस्याओं को विस्तार से बताया गया है और साथ ही चेतावनी भी दी गई है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो सामूहिक रूप से योजना से हटने का निर्णय लिया जा सकता है।
IMA का कहना है कि लंबे समय से अस्पतालों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे स्थिति अब असहनीय हो गई है।
लंबित भुगतान ने बढ़ाई मुश्किलें
इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह अस्पतालों को मिलने वाले भुगतान में देरी है। नियमों के अनुसार, अस्पतालों को आयुष्मान योजना के तहत किए गए इलाज का भुगतान 15 दिनों के भीतर मिल जाना चाहिए, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
अस्पतालों का कहना है कि सितंबर 2025 से अब तक करोड़ों रुपये के क्लेम लंबित हैं। कई बार जरूरी दस्तावेज और जवाब देने के बावजूद भुगतान जारी नहीं किया गया।
इस देरी के कारण अस्पतालों की आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ा है। डॉक्टरों और स्टाफ की सैलरी, दवाइयों की खरीद और अन्य खर्चों को संभालना मुश्किल होता जा रहा है।
कमेटियों की निष्क्रियता पर सवाल
IMA हरियाणा ने कमेटियों में प्रतिनिधित्व की कमी को भी एक बड़ा मुद्दा बताया है। जनवरी 2025 में मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद, अब तक IMA के प्रतिनिधियों को ‘एम्पैनलमेंट और ग्रीवेंस कमेटी’ में शामिल नहीं किया गया है।
इतना ही नहीं, पिछले पांच महीनों से इन कमेटियों की कोई बैठक भी नहीं हुई है। इससे नए अस्पतालों को योजना में शामिल करने और नई सेवाओं को मंजूरी देने की प्रक्रिया पूरी तरह रुक गई है।
इस स्थिति ने स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को प्रभावित किया है, जिसका असर मरीजों पर पड़ रहा है।
20 अप्रैल तक दिया गया अल्टीमेटम
IMA हरियाणा ने 7 अप्रैल को आयोजित बैठक में एक अहम निर्णय लिया। बैठक में शामिल सभी निजी अस्पतालों ने सर्वसम्मति से यह तय किया कि वे अपने सरेंडर लेटर तैयार रखेंगे।
पत्र में साफ कहा गया है कि अगर 20 अप्रैल 2026 तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे आयुष्मान योजना के तहत सेवाएं देना बंद कर देंगे।
यह चेतावनी राज्य के स्वास्थ्य तंत्र के लिए एक बड़ा संकेत है कि स्थिति कितनी गंभीर हो चुकी है।
IMA नेतृत्व का बयान
IMA हरियाणा की अध्यक्ष सोनीला सोनी ने कहा कि वे लगातार सरकार के संपर्क में हैं और समस्याओं को उठाते रहे हैं। लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
उन्होंने कहा कि अस्पतालों को समय पर भुगतान नहीं मिल रहा, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है। ऐसे में योजना में बने रहना मुश्किल हो गया है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो सामूहिक रूप से योजना से हटने का फैसला लेना पड़ेगा।
सरकारी पक्ष और तैयारियां
दूसरी ओर, सरकारी अधिकारी स्थिति को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं। यमुनानगर के सिविल सर्जन डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने पहले ही कई सर्जरी केवल सरकारी अस्पतालों में करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि अगर निजी अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत सेवाएं बंद करते हैं, तो मरीज सरकारी अस्पतालों में इलाज करवा सकते हैं। उनके अनुसार, सरकारी अस्पतालों में सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल उनके पास इस संबंध में कोई बड़ी शिकायत नहीं आई है, लेकिन जरूरत पड़ने पर उच्च अधिकारियों को जानकारी दी जाएगी।
मरीजों पर संभावित असर
अगर निजी अस्पताल योजना से बाहर हो जाते हैं, तो इसका सबसे बड़ा असर मरीजों पर पड़ेगा। खासकर वे मरीज जो गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए निजी अस्पतालों पर निर्भर रहते हैं।
सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या अचानक बढ़ सकती है, जिससे वहां की व्यवस्थाओं पर दबाव पड़ेगा। लंबी कतारें, इलाज में देरी और सीमित संसाधनों की समस्या सामने आ सकती है।
समाधान की संभावनाएं
इस पूरे विवाद का हल बातचीत और समझौते में ही छिपा है। अगर सरकार समय पर लंबित भुगतान जारी कर दे और अस्पतालों की अन्य मांगों को मान ले, तो स्थिति को संभाला जा सकता है।
इसके अलावा, एक पारदर्शी और तेज भुगतान प्रणाली लागू करना जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्याएं न आएं।
आगे की स्थिति पर नजर
अब सभी की निगाहें 20 अप्रैल 2026 पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और क्या अस्पतालों को संतुष्ट करने में सफल होती है।
अगर समय रहते समाधान नहीं निकला, तो यह मुद्दा राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
निष्कर्ष
आयुष्मान भारत योजना हरियाणा के लाखों लोगों के लिए मुफ्त इलाज की एक बड़ी उम्मीद रही है। लेकिन मौजूदा विवाद ने इस उम्मीद को झटका दिया है।
निजी अस्पतालों और सरकार के बीच बढ़ता तनाव अगर जल्द खत्म नहीं हुआ, तो इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा। इसलिए जरूरी है कि दोनों पक्ष मिलकर जल्द से जल्द समाधान निकालें, ताकि मरीजों को बिना किसी बाधा के इलाज मिलता रहे।

