
सेक्टर-48 में केमिकल ड्रमों में आग, तीन गाड़ियां झुलसी
फरीदाबाद के सेक्टर-48 में शनिवार को एक खाली पड़े प्लॉट में अचानक आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि प्लॉट में पड़े पेंट और केमिकल के खाली ड्रमों में आग भड़क उठी, जिसके चलते आसमान में काले धुएं का घना गुबार छा गया। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और पास में खड़ी तीन गाड़ियां इसकी चपेट में आ गईं। स्थानीय लोगों ने सूझबूझ दिखाते हुए एक कार का शीशा तोड़कर उसे आग की लपटों से बचाया, लेकिन बाकी वाहनों को नुकसान पहुंचा है।

घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में धुएं का गुबार दूर-दूर तक दिखाई देने लगा। लोगों ने तुरंत आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन केमिकल ड्रमों में लगी आग के कारण लपटें लगातार भड़कती रहीं।
कैसे लगी आग?
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्लॉट में लंबे समय से कबाड़ और खाली केमिकल ड्रम पड़े थे। आशंका जताई जा रही है कि किसी बच्चे ने खेल-खेल में आग लगा दी हो, जिसके बाद यह हादसा हुआ। हालांकि आग लगने के असली कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस और दमकल विभाग की जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि आग दुर्घटनावश लगी या इसके पीछे कोई और वजह है।
इलाके के निवासियों ने बताया कि प्लॉट में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। न तो वहां घेराबंदी थी और न ही ज्वलनशील पदार्थों को सुरक्षित तरीके से रखा गया था। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन ड्रमों को हटाया जाता या उचित प्रबंधन होता तो इतना बड़ा हादसा टल सकता था।
तीन गाड़ियों को हुआ नुकसान
आग की लपटें पास में खड़ी गाड़ियों तक पहुंच गईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तीन वाहन इसकी चपेट में आए, जिनमें से एक गाड़ी बुरी तरह झुलस गई। वहीं एक अन्य कार को लोगों ने तत्परता दिखाते हुए बचा लिया। बताया गया कि कार का शीशा तोड़कर उसे वहां से हटाया गया, जिससे वह पूरी तरह जलने से बच गई।
वाहन मालिकों ने प्रशासन से नुकसान की भरपाई और लापरवाही की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि खाली प्लॉट में खतरनाक केमिकल ड्रम खुले में पड़े रहना अपने आप में बड़ा खतरा है।
दमकल के पहुंचने में देरी की शिकायत
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि सूचना देने के बावजूद दमकल की गाड़ी समय पर नहीं पहुंची। इस वजह से आग तेजी से फैलती चली गई। मौके पर मौजूद लोगों ने खुद ही पानी और रेत डालकर आग पर काबू पाने की कोशिश की।
लोगों का कहना है कि अगर दमकल समय पर पहुंच जाती तो गाड़ियों को इतना नुकसान नहीं होता। हालांकि दमकल विभाग की ओर से अभी इस बारे में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
मौके पर लगी भीड़, ट्रैफिक जाम
आग की खबर फैलते ही आसपास के लोग बड़ी संख्या में मौके पर जुट गए। धुएं का गुबार और ऊंची उठती लपटें देखने के लिए लोगों की भीड़ बढ़ती चली गई, जिससे आसपास की सड़कों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई। पुलिस को बाद में भीड़ नियंत्रित करने के लिए मशक्कत करनी पड़ी।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में भीड़ का इकट्ठा होना राहत और बचाव कार्य में बड़ी बाधा बन सकता है और इससे हादसे का खतरा भी बढ़ जाता है।
मुजेसर हादसे की याद ताजा
स्थानीय लोगों ने इस घटना की तुलना हाल ही में मुजेसर इलाके में हुए बड़े हादसे से की। कुछ दिन पहले वहां भी केमिकल ड्रमों में आग लगने से बड़ा हादसा हुआ था, जिसमें एक पुलिसकर्मी और दो दमकल कर्मियों समेत अब तक कुल छह लोगों की मौत हो चुकी है।
लोगों का कहना है कि अगर समय रहते ऐसे ज्वलनशील कबाड़ को हटाया नहीं गया तो मुजेसर जैसी घटना दोबारा हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से शहर में पड़े खतरनाक केमिकल कचरे की जांच कराने और उसे सुरक्षित तरीके से निपटाने की मांग की है।
प्रशासन के लिए चेतावनी
यह घटना एक बार फिर शहर में सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करती है। रिहायशी इलाकों के पास खाली प्लॉटों में ज्वलनशील पदार्थों का खुले में पड़ा रहना किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि—
ऐसे प्लॉटों की नियमित जांच होनी चाहिए
केमिकल और पेंट ड्रमों के भंडारण के स्पष्ट नियम लागू हों
स्थानीय स्तर पर फायर सेफ्टी जागरूकता बढ़ाई जाए
दमकल प्रतिक्रिया समय को बेहतर बनाया जाए
जांच जारी
फिलहाल आग पर काबू पा लिया गया है और राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। पुलिस और दमकल विभाग मामले की जांच में जुट गए हैं। आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं ताकि आग लगने की असली वजह सामने आ सके।
स्थानीय लोग अब भी सहमे हुए हैं और प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि इलाके में पड़े खतरनाक कबाड़ को तुरंत हटाया जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना से बचा जा सके।

