
सुपरवाइजर के नाम पर 40 लाख का खेल: मालिक ने फर्जी लोन लेकर फंसाया कर्मचारी
हरियाणा के कुरुक्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक फैक्ट्री सुपरवाइजर को विश्वास में लेकर उसके नाम पर करीब 40 लाख रुपये का लोन निकाल लिया गया। यह पूरा खेल इतने शातिर तरीके से किया गया कि पीड़ित को इसकी भनक तब लगी, जब बैंक के नोटिस और कॉल उसके घर तक पहुंचने लगे।

दबखेड़ी निवासी सुनील कुमार पिछले 9 सालों से एक फैक्ट्री में सुपरवाइजर के तौर पर काम कर रहा था। उसकी मासिक सैलरी 24 हजार रुपये तय थी, लेकिन उसे कभी पूरी रकम नहीं दी जाती थी। फैक्ट्री मालिक अक्सर यह कहकर पैसे रोक लेता था कि बाकी रकम जमा हो रही है और समय आने पर एक साथ दे दी जाएगी। इसी भरोसे में सुनील लगातार काम करता रहा।
जनवरी 2025 में आरोपी ने उसे बेहतर भविष्य का सपना दिखाया। उसने कहा कि वह उसे कार दिलवाकर गुरुग्राम की एक बड़ी कंपनी में नौकरी लगवा देगा। इस झांसे में आकर सुनील ने आरोपी पर भरोसा कर लिया। फरवरी में आरोपी और उसके साथियों ने उसे बुलाकर उसका आधार और पैन कार्ड ले लिया।
इसके बाद उसके नाम पर बैंक ऑफ बड़ौदा की डेराबस्सी शाखा में खाता खुलवाया गया। पासबुक और जरूरी दस्तावेज आरोपी ने अपने पास रख लिए। फिर उसे अलग-अलग बैंकों में ले जाकर कई कागजों पर साइन करवाए गए, जिनकी असलियत उससे छुपाई गई।
कुछ समय बाद सुनील को बैंकों से कॉल आने लगे कि वह कार लोन की किस्तें भरे। शुरुआत में उसे समझ नहीं आया, लेकिन जब बैंक कर्मचारी घर तक पहुंच गए, तो उसे धोखाधड़ी का एहसास हुआ। जांच में सामने आया कि उसके नाम पर तीन अलग-अलग बैंकों से लोन लेकर कारें खरीदी गई हैं।
इंडियन बैंक से 13 लाख, महिंद्रा कोटक बैंक से 10 लाख और टोयोटा फाइनेंस सर्विस से करीब 16.5 लाख रुपये का लोन लिया गया। हैरानी की बात यह है कि न तो सुनील के पास कोई कार है और न ही उसने कभी कोई किस्त भरी।
जब उसने आरोपी से इस बारे में बात की, तो उसे टाल दिया गया और बाद में नौकरी से भी निकाल दिया गया। अब पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दी है, जिसके आधार पर आरोपी अश्वनी और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

