उत्तर प्रदेश

सीटीईटी में फिर सॉल्वर का खेल बेनकाब, सहेली बनकर परीक्षा देने आई युवती बायोमेट्रिक में फंसी

सीटीईटी परीक्षा के दौरान नकल और सॉल्वर गिरोह की कोशिशें लगातार सामने आ रही हैं। रविवार को पहली पाली की परीक्षा में एक युवती अपनी सहेली के स्थान पर पेपर देने पहुंची, लेकिन बायोमेट्रिक जांच ने उसकी पूरी योजना पर पानी फेर दिया। पहचान उजागर होते ही वह भावुक हो गई और रोते हुए बार-बार अपने भाई को बुलाने की गुहार लगाती रही। बाद में पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी।

मामला जगदीशपुर स्थित प्रकाश ग्लोबल स्कूल परीक्षा केंद्र का है। यहां सीटीईटी की पहली पाली के लिए अभ्यर्थियों की कड़ी जांच की जा रही थी। प्रवेश पत्र और पहचान पत्र की जांच के बाद बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य था। इसी दौरान एक युवती ने खुद को नीलम यादव, निवासी जौनपुर बताते हुए परीक्षा देने की प्रक्रिया शुरू की। दस्तावेज़ों में कोई कमी नहीं दिखी, लेकिन जैसे ही बायोमेट्रिक मिलान हुआ, मशीन ने पहचान को अस्वीकार कर दिया।

पहले इसे तकनीकी त्रुटि समझकर दोबारा प्रयास किया गया, मगर परिणाम वही रहा। संदेह बढ़ने पर केंद्र प्रशासन ने सख्ती दिखाई तो युवती घबरा गई। कुछ देर बाद उसने अपना असली नाम वंदना यादव बताया और स्वीकार किया कि वह प्रतापगढ़ जिले की रहने वाली है। उसने माना कि वह अपनी सहेली नीलम की जगह परीक्षा देने आई थी।

पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि फर्जी आधार कार्ड और प्रवेश पत्र तैयार करवाए गए थे, ताकि वह बिना शक के परीक्षा कक्ष तक पहुंच सके। हालांकि बायोमेट्रिक सत्यापन के कारण उसकी योजना सफल नहीं हो सकी। पकड़े जाने के बाद वह लगातार भावुक होकर अपने भाई को बुलाने की बात दोहराती रही।

सूचना मिलते ही पुलिस टीम केंद्र पर पहुंची और महिला पुलिसकर्मियों ने उसे थाने ले जाकर पूछताछ की। अधिकारियों ने बताया कि उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि इस साजिश में और कौन-कौन शामिल है।

गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले भी सीटीईटी की द्वितीय पाली में दो अन्य सॉल्वर पकड़े गए थे। टीडी पीजी कॉलेज केंद्र से अनुराग चौबे और विपिन सिंह को गिरफ्तार किया गया था। दोनों अलग-अलग अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने पहुंचे थे। बायोमेट्रिक जांच में पहचान मेल न खाने पर वे भी पकड़े गए। पुलिस के अनुसार दोनों प्रयागराज में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे और कथित तौर पर पैसों के बदले यह काम कर रहे थे।

लगातार दो दिनों में तीन सॉल्वरों की गिरफ्तारी से यह संकेत मिल रहा है कि परीक्षा में गड़बड़ी की कोशिशें संगठित तरीके से हो सकती हैं। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि कहीं कोई गिरोह तो सक्रिय नहीं है, जो अभ्यर्थियों से पैसे लेकर उनके स्थान पर दूसरे लोगों को परीक्षा दिलवा रहा हो। सॉल्वर और असली परीक्षार्थियों के बीच संपर्क, लेन-देन और दस्तावेज़ तैयार करने वालों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। बायोमेट्रिक सत्यापन और डिजिटल निगरानी के कारण ऐसे मामलों का तुरंत खुलासा हो रहा है। आरोपियों के खिलाफ केंद्रीय अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिसमें दोष सिद्ध होने पर पांच वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।

पुलिस अब मोबाइल कॉल डिटेल, वित्तीय लेन-देन और अन्य सुरागों के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। यदि किसी संगठित गिरोह की पुष्टि होती है तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा की पारदर्शिता से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और दोषियों को कानून के अनुसार दंडित किया जाएगा।

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