
साइबर ठगी गैंग को खाते सप्लाई करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, चार आरोपी गिरफ्तार
गुरुग्राम पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराकर ठगी की वारदातों में उनकी मदद करता था। इस मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से कई अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद हुए हैं। पुलिस की इस कार्रवाई को साइबर अपराध पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रवेश अहलावत (26), सागर (25), अभिषेक (26) और यासीन नूर मोहम्मद (54) के रूप में हुई है। इनमें से प्रवेश और सागर हरियाणा के पानीपत जिले के अलग-अलग गांवों के निवासी हैं, जबकि अभिषेक पंजाब के लुधियाना का रहने वाला है और यासीन महाराष्ट्र के ठाणे से संबंध रखता है। चारों आरोपी मिलकर एक संगठित तरीके से साइबर ठगों की मदद कर रहे थे।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के कब्जे से 16 बैंक खातों से संबंधित चेक बुक, पासबुक, डेबिट कार्ड, चार पासपोर्ट और छह मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। यह बरामदगी इस बात की ओर इशारा करती है कि गिरोह बड़े स्तर पर सक्रिय था और कई फर्जी खातों के जरिए साइबर ठगी को अंजाम दिया जा रहा था।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी फर्जी कंपनियों के दस्तावेज तैयार कराते थे और उन्हीं के आधार पर अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाते थे। इसके बाद ये खाते विदेशी साइबर ठगों, खासतौर पर चीनी गिरोहों को बेच दिए जाते थे। इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी, फर्जी निवेश योजनाओं और अन्य साइबर अपराधों के लिए किया जाता था।
पुलिस पूछताछ में यह भी पता चला कि इस पूरे नेटवर्क को चलाने में अभिषेक की अहम भूमिका थी। उसी के जरिए अन्य आरोपियों का संपर्क हुआ और फर्जी दस्तावेज तैयार कर बैंक खाते खुलवाए गए। इसके बाद इन खातों को आगे सप्लाई किया गया। आरोपी इन खातों के बदले मोटी रकम कमाने की फिराक में थे।
आरोपियों ने कबूल किया है कि अब तक उन्हें इस अवैध काम के बदले करीब एक लाख रुपये मिल चुके थे। वहीं, अभिषेक ने खुलासा किया कि उसने ये बैंक खाते आगे दो अन्य लोगों को भेजे थे और हर खाते के बदले उसे 50 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक मिलने वाले थे। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह गिरोह बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है और इसमें कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं।
गुरुग्राम पुलिस ने आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से यासीन और सागर को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया, जबकि प्रवेश और अभिषेक को दो दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है। पुलिस अब इन दोनों से गहन पूछताछ कर रही है, ताकि इस पूरे नेटवर्क के अन्य सदस्यों और इसके संचालन के तरीके का पता लगाया जा सके।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में केवल ठगी करने वाले ही नहीं, बल्कि उन्हें सहयोग देने वाले लोग भी उतने ही दोषी होते हैं। बैंक खाते उपलब्ध कराना साइबर अपराध की कड़ी में एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, क्योंकि इन्हीं खातों के जरिए ठगी की रकम ट्रांसफर और निकालने का काम किया जाता है।
जांच एजेंसियां अब इस बात का भी पता लगाने में जुटी हैं कि इन खातों के जरिए अब तक कितनी ठगी की गई और कितने लोग इसका शिकार हुए हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस गिरोह के तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े हुए हैं।
यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि साइबर अपराध अब केवल तकनीकी ज्ञान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें कई स्तरों पर लोग शामिल होते हैं। कुछ लोग फर्जी दस्तावेज बनाते हैं, कुछ बैंक खाते खुलवाते हैं और कुछ इन खातों का इस्तेमाल कर ठगी को अंजाम देते हैं।
पुलिस ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे अपने बैंक खाते, दस्तावेज या पहचान किसी भी अजनबी के साथ साझा न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें। साथ ही, बिना जानकारी के किसी के कहने पर बैंक खाता खुलवाने या उसे इस्तेमाल करने की अनुमति देना भी गंभीर अपराध हो सकता है।
फिलहाल पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि पूछताछ के दौरान इस गिरोह से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं। यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस की सख्ती और तत्परता को भी दर्शाती है, जिससे ऐसे गिरोहों में डर का माहौल बनेगा।

