
सड़क हादसे पर अब ‘सिस्टम फेल’ नहीं चलेगा, जिम्मेदार अफसरों पर होगी कार्रवाई
नई दिल्ली। राजधानी में हालिया सड़क हादसे के बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ संदेश दिया है कि अब किसी भी दुर्घटना को “सिस्टम की विफलता” बताकर पल्ला नहीं झाड़ा जा सकेगा। यदि सड़क पर खुदाई, खुले गड्ढे, टूटी बैरिकेडिंग या सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण किसी की जान जाती है, तो संबंधित इंजीनियर और फील्ड अधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेदार माने जाएंगे।

जनकपुरी इलाके में गड्ढे में गिरकर एक बाइक सवार की मौत ने विभाग को झकझोर दिया है। इस घटना के बाद पीडब्ल्यूडी ने सभी निर्माण और खुदाई कार्यों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सड़क पर चल रहे किसी भी कार्य के दौरान सुरक्षा इंतजामों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नए आदेश के तहत जहां भी सड़क पर खुदाई या मरम्मत का काम चल रहा है, वहां दिन और रात दोनों समय पर्याप्त बैरिकेडिंग अनिवार्य होगी। इसके साथ ही चेतावनी बोर्ड, रिफ्लेक्टिव साइन, फ्लोरोसेंट टेप और ब्लिंकर लाइट्स लगाना जरूरी होगा। विभाग ने कहा है कि अंधेरे में वाहन चालकों को खतरे का अंदाजा लगाने में कठिनाई होती है, इसलिए दृश्यता बढ़ाने वाले उपायों को प्राथमिकता दी जाए।
पीडब्ल्यूडी ने यह भी निर्देश दिया है कि किसी भी हाल में सड़क का कोई हिस्सा खुला या असुरक्षित नहीं छोड़ा जाएगा। यदि निरीक्षण के दौरान कहीं लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने यह भी जोड़ा है कि भविष्य में दुर्घटना होने पर जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया तत्काल शुरू होगी।
रात्रिकालीन निरीक्षण पर विशेष जोर दिया गया है। अधिकारियों को निर्देश है कि वे नियमित रूप से उन स्थानों की जांच करें जहां दुर्घटना की आशंका अधिक रहती है—जैसे तीखे मोड़, भीड़भाड़ वाले चौराहे, बस स्टॉप, फ्लाईओवर, अंडरपास और हाई-स्पीड कॉरिडोर। पहले जहां केवल दिन में औपचारिक निरीक्षण होते थे, अब रात के समय भी निगरानी अनिवार्य की गई है।
स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को भी सुरक्षा का अहम हिस्सा माना गया है। आदेश में कहा गया है कि जहां रोशनी कम है, लाइटें झिलमिला रही हैं या आंशिक रूप से खराब हैं, वहां तत्काल सुधार किया जाए। यदि स्थायी मरम्मत में समय लगे, तो अस्थायी लाइटिंग की व्यवस्था की जाए। विभाग का मानना है कि पर्याप्त रोशनी न होने से छोटे गड्ढे या अवरोध भी जानलेवा साबित हो सकते हैं।
नालों और ड्रेनों के खुले या टूटे ढक्कनों पर भी विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। ऐसे ढक्कन कई बार दोपहिया वाहन चालकों और पैदल यात्रियों के लिए गंभीर खतरा बन जाते हैं। निर्देश दिया गया है कि सभी क्षेत्रों में निरीक्षण कर टूटे ढक्कनों को तुरंत बदला जाए या अस्थायी कवर लगाया जाए। इसी तरह पुल-पुलिया, रोड ओवर ब्रिज और अंडरपास पर लगे क्रैश बैरियर और रेलिंग की स्थिति की समीक्षा कर उन्हें दुरुस्त करने को कहा गया है।
विभाग का कहना है कि सड़क सुरक्षा केवल निर्माण पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके रखरखाव और सतत निगरानी की भी जिम्मेदारी है। यदि किसी स्थान पर बार-बार शिकायतें मिलती हैं और सुधार नहीं होता, तो यह सीधे तौर पर लापरवाही मानी जाएगी।
जनकपुरी हादसे के बाद आम लोगों ने भी सवाल उठाए थे कि गड्ढे के पास पर्याप्त चेतावनी संकेत नहीं थे। इसी पृष्ठभूमि में पीडब्ल्यूडी ने अपनी जवाबदेही तय करने की दिशा में यह कदम उठाया है। अधिकारियों के मुताबिक, अब हर परियोजना स्थल का रिकॉर्ड रखा जाएगा और जिम्मेदार अधिकारी का नाम स्पष्ट रूप से दर्ज होगा, ताकि आवश्यकता पड़ने पर सीधे जवाबदेही तय की जा सके।
आदेश में यह भी उल्लेख है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी न केवल जन-जीवन को खतरे में डालती है, बल्कि विभाग की साख को भी नुकसान पहुंचाती है। यदि किसी दुर्घटना में विभागीय लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है।
कुल मिलाकर, पीडब्ल्यूडी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब सड़क पर लापरवाही की कीमत चुकानी होगी। विभाग का उद्देश्य केवल निर्देश जारी करना नहीं, बल्कि उन्हें सख्ती से लागू करना है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि इन आदेशों का जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव पड़ता है और क्या इससे सड़क हादसों में वास्तविक कमी आ पाती है। फिलहाल संदेश साफ है—सुरक्षा में चूक हुई तो जिम्मेदारी तय होगी और कार्रवाई से कोई बच नहीं पाएगा।



