
सड़क चौड़ीकरण के नाम पर विवाद, बरेली में प्रशासन और जनता आमने-सामने
व्यापारियों ने लगाए भेदभाव के आरोप, मुआवजे की उठी मांग
उत्तर प्रदेश के बरेली में नगर निगम की अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई अब बड़ा विवाद बनती जा रही है। CM-GRID योजना के तहत खलीलपुर रोड और कोहाड़ापीर क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण के लिए की जा रही पैमाइश के दौरान करीब 300 घरों और 60 दुकानों पर लाल निशान लगाए गए हैं। इसके बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है।

नगर निगम का दावा है कि ये सभी निर्माण अवैध हैं और सड़क के विस्तार में बाधा पैदा कर रहे हैं। पर्यावरण अभियंता राजीव राठी के अनुसार, सभी को नोटिस दिया जा चुका है और आदेश न मानने पर बुलडोजर कार्रवाई तय है। निगम का यह भी कहना है कि कार्रवाई का खर्च संबंधित लोगों से वसूला जाएगा।
हालांकि, स्थानीय निवासियों और व्यापारियों का आरोप है कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही। कोहाड़ापीर से धर्मकांटा चौराहे तक की पैमाइश में एकरूपता नहीं दिखाई दे रही है। कहीं 1.5 मीटर तो कहीं 2.5 मीटर तक निशान लगाए गए हैं। व्यापारियों का कहना है कि बड़े दुकानदारों को बचाया जा रहा है, जबकि छोटे व्यापारियों की रोजी-रोटी पर सीधा हमला किया जा रहा है।
व्यापार मंडल ने इस मुद्दे पर बैठक कर विरोध जताया है और प्रशासन पर भेदभाव का आरोप लगाया है। वहीं, स्थानीय लोग यह भी कह रहे हैं कि अगर वाकई सड़क चौड़ीकरण जरूरी है, तो उन्हें उचित मुआवजा और पुनर्वास दिया जाए।
फिलहाल बरेली में यह मामला केवल अतिक्रमण हटाने का नहीं, बल्कि रोजगार, घर और इंसाफ का सवाल बन चुका है।



