पंजाब

संगरूर के सुनाम में दर्दनाक घटना: जुड़वा बेटियों के जन्म के बाद प्रताड़ना से तंग आकर विवाहिता ने की आत्महत्या, पति-सास समेत तीन पर केस

पंजाब के संगरूर जिले के सुनाम क्षेत्र से एक बेहद मार्मिक और चिंताजनक मामला सामने आया है। गांव चौवास जखेपल में 23 वर्षीय विवाहिता ने कथित रूप से ससुराल पक्ष की प्रताड़ना से परेशान होकर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों का आरोप है कि महिला को जुड़वा बेटियों को जन्म देने के बाद लगातार ताने दिए जा रहे थे, जिससे वह मानसिक रूप से टूट गई थी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर पति, सास और देवर के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

डेढ़ साल पहले हुई थी शादी

मृतका हरप्रीत कौर की शादी करीब डेढ़ वर्ष पूर्व गांव चौवास जखेपल निवासी गुरविंदर सिंह से हुई थी। शादी के बाद कुछ समय तक सब सामान्य रहा, लेकिन जब हरप्रीत ने जुड़वा बेटियों को जन्म दिया तो परिस्थितियां बदलने लगीं।

मृतका की मां जसवीर कौर के अनुसार, बेटियों के जन्म के बाद से ही ससुराल पक्ष का रवैया बदल गया। उन्हें कथित तौर पर ताने दिए जाने लगे कि घर में बेटा नहीं हुआ। परिजनों का आरोप है कि मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने के कारण हरप्रीत लगातार तनाव में रहने लगी थी।

‘तानों’ से टूटा हौसला

परिवार का कहना है कि हरप्रीत ने कई बार फोन पर अपनी मां को ससुराल में मिल रहे व्यवहार के बारे में बताया था। आरोप है कि उसे यह एहसास कराया जाता था कि जुड़वा बेटियों को जन्म देकर उसने परिवार पर बोझ डाल दिया है।

सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि बेटियों को लेकर आज भी कई परिवारों में भेदभाव की मानसिकता मौजूद है, जो महिलाओं के लिए गहरा मानसिक दबाव पैदा करती है। ऐसे मामलों में निरंतर ताने और उपेक्षा किसी भी व्यक्ति को अवसाद की ओर धकेल सकते हैं।

घटना वाले दिन क्या हुआ?

बताया जा रहा है कि बीती शाम हरप्रीत ने घर में ही पंखे से फंदा लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस को सूचित किया गया। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भेज दिया।

मायके पक्ष का आरोप है कि यदि समय रहते उनकी बेटी की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता या उसे सहयोग मिलता, तो शायद यह दुखद कदम न उठाना पड़ता।

पुलिस ने दर्ज किया मामला

चीमा थाना पुलिस ने मृतका की मां के बयानों के आधार पर पति गुरविंदर सिंह, सास अमरजीत कौर और देवर रघवीर सिंह उर्फ काका के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच अधिकारी एएसआई बेयंत सिंह ने बताया कि संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है और आरोपियों की तलाश की जा रही है।

पुलिस के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आरोपी घर से फरार बताए जा रहे हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।

बेटियों को लेकर भेदभाव—एक सामाजिक समस्या

यह मामला केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में गहराई तक जमी उस सोच को उजागर करता है जिसमें बेटियों को आज भी बेटे से कम आंका जाता है। सरकार द्वारा ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियान चलाए जाने के बावजूद कई इलाकों में मानसिकता में अपेक्षित बदलाव नहीं आया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि नवविवाहित महिलाओं पर पुत्र जन्म का दबाव बनाना मानसिक उत्पीड़न की श्रेणी में आता है। यदि लगातार अपमान और दबाव का माहौल बने, तो यह घरेलू हिंसा का रूप ले सकता है।

कानूनी पहलू

ऐसे मामलों में भारतीय कानून महिलाओं को संरक्षण देता है। यदि किसी महिला को मानसिक या शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है और वह उससे तंग आकर आत्महत्या जैसा कदम उठाती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान मोबाइल कॉल डिटेल, पड़ोसियों के बयान और अन्य साक्ष्य जुटाए जाएंगे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि महिला को किस प्रकार की परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा था।

मायके पक्ष का दुख और आक्रोश

हरप्रीत के मायके में मातम पसरा हुआ है। परिवार का कहना है कि उन्होंने बेटी की शादी बड़े अरमानों से की थी। अब उनकी दो नन्हीं पोतियां मां के साये से वंचित हो गई हैं।

मृतका की मां ने प्रशासन से मांग की है कि दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर कड़ी से कड़ी सजा दी जाए, ताकि भविष्य में किसी और बेटी को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।

समुदाय की प्रतिक्रिया

गांव में इस घटना के बाद शोक और आक्रोश का माहौल है। कुछ सामाजिक संगठनों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि बेटियों को लेकर भेदभावपूर्ण सोच खत्म करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।

स्थानीय लोगों का मानना है कि परिवार और समाज को मिलकर ऐसी मानसिकता के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए, ताकि महिलाओं को बराबरी का सम्मान मिल सके।

आगे की कार्रवाई

पुलिस अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर चार्जशीट दाखिल की जाएगी। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो संबंधित आरोपियों को सख्त सजा हो सकती है।

निष्कर्ष

सुनाम के गांव चौवास जखेपल की यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है। बेटियों को जन्म देना कोई अपराध नहीं, बल्कि गर्व की बात होनी चाहिए। एक मां को केवल इसलिए प्रताड़ित करना कि उसने बेटियों को जन्म दिया, न केवल अमानवीय है बल्कि कानूनन दंडनीय भी है।

जरूरत इस बात की है कि समाज में बेटियों के प्रति सम्मान और समानता की भावना को व्यवहार में उतारा जाए। हरप्रीत कौर की असमय मौत केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि उस सोच पर सवाल है जिसे बदलना अब बेहद जरूरी हो गया है।

Join WhatsApp Channel Join Now
Subscribe and Follow on YouTube Subscribe
Follow on Facebook Follow
Follow on X-twitter Follow
Download from Google Play Store Download

Related Articles

Back to top button