
विदेश में नौकरी का लालच बना जाल, साइबर ठगी के अड्डों में कैद हो रहे भारतीय युवा
चंडीगढ़। ऊंची तनख्वाह और बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर भारतीय युवाओं को दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में ले जाकर साइबर अपराध के गिरोहों में झोंकने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। चंडीगढ़ साइबर क्राइम पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि कंबोडिया, म्यांमार, थाईलैंड, वियतनाम और हांगकांग जैसे देशों में सक्रिय संगठित नेटवर्क सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को फंसाकर उनसे जबरन ऑनलाइन ठगी करवा रहे हैं।

पुलिस के अनुसार बेरोजगार और कम शिक्षित युवाओं को फेसबुक, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम पर डाटा एंट्री, बीपीओ, आईटी सपोर्ट और वर्क फ्रॉम होम जैसी नौकरियों के आकर्षक विज्ञापन दिखाए जाते हैं। चयन का भरोसा दिलाकर उन्हें विदेश भेजा जाता है। वहां पहुंचते ही उनके पासपोर्ट और मोबाइल फोन जब्त कर लिए जाते हैं और उन्हें साइबर स्कैम कंपाउंड्स में रखा जाता है। विरोध करने पर धमकी, मारपीट और मानसिक प्रताड़ना तक दी जाती है।
इन कंपाउंड्स में युवाओं को बैंक अधिकारी, कंपनी प्रतिनिधि या सरकारी कर्मचारी बनकर लोगों को निवेश के नाम पर ठगने, लव स्कैम चलाने और फिशिंग कॉल करने के लिए मजबूर किया जाता है। इसका सीधा असर भारत में बैठी आम जनता पर पड़ता है, जो इन ऑनलाइन ठगी का शिकार बनती है।
गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय की संयुक्त कार्रवाई के चलते अब तक करीब 2000 भारतीय युवाओं को इन गिरोहों के चंगुल से छुड़ाकर देश वापस लाया जा चुका है। चंडीगढ़ के दो युवकों ने भी पूछताछ में बताया कि वे सोशल मीडिया पर मिले फर्जी जॉब ऑफर के झांसे में विदेश पहुंच गए थे, जहां उन्हें जबरन साइबर फ्रॉड में लगाया गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ ट्रैवल एजेंट और प्लेसमेंट कंसल्टेंट विदेशी संचालकों के साथ मिलकर नकली नियुक्ति पत्र और जाली दस्तावेज तैयार करते हैं। युवाओं को टूरिस्ट या वर्क वीजा पर विदेश भेजा जाता है और वहां उन्हें अपराध के नेटवर्क में धकेल दिया जाता है।
चंडीगढ़ में साइबर अपराध के मामलों में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में 8495 शिकायतें मिलीं, जिनमें 150 एफआईआर दर्ज कर 147 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। करीब 47 करोड़ रुपये की ठगी सामने आई, जिसमें से 11 करोड़ रुपये की राशि होल्ड कराई गई। हालांकि विदेश में बैठे सरगना अभी भी पुलिस की पहुंच से बाहर हैं।
पुलिस ने इमिग्रेशन कंपनियों और भर्ती एजेंसियों को भी सतर्क किया है। अधिकारियों का कहना है कि विदेश में नौकरी के लिए केवल अधिकृत एजेंट से संपर्क करें और किसी भी ऑफर की पूरी जांच करें। पासपोर्ट या निजी दस्तावेज अनजान लोगों को न सौंपें और संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर दें।
विदेश में सुनहरे भविष्य का सपना देखने वाले युवाओं के लिए यह घटनाक्रम एक बड़ी चेतावनी है। थोड़ी सी लापरवाही उन्हें अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध के जाल में फंसा सकती है, जहां से निकलना आसान नहीं होता।


